CEC की अहम बैठक: वोटर लिस्ट पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, डेडलाइन बढ़ी

देश के लोकतांत्रिक ढांचे को सुदृढ़ रखने वाले भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर आंतरिक असहमति और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच शनिवार को नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में दोनों चुनाव आयुक्त, डॉ. सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक के बाद आयोग ने मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (SIR) और तकनीकी प्रभाग से जुड़े तमाम विवादों पर बिंदुवार और आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए स्थिति को पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है।

निर्वाचन आयोग ने अपने बयान में दृढ़ता से रेखांकित किया कि किसी भी जीवंत और परिपक्व लोकतांत्रिक संस्था के भीतर निर्णय लेने से पूर्व गहन विचार-विमर्श, तर्क-वितर्क, आपत्तियां और रचनात्मक सुझाव आना एक स्वस्थ और स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह बिल्कुल साफ कर दिया कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण, तकनीकी अपग्रेडेशन और नीतिगत सुधारों से जुड़े सभी अंतिम फैसले किसी एक व्यक्ति के न होकर तीनों आयुक्तों की पूर्ण सहमति, विचार-विमर्श और सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं। इस स्पष्टीकरण ने उन सभी अटकलों को खारिज कर दिया है जिनमें आयोग के भीतर मतभेद की बातें कही जा रही थीं।

विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म-6 के साथ संलग्न किए जाने वाले डिक्लेरेशन (घोषणा पत्र) को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कई सवाल उठाए जा रहे थे। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि इस घोषणा पत्र की वैधानिकता और औचित्य को देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह सही और वैध ठहराया है। नए मतदाताओं को जोड़ने और फर्जी या दोहरे प्रविष्टियों को रोकने के उद्देश्य से यह घोषणा पत्र एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय की मुहर लगने के बाद अब कोई संशय शेष नहीं रह गया है।

इसके साथ ही आयोग ने आम नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए यह भी साफ किया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत जिन व्यक्तियों को किसी विसंगति या सत्यापन के संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें घबराने की कतई आवश्यकता नहीं है। आयोग ने निर्देश दिया है कि केवल अत्यंत असाधारण और संवेदनशील मामलों को छोड़कर, आम मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से निर्वाचन कार्यालयों में भौतिक सुनवाई के लिए उपस्थित होने की बाध्यता नहीं होगी। सत्यापन का कार्य स्थानीय स्तर पर दस्तावेजी प्रमाणों और डिजिटल माध्यमों से सुगम तरीके से पूरा किया जाएगा ताकि किसी भी नागरिक को असुविधा न हो।

आयोग के आंतरिक कामकाज और कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे गए एक पत्र को लेकर भी प्रशासनिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। निर्वाचन आयोग ने इस पर बिंदुवार जवाब देते हुए बताया कि कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजा गया पत्राचार आयोग के किसी व्यापक नीतिगत मामले या सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रभाग की सामान्य कार्यप्रणाली से संबंधित नहीं था। यह मामला केवल प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आयोग में सेवा दे रहे एक विशिष्ट अधिकारी के व्यक्तिगत कामकाज और जिम्मेदारियों से जुड़ा एक प्रशासनिक विषय था।

आयोग ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी द्वारा कार्य विभाजन को लेकर जारी किए गए आदेश असल में दो आयुक्तों के दिशा-निर्देशों के बाद लागू नहीं किए गए थे। इसके अलावा, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर (DEC) द्वारा आईटी डिवीजन की निगरानी और समीक्षा का अधिकार कभी भी वापस नहीं लिया गया था। आयोग ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग का तकनीकी ढांचा, डेटा सुरक्षा और मतदाता पोर्टल पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी निगरानी में सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं।

मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण कार्य की प्रगति साझा करते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग ने बताया कि बिहार, पश्चिम बंगाल समेत देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष पुनरीक्षण (SIR) का सघन कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। गोवा का उदाहरण देते हुए आयोग ने बताया कि वहां के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सभी बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे एक भी योग्य नागरिक को छूटने न दें। गोवा में छूटे हुए 97 मतदाताओं में से 81 नागरिकों ने मौके पर ही फॉर्म-6 भरकर अपना नाम सूची में दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कर ली है और शेष के लिए डोर-टू-डोर संपर्क जारी है।

आयोग ने उन सभी नागरिकों और पहली बार वोट डालने जा रहे युवा मतदाताओं को आश्वस्त किया है जिनका नाम किसी कारणवश विशेष अभियान के दौरान छूट गया है। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची का निरंतर अपडेशन (Continuous Updation) एक अनवरत चलने वाली संवैधानिक प्रक्रिया है। ऐसे कोई भी युवा या छूटे हुए मतदाता अपने संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष ऑनलाइन या ऑफलाइन फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं। इसके लिए राज्य स्तर पर सीईओ, जिला स्तर पर डीईओ और विधानसभा स्तर पर ईआरओ को तुरंत विशेष अभियान चलाकर नए मतदाताओं का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है।

त्योहारी सीजन, प्रशासनिक व्यस्तताओं और आगामी चुनावी परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने दो प्रमुख राज्यों – राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और महाराष्ट्र के लिए दावे व आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथियों में महत्वपूर्ण विस्तार किया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मिले औपचारिक अनुरोध को स्वीकार करते हुए आयोग ने दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा को बढ़ाकर 30 अक्टूबर, 2026 कर दिया है। इसके साथ ही दिल्ली में प्राप्त नोटिसों, दावों और आपत्तियों के अंतिम निपटारे की समय-सीमा को 30 नवंबर, 2026 तक निर्धारित किया गया है।

इसी प्रकार, महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा प्रस्तुत की गई प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर महाराष्ट्र के लिए भी संशोधित समय सारिणी जारी की गई है। महाराष्ट्र में नागरिक और राजनीतिक दल अब 12 अक्टूबर, 2026 तक अपनी आपत्तियां और नए दावे दर्ज करा सकेंगे। महाराष्ट्र में इन सभी प्राप्त आवेदनों और नोटिसों के विधि सम्वत निपटारे की अंतिम तिथि 10 नवंबर, 2026 तय की गई है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि विस्तारित समय-सीमा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक पारदर्शी तरीके से अपनी मतदाता पहचान सुनिश्चित कर सके।

Check Also

UN में शहबाज शरीफ के झूठ पर भारत का करारा प्रहार: 9/11 और ओसामा बिन लादेन की याद दिला पेटल गहलोत ने दिखाई औकात

वैश्विक कूटनीति के सबसे बड़े मंच संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें वार्षिक उच्चस्तरीय सत्र …