
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को बड़ी राहत देते हुए लाहौर के ऐतिहासिक गद्दाफी स्टेडियम की पिच को लेकर सुनाए गए अपने पिछले फैसले को वापस ले लिया है। करीब 11 हफ्तों की समीक्षा और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की आधिकारिक अपील पर सुनवाई के बाद आईसीसी ने मैच रेफरी द्वारा दी गई असंतोषजनक (Unsatisfactory) रेटिंग और पेनल्टी को रद्द कर दिया है।
इस फैसले के बाद लाहौर के वेन्यू पर मंडरा रहा डिमेरिट प्वाइंट का खतरा पूरी तरह टल गया है, जिससे भविष्य में बड़े अंतरराष्ट्रीय मैचों और टूर्नामेंट्स की मेजबानी के रास्ते साफ हो गए हैं।
क्या था पूरा मामला और क्यों दिया गया था डिमेरिट प्वाइंट
लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के दौरान पिच के अत्यधिक धीमे, असामान्य उछाल और बल्लेबाजों व गेंदबाजों के बीच असंतुलन को लेकर मैच रेफरी ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में पिच को ‘बिलो स्टैंडर्ड’ मानते हुए ‘अनसेटिस्फैक्ट्री’ करार दिया था। आईसीसी के पिच और आउटफील्ड मॉनिटरिंग प्रोसेस के तहत इस तरह की रेटिंग मिलने पर संबंधित मैदान को एक डिमेरिट प्वाइंट दिया जाता है।
आईसीसी के नियमों के मुताबिक, यदि किसी अंतरराष्ट्रीय मैदान को पांच साल के रोलिंग पीरियड के भीतर 5 डिमेरिट प्वाइंट मिल जाते हैं, तो उस पर 12 महीनों के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की मेजबानी पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। इसी जोखिम को देखते हुए पीसीबी ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी।
पीसीबी की मजबूत दलीलें और आईसीसी की समीक्षा प्रक्रिया
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी के पास विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट, मैच के आंकड़े और पिच की स्थिति का हवाला देते हुए अपील दर्ज कराई थी। पीसीबी का तर्क था कि मैच के दौरान मौसम, तापमान और खेल के विभिन्न चरणों में पिच ने गेंदबाजों और बल्लेबाजों दोनों को मौका दिया तथा मैच का परिणाम भी सकारात्मक दिशा में बढ़ा।
आईसीसी के अपील पैनल ने वीडियो फुटेज, मैच रेफरी की टिप्पणियों और पीसीबी के डेटा की बारीकी से जांच की। 11 हफ्तों की लंबी समीक्षा प्रक्रिया के बाद स्वतंत्र पैनल इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि पिच को ‘अनसेटिस्फैक्ट्री’ के बजाय ‘सेटिस्फैक्ट्री’ (संतोषजनक) श्रेणी में रखा जाना चाहिए था। पैनल की सिफारिश के आधार पर आईसीसी ने आधिकारिक रूप से डिमेरिट प्वाइंट को हटाने की घोषणा कर दी।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और घरेलू वेन्यूज के लिए राहत की सांस
गद्दाफी स्टेडियम लाहौर पाकिस्तान का प्रमुख और सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट वेन्यू है। चैंपियंस ट्रॉफी और आगामी बड़े द्विपक्षीय दौरों को ध्यान में रखते हुए इस मैदान की रेटिंग क्लीन रहना बेहद आवश्यक था। यदि यह डिमेरिट प्वाइंट बना रहता, तो भविष्य में किसी अन्य मैच में पिच खराब होने की स्थिति में स्टेडियम पर बैन का सीधा खतरा पैदा हो सकता था।
पीसीबी के ग्राउंड्समैन और क्यूरेटर टीम के लिए भी यह फैसला मनोबल बढ़ाने वाला है। बोर्ड अब अपने अन्य प्रमुख मैदानों—कराची के नेशनल स्टेडियम और रावलपिंडी क्रिकेट स्टेडियम—की पिचों को लेकर भी नए सिरे से रणनीति बना रहा है ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैचों में प्रतिस्पर्धी पिचें तैयार की जा सकें।
आईसीसी पिच रेटिंग सिस्टम और नियम
आईसीसी अपने हर अंतरराष्ट्रीय मैच के बाद पिच और आउटफील्ड का मूल्यांकन चार श्रेणियों में करता है:
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वेरी गुड (Very Good): जहां गेंद और बल्ले के बीच शानदार संतुलन देखने को मिले।
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सेटिस्फैक्ट्री (Satisfactory): खेल के लिए उपयुक्त और मानक नियमों के अनुरूप।
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अनसेटिस्फैक्ट्री (Unsatisfactory): असामान्य उछाल, बहुत अधिक टर्न या असमान गति (1 डिमेरिट प्वाइंट)।
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अनफिट (Unfit): जहां खेलना खतरनाक हो जाए (3 डिमेरिट प्वाइंट)।
लाहौर के मामले में आईसीसी द्वारा डिमेरिट प्वाइंट वापस लेने से यह स्पष्ट हो गया है कि खेल की सर्वोच्च संस्था अपीलों पर निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाती है।
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