नई दिल्ली। खराब जीवनशैली और खान-पान के कारण नसों में ब्लॉकेज (Artery Blockage) की समस्या आज के समय में बेहद आम हो गई है। अक्सर लोग इस साइलेंट किलर को पहचान नहीं पाते और सीधे हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियों का शिकार हो जाते हैं। आमतौर पर नसों की जांच के लिए महंगे टेस्ट और अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन एक कार्डियोपल्मनरी थेरेपिस्ट ने एक ऐसा तरीका साझा किया है जिससे आप घर पर ही अपनी बीपी मशीन (Digital BP Monitor) की मदद से नसों की स्थिति जान सकते हैं।
क्या है ‘एबीआई टेस्ट’ (ABI Test)?
नसों की ब्लॉकेज चेक करने की इस विधि को मेडिकल भाषा में एंकल ब्रेकियल इंडेक्स (Ankle-Brachial Index – ABI) कहा जाता है। यह टेस्ट शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से के रक्त प्रवाह (Blood Flow) की तुलना करता है। यदि पैरों तक खून की सप्लाई सही ढंग से नहीं हो रही है, तो यह पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) और नसों में रुकावट का संकेत होता है।
स्टेप-बाय-स्टेप: घर पर कैसे करें यह जांच?
डॉक्टर राजवीर के अनुसार, इस टेस्ट को करने के लिए आपको नीचे दिए गए आसान स्टेप्स फॉलो करने होंगे:
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बाजू का बीपी मापें: सबसे पहले सामान्य तरीके से अपनी बाजू (Arm) पर कफ बांधकर ब्लड प्रेशर चेक करें। इसमें ऊपर वाली रीडिंग यानी सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (जैसे 120/80 में 120) को नोट कर लें।
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एंकल (टखने) का बीपी मापें: अब बीपी मशीन के कफ को अपने टखने (जहां पैर और पंजा जुड़ता है) पर बांधें और वहां का ब्लड प्रेशर चेक करें। यहां की भी ऊपर वाली (सिस्टोलिक) रीडिंग को नोट करें।
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ऐसे करें कैलकुलेशन: अब पैर वाली रीडिंग को हाथ वाली रीडिंग से भाग (Divide) दें।
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उदाहरण: यदि पैर का बीपी 120 है और हाथ का भी 120, तो $120 \div 120 = 1$ होगा।
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रीडिंग का मतलब: क्या कहता है आपका स्कोर?
कैलकुलेशन के बाद जो नंबर आएगा, वही आपकी नसों की सेहत का हाल बताएगा:
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1 के आसपास (0.9 से 1.3): यदि स्कोर 1 के करीब है, तो आपकी नसें पूरी तरह सामान्य हैं और रक्त प्रवाह सही है।
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0.9 से कम: यदि रीडिंग 0.9 से कम आती है, तो यह नसों में ब्लॉकेज या संकुचन का शुरुआती संकेत है। यह हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा सकता है।
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1.4 से ज्यादा: यदि स्कोर 1.4 से अधिक है, तो इसका मतलब है कि आपकी नसें कड़ी (Stiff) हो गई हैं और उनका लचीलापन खत्म हो चुका है।
कब जाएं डॉक्टर के पास?
घर पर किया गया यह टेस्ट एक प्राथमिक संकेत है। यदि आपकी रीडिंग 0.9 से कम या 1.4 से अधिक आती है, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करें और पेशेवर जांच करवाएं ताकि समय रहते हृदय रोगों के खतरे को टाला जा सके।
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