
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ और पत्नी शाइस्ता परवीन पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त की गई 345 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्तियों को अब आम जनता की सुविधाओं के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। प्रशासन ने इन जमीनों पर अस्पताल, पार्क और आंगनबाड़ी केंद्र जैसी सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने का फैसला किया है।
सुरक्षा और उपयोग के लिए विशेष समिति गठित
प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने इन संपत्तियों के संरक्षण और सही इस्तेमाल के लिए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) हर्षिका सिंह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति में प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) के उपाध्यक्ष और एडीएम समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो जमीनों की निगरानी और निर्माण कार्यों की योजना बनाएंगे।
प्रयागराज, कौशांबी और लखनऊ तक फैली हैं संपत्तियां
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, यह संपत्तियां केवल प्रयागराज के चकिया, करेली, झूंसी और धूमनगंज तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि कौशांबी और लखनऊ के गोमतीनगर व शेखपुर जैसे पॉश इलाकों में भी स्थित हैं। इसके अलावा अतीक गैंग के 13 बैंक खातों को भी फ्रीज किया जा चुका है।
होलागढ़ की कृषि भूमि सबसे कीमती, जांच जारी
जांच में सामने आया है कि प्रयागराज के होलागढ़ स्थित अतीक की कृषि भूमि सबसे मूल्यवान है, जिसकी अनुमानित कीमत 123.28 करोड़ रुपये है। इसके अलावा रहीमाबाद, लखनऊ और कौशांबी की जमीनों की कीमत भी अरबों में आंकी गई है। जांच एजेंसियां अब इन संपत्तियों के कागजात और खरीद के स्रोतों की गहराई से पड़ताल कर रही हैं ताकि आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा सके।
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