ग्रेटर नोएडा/इलाहाबाद: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport) के पास जेवर बांगर क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर ‘बुलडोजर’ चलाने की तैयारी कर रहे यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा – YEIDA) को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्राधिकरण मनमाने तरीके से किसी का निर्माण नहीं गिरा सकता और ध्वस्तीकरण से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।
हाईकोर्ट का कड़ा फैसला: ‘प्राकृतिक न्याय का पालन जरूरी’
जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस कुनाल रवि सिंह की डिवीजन बेंच ने जेवर बांगर की जमीन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि:
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सुनवाई का अवसर: किसी भी निर्माण को गिराने से पहले संबंधित व्यक्ति को कानूनी नोटिस जारी करना होगा।
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अवैध होगी कार्रवाई: बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए की गई कोई भी तोड़फोड़ पूरी तरह अवैध मानी जाएगी।
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नागरिक अधिकार: सरकारी एजेंसियां मनमाने तरीके से कार्रवाई नहीं कर सकतीं। संपत्ति और नागरिक अधिकारों को प्रभावित करने वाली हर कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला जेवर एयरपोर्ट के नजदीक खसरा संख्या 573 और 574 की करीब डेढ़ हेक्टेयर जमीन से जुड़ा है। विकास कार्यों के कारण इस जमीन की कीमत वर्तमान में अरबों रुपये तक पहुंच चुकी है।
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तीन याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में गुहार लगाई थी कि यीडा उनके मकानों और निर्माणों को बिना किसी वैध आदेश के ध्वस्त करने की तैयारी कर रहा है।
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हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को शर्तों के साथ राहत देते हुए ध्वस्तीकरण पर फिलहाल रोक लगा दी है।
दयानतपुर गांव में भी तोड़फोड़ पर रोक
सिर्फ जेवर बांगर ही नहीं, बल्कि दयानतपुर गांव में हो रहे निर्माण पर भी कोर्ट ने यीडा को झटका दिया है। ग्रीन एवेन्यू बिल्डटेक और अन्य याचिकाकर्ताओं की मांग पर कोर्ट ने आदेश दिया कि दयानतपुर स्थित खसरा नंबर 463/1 पर बनी चारदीवारी को बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए न तोड़ा जाए।
अवैध निर्माणों पर पहले हो चुकी है कार्रवाई
यीडा ने इससे पहले एयरपोर्ट की अधिसूचित भूमि पर सख्त रुख अपनाया था:
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मार्च 2025 में रामनेर, किशनपुर और सबौता में करीब 25 मकानों को ध्वस्त किया गया था।
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प्राधिकरण के अनुसार, उन निर्माणों के लिए कई बार नोटिस जारी किए गए थे, जिसके बाद ही बुलडोजर की कार्रवाई की गई थी।
हादसों का भी रहा है इतिहास
एयरपोर्ट क्षेत्र के आसपास हो रहे अनियोजित और अवैध निर्माण के दौरान कई गंभीर हादसे भी हो चुके हैं। पिछले वर्ष नंगला हुकुम सिंह गांव में एक अवैध तीन मंजिला मकान की शटरिंग गिरने से 4 मजदूरों की जान चली गई थी। प्राधिकरण का तर्क रहा है कि सुरक्षा और मास्टर प्लान के उल्लंघन के कारण इन अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई जरूरी है।
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