Hardoi Success Story: किसान के बेटे ने रचा इतिहास, नौकरी छोड़ शुरू की UPSC की तैयारी और पहली बार में ही लहराया परचम

हरदोई: कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और लक्ष्य साफ हो, तो कोई भी बाधा आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के एक छोटे से गांव काजीपुर के रहने वाले योगेंद्र कुमार सिंह पटेल ने इस बात को सच कर दिखाया है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 286वीं रैंक हासिल कर योगेंद्र ने न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे जिले का मान बढ़ाया है। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले योगेंद्र की यह यात्रा उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों के अभाव में बड़े सपने देखते हैं।

IIT कानपुर से पढ़ाई और फिर लाखों की नौकरी को मारी लात

योगेंद्र की शैक्षणिक यात्रा शुरू से ही मेधावी रही है। मल्लावां कोतवाली क्षेत्र के काजीपुर गांव में जन्मे योगेंद्र ने प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ पब्लिक स्कूल माधौगंज से पूरी की। इसके बाद उन्होंने लखनऊ के प्रतिष्ठित CMS विद्यालय से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने IIT कानपुर जैसे देश के शीर्ष संस्थान से बीटेक और एमटेक की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा के बाद उन्हें आईआईटी बैंगलोर में एक बेहतरीन पद पर नौकरी मिली, लेकिन उनके मन में कुछ और ही चल रहा था।

जब ‘मन की पुकार’ ने बदला करियर का रास्ता

बैंगलोर में दो साल तक शानदार करियर और अच्छी सैलरी के बावजूद योगेंद्र को संतुष्टि नहीं मिल रही थी। उनका लक्ष्य समाज की मुख्यधारा में जुड़कर लोगों की सेवा करना था। साल 2023 में उन्होंने एक बड़ा जोखिम लेते हुए अपनी जमी-जमाई नौकरी से इस्तीफा दे दिया और पूरी तरह से सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए। बिना किसी भटकाव के कड़ी मेहनत और सही रणनीति का नतीजा यह रहा कि साल 2026 में उन्होंने अपने पहले गंभीर प्रयास में यूपीएससी की बाधा पार कर ली।

किसान पिता और शिक्षिका मां का रहा भरपूर सहयोग

योगेंद्र की इस बड़ी सफलता के पीछे उनके परिवार का संघर्ष और त्याग भी शामिल है। उनके पिता गिरीश कुमार पेशे से किसान हैं और मां रामरोशनी एक शिक्षिका हैं। खेती-किसानी के माहौल में पले-बढ़े योगेंद्र को उनके माता-पिता ने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। उनके बड़े भाई पंकज भी एलटी पद पर कार्यरत हैं और कानपुर के डफरिन अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं। जैसे ही योगेंद्र की 286वीं रैंक की खबर गांव पहुंची, उनके माधौगंज स्थित आवास पर बधाई देने वालों का तांता लग गया।

गांव से दिल्ली तक का सफर और भावी योजनाएं

योगेंद्र की सफलता ने यह साबित कर दिया कि सफलता के लिए शहर की चमक-धमक नहीं, बल्कि गांव की मिट्टी का जज्बा भी काफी है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी लगन, माता-पिता के आशीर्वाद और गुरुओं के मार्गदर्शन को दिया है। प्रशासनिक सेवा में जाकर वे शिक्षा और कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए काम करना चाहते हैं, ताकि उनके जैसे अन्य ग्रामीण युवाओं को भी आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल सकें।

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