सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। यह पावन दिन गुरुओं के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त करने का होता है। साल 2026 में आषाढ़ मास की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा का महापर्व अपने साथ कई दुर्लभ और शुभ ग्रहों के संयोग लेकर आ रहा है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, लगभग 56 वर्षों के बाद गुरु पूर्णिमा पर बुधादित्य राजयोग, शश राजयोग और हंस राजयोग जैसे शक्तिशाली योगों का निर्माण हो रहा है। इस दिन सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनेगा, जबकि चंद्रमा मकर राशि में विराजमान रहकर शुभ प्रभाव बढ़ाएंगे। इन राजयोगों में की गई पूजा, मंत्र जप, गुरु दीक्षा और दान-पुण्य का कई गुना उत्तम फल प्राप्त होता है।
क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही महाकाव्य महाभारत और चारों वेदों के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। इसलिए इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहा जाता है। इसके अलावा, इसी तिथि पर भगवान शिव ने ‘आदि गुरु’ के रूप में सप्तऋषियों को ज्ञान दिया था और भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला उपदेश (धम्मचक्रप्रवर्तन) दिया था।
गुरु पूर्णिमा 2026: पूर्णिमा तिथि और शुभ पूजा मुहूर्त
उदयातिथि के नियम के अनुसार गुरु पूर्णिमा का महापर्व 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाया जाएगा।
-
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 28 जुलाई 2026 को सायंकाल 06:18 बजे से
-
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जुलाई 2026 को रात्रि 08:05 बजे तक
-
गुरु पूजन एवं सत्यनारायण व्रत मुहूर्त: 29 जुलाई, प्रातः 05:41 बजे से सुबह 09:47 बजे तक
-
अभिजीत/शुभ चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 05:41 बजे से 07:22 बजे तक और सुबह 09:03 बजे से 10:44 बजे तक
गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें?
-
गुरु वंदन: इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद अपने गुरु के पास जाकर उनके चरण स्पर्श करें, वस्त्र, फल या दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
-
सत्यनारायण कथा: शुभ मुहूर्त में घर में भगवान सत्यनारायण की कथा और पूजा कराएं।
-
गुरु मंत्र का जाप: जिनके गुरु नहीं हैं, वे भगवान विष्णु या शिव जी को अपना गुरु मानकर ‘ॐ गुरुवे नमः’ या अपने गुरु मंत्र का जाप करें।
-
दान कार्य: इस दिन पीले वस्त्र, चना दाल, धार्मिक पुस्तकें, पीली मिठाई और फल का दान करना बेहद शुभ माना जाता है।
The News 11 – Hindustan Newspaper, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया