
आंध्र प्रदेश के कथित शराब घोटाले की वित्तीय जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी (Enforcement Directorate) ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अंबाती रामबाबू को औपचारिक समन जारी किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने उन्हें 4 नवंबर को हैदराबाद स्थित अपने क्षेत्रीय कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने और पूछताछ के दौरान अपना बयान दर्ज कराने का स्पष्ट निर्देश दिया है। अधिकारियों से मिली प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह पूरा प्रकरण वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पिछले शासनकाल के दौरान शराब ढुलाई (Liquor Transportation) से जुड़े भारी-भरकम ठेके देने, निविदा शर्तों में मनमाने बदलाव करने और चहेती कंपनियों को अवैध वित्तीय लाभ पहुंचाने से संबंधित है। पूर्व मंत्री को भेजा गया यह समन इस बात का पुख्ता संकेत है कि जांच एजेंसी अब नौकरशाहों और बिचौलियों की कड़ियों को जोड़ते हुए तत्कालीन सरकार के शीर्ष राजनीतिक चेहरों तक पहुंच रही है, जिससे राज्य की क्षेत्रीय राजनीति में भारी उबाल आ गया है।
ईडी की यह सख्त कार्रवाई अचानक नहीं हुई है, बल्कि इससे पहले भी एजेंसी इस मामले से जुड़े कई रसूखदार लोगों पर शिकंजा कस चुकी है। करीब नौ महीने पहले शराब परिवहन घोटाले में पूर्व मंत्री करुमुरी वेंकट नागेश्वर राव के बेटे करुमुरी सुनील कुमार को धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए (PMLA) के तहत 18 जून को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी ने हैदराबाद और विजयवाड़ा के अलग-अलग ठिकानों से मिले वित्तीय सुरागों के आधार पर अपनी जांच का दायरा विस्तृत किया था। अंबाती रामबाबू की पेशी के दौरान शराब आपूर्ति नीति, ट्रांसपोर्टेशन के ठेकों के आवंटन में कथित राजनीतिक दखल और फंड के संदिग्ध लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों की एक लंबी सूची तैयार की गई है, जिसके जरिए वित्तीय गड़बड़ी के अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
इस वित्तीय घोटाले की जड़ों तक पहुंचने के लिए ईडी के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने 11 जून को पीएमएलए के कड़े प्रावधानों के तहत एक साथ पांच प्रमुख ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया था। इस रेड के दौरान करुमुरी सुनील कुमार, उनके पिता, आंध्र प्रदेश सरकार के पूर्व आईटी सलाहकार और इस कथित शराब सिंडिकेट के मुख्य षड्यंत्रकारी माने जा रहे केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, आंध्र प्रदेश राज्य पेय पदार्थ निगम लिमिटेड यानी एपीएसबीसीएल (APSBCL) के पूर्व प्रबंध निदेशक डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी, विजया नरसिम्हा रेड्डी और वल्लू संदीप से संबंधित आवासीय और व्यावसायिक परिसरों की गहन तलाशी ली गई थी। इस छापेमारी में प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने करोड़ों की चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेजी सबूत अपने कब्जे में लिए थे।
तलाशी की इस कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी ने कई विलासिता पूर्ण सामान, एक हाई-एंड लग्जरी कार, 94.5 लाख रुपये मूल्य की दुर्लभ ब्रांडेड घड़ियां और भारी मात्रा में बेहिसाब नकदी जब्त की थी। इसके अतिरिक्त संदिग्ध संयुक्त उद्यम समझौतों (Joint Venture Agreements), फर्जी नकद लेनदेन की कच्ची डायरियां और बेनामी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए गए थे। इन आपत्तिजनक साक्ष्यों के मिलने के बाद उसी दिन ईडी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी और पूर्व एमडी डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी को गिरफ्तार कर लिया था, जिनसे मिली रिमांड डायरी की जानकारियों ने पूर्व मंत्री अंबाती रामबाबू के दरवाजे तक जांच का रुख मोड़ दिया।
प्रवर्तन निदेशालय ने इस धन शोधन मामले की औपचारिक शुरुआत आंध्र प्रदेश अपराध जांच विभाग यानी सीआईडी (CID) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की थी। यह मूल एफआईआर राज्य सरकार के सतर्कता विभाग के अतिरिक्त सचिव द्वारा सौंपी गई आधिकारिक शिकायत पर दर्ज की गई थी। सतर्कता जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि शराब परिवहन के ठेकों में जानबूझकर की गई सुनियोजित अनियमितताओं के चलते राज्य के सरकारी खजाने को सीधे तौर पर 195.33 करोड़ रुपये के भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा। इस पूरी लूट को अंजाम देने के लिए प्रशासनिक नियमों और टेंडर की पूर्व-निर्धारित शर्तों को ताक पर रख दिया गया था।
जांच में ईडी ने यह दावा किया कि एपीएसबीसीएल की शराब ढुलाई निविदा की आवश्यक शर्तों में शीर्ष स्तर से जानबूझकर बदलाव किए गए ताकि बाजार की अन्य योग्य और सक्षम लॉजिस्टिक्स कंपनियों को होड़ से बाहर किया जा सके। यह नीतिगत हेरफेर केवल चुनिंदा निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था। इनमें ‘सिग्मा सप्लाई चेन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ (SSCSPL) और बाद में ‘प्रसाद ट्रांसपोर्ट्स’ को आगे लाया गया। वित्तीय जांच एजेंसी के अनुसार, ये कंपनियां केवल कागजों पर टेंडर हथियाने वाली मुखौटा इकाइयां थीं, जबकि इन कंपनियों की वित्तीय डोर और वास्तविक नियंत्रण पर्दे के पीछे बैठे कुछ बेहद प्रभावशाली राजनेताओं और उनके करीबी सहयोगियों के हाथों में था।
ईडी की विस्तृत चार्जशीट और जांच रिपोर्ट के अनुसार, शराब परिवहन के माध्यम से सरकारी धन को निजी जेबों में ट्रांसफर करने के लिए एक बहुस्तरीय गुप्त नेटवर्क तैयार किया गया था। इस गठजोड़ में केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, तुकेकुला ईश्वर किरण कुमार रेड्डी और अंजनी कुमार ने निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी के साथ मिलकर पूरी योजना बनाई थी। इन लोगों ने आपस में सांठगांठ करके शराब ढुलाई के ठेके बाजार की वास्तविक दरों से लगभग दोगुनी ऊंची कीमत पर आवंटित करा लिए। कागजों पर एसएससीएसपीएल का इस्तेमाल केवल एक वैध निविदाकर्ता का चेहरा दिखाने के लिए किया गया, जबकि सड़क पर वास्तविक ट्रांसपोर्टेशन का काम तुकेकुला ईश्वर किरण कुमार रेड्डी उर्फ किरण कुमार और उनकी टीम संभालती थी।
जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि शराब के कार्टन बॉक्स की ढुलाई दरों में कृत्रिम रूप से भारी बढ़ोतरी की गई थी। पूर्ववर्ती व्यवस्था में जिला स्तर पर प्रति कार्टन बॉक्स परिवहन की औसत दर करीब 19.68 रुपये थी, जिसे बिना किसी तार्किक या बाजार विश्लेषण के सीधे बढ़ाकर 35.57 रुपये प्रति बॉक्स कर दिया गया। इस भारी अंतर से शराब सिंडिकेट ने करोड़ों रुपये का अवैध मुनाफा कमाया। इतना ही नहीं, एजेंसी की पड़ताल में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस सिंडिकेट ने ढुलाई के छोटे-छोटे उप-ठेके (Sub-contracts) विभिन्न जिलों के स्थानीय राजनीतिक नेताओं, उनके रिश्तेदारों और शैल कंपनियों को बांट दिए थे ताकि किसी भी स्तर पर विरोध न हो और सरकारी धन की बंदरबांट निर्बाध रूप से जारी रहे।
जांच एजेंसी ने आंध्र प्रदेश सरकार के पूर्व आईटी सलाहकार केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी को इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड और रणनीतिकार करार दिया है। उन्होंने अपने राजनीतिक रसूख और पद की धौंस दिखाकर निगम के पूर्व एमडी डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी के साथ मिलकर यह खेल रचा। वासुदेव रेड्डी पर यह गंभीर आरोप है कि उन्होंने एपीएसबीसीएल की पहले से सफलतापूर्वक चल रही विकेंद्रीकृत परिवहन व्यवस्था को एक झटके में समाप्त कर दिया। पहले शराब ढुलाई का प्रबंधन जिला स्तरीय कमेटियों के जरिए पारदर्शी तरीके से होता था, लेकिन उसे बदलकर पूरे राज्य के लिए एक केंद्रीकृत नीति थोप दी गई। इसके लिए सरकार को गुमराह करने वाली भ्रामक रिपोर्टें भेजी गईं और काल्पनिक तकनीकी अड़चनों का बहाना बनाया गया।
इतना ही नहीं, डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी ने राज्य मंत्रिमंडल या सक्षम सरकारी प्राधिकारी की अनिवार्य वैधानिक मंजूरी लिए बिना ही इस केंद्रीकृत नीति को लागू कर दिया। इसके बाद एसएससीएसपीएल को दिए गए परिवहन ठेके की समय सीमा को बिना किसी नए टेंडर के बार-बार गैरकानूनी रूप से बढ़ाया गया। मूल अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद भी यह विस्तार जारी रहा। इस प्रशासनिक मनमानी, निविदा हेरफेर और दरों में कृत्रिम उछाल के कारण सरकारी राजस्व को 195.33 करोड़ रुपये की सीधी चपत लगी। अब जब ईडी ने पूर्व मंत्री अंबाती रामबाबू को तलब किया है, तो पूछताछ में यह जानने की कोशिश की जाएगी कि इस परिवहन नीति के बदलाव और ठेकों के विस्तार में उनकी क्या प्रत्यक्ष या परोक्ष भूमिका थी और क्या इस अवैध कमीशन का कोई हिस्सा चुनावी फंडिंग या निजी संपत्तियों के निर्माण में इस्तेमाल किया गया।
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