
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में हालात लगातार विस्फोटक होते जा रहे हैं। क्षेत्रीय चुनावों और स्थानीय अधिकारों की मांग को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक भयंकर जन-आंदोलन और खूनी संघर्ष का रूप ले चुका है। प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच चल रही तनातनी अब अपने 53वें दिन में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन हिंसा, आगजनी और गोलीबारी का यह दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि रोजाना सामने आने वाली खौफनाक तस्वीरें और दावे इस पूरे इलाके को एक सुलगते हुए रणक्षेत्र में तब्दील कर चुके हैं, जहां आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है और हर तरफ भय व अनिश्चितता का माहौल है।
कोटली में ताजा हिंसा और खून-खराबे का खौफनाक मंजर
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ताजा और सबसे दहला देने वाली हिंसा कोटली क्षेत्र से सामने आई है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख नेताओं में शामिल उमर नजीर कश्मीरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर ताबड़तोड़ गोलीबारी की है। इस अंधाधुंध फायरिंग में एक प्रदर्शनकारी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। स्थानीय सूत्रों और जेएएसी के बयानों के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने इस बार कार्रवाई के दौरान महिलाओं और बच्चों को भी निशाना बनाया, जिससे स्थानीय आबादी में भारी आक्रोश फैल गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इस घटना के बाद से कोटली और आसपास के इलाकों में तनाव का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
क्या है 12 सीटों का विवाद और क्यों आंदोलित है PoK?
इस लंबे समय से चल रहे और अब हिंसक रूप ले चुके संघर्ष की जड़ें PoK विधानसभा की उन 12 विवादित और आरक्षित सीटों में निहित हैं, जो कश्मीरी शरणार्थियों के लिए तय की गई हैं। जेएएसी, जो विभिन्न स्थानीय एक्टिविस्ट समूहों, व्यापारियों, छात्रों और वकीलों का एक बड़ा गठबंधन है, का आरोप है कि पाकिस्तान की संघीय सरकार और उसकी खुफिया एजेंसियां इन आरक्षित सीटों की चुनावी प्रक्रिया में लगातार हेरफेर करती हैं। संगठन का मुख्य तर्क है कि इन सीटों के जरिए पाकिस्तान अपनी पसंद की कठपुतली सरकार और प्रधानमंत्री को सत्ता में बिठाता है, जो स्थानीय जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने के बजाय इस्लामाबाद के इशारों पर काम करती है। जेएएसी इसे सीधे तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों पर करारा हमला और स्थानीय जनता के राजनीतिक हकों का खुला अपहरण मानती है, जिसके खिलाफ पिछले करीब दो महीने से यह कड़ा प्रतिरोध जारी है।
रावलकोट और मीरपुर बने हिंसा के मुख्य केंद्र
जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, इस आंदोलन का दायरा और हिंसा की तीव्रता बढ़ती जा रही है। विशेष तौर पर पिछले कुछ दिनों से रावलकोट और मीरपुर क्षेत्र इस संघर्ष के सबसे बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं। इन दोनों प्रमुख शहरों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच आमने-सामने की खूनी झड़पें देखने को मिली हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पूरी तरह से अहिंसक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे थे, लेकिन पुलिस और सैन्य बलों ने अत्यधिक और अमानवीय बल प्रयोग करते हुए उन पर कहर बरपाया। सड़कों पर टायर जलाए जाने, रास्तों को पूरी तरह से जाम करने और सुरक्षा बलों द्वारा आंसू गैस के गोले दागने व गोलियां चलाने की घटनाओं से पूरा क्षेत्र युद्ध का मैदान बन गया है। रात के अंधेरे में भी गोलियों की तड़तड़ाहट और सायरन की आवाजों से लोगों की रातों की नींद उड़ चुकी है।
109 मौतों का चौंकाने वाला दावा बनाम पाकिस्तानी सरकार का सख्त इनकार
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा टकराव हताहतों के आंकड़ों को लेकर है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने एक सनसनीखेज बयान जारी कर दावा किया है कि जब से यह आंदोलन और संघर्ष शुरू हुआ है, तब तक सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कुल मिलाकर 109 प्रदर्शनकारी अपनी जान गंवा चुके हैं। संगठन का यह भी कहना है कि इन मृतकों में हालिया दिनों की हिंसा में मारी गईं महिलाएं और मासूम बच्चे भी शामिल हैं, जिनकी संख्या शुरुआती दौर में कम आंकी गई थी। दूसरी तरफ, पाकिस्तान की संघीय सरकार और PoK का प्रशासन इन सभी आंकड़ों को सिरे से खारिज कर रहा है। इस्लामाबाद का आधिकारिक रुख यह है कि इस संघर्ष में किसी भी आम नागरिक की मौत नहीं हुई है। सरकार का दावा है कि प्रदर्शनकारियों के बीच प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के तत्व घुसपैठ कर चुके हैं, जो माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
इस्लामाबाद का कड़ा रुख: आतंकवादियों की घुसपैठ का आरोप और बातचीत से इनकार
पाकिस्तान सरकार ने इस पूरे संकट पर बेहद आक्रामक और कठोर रवैया अपनाया है। पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं करेगी। उन्होंने साफ कहा कि कानून अपना काम करेगा और हिंसा फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही, पाकिस्तानी अधिकारियों ने यह सनसनीखेज आरोप भी लगाया है कि प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अन्य असामाजिक तत्व इन विरोध प्रदर्शनों के भीतर घुसपैठ कर चुके हैं। सरकार का तर्क है कि ये तत्व शांतिपूर्ण आंदोलन की आड़ में देश की संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं और सुरक्षा बलों पर घातक हथियारों से हमले कर रहे हैं, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों को आत्मरक्षा में कड़ी कार्रवाई करनी पड़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय चिंताएं और भारत की तीखी प्रतिक्रिया
PoK में पिछले 53 दिनों से सुलग रही इस आग और मानवाधिकारों के हनन की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सुनाई देने लगी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) जैसे संगठनों ने इस क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष, मौतों और इंटरनेट-संचार पर पाबंदियों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। इन संगठनों ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके। वहीं दूसरी ओर, भारत सरकार ने भी PoK में चल रहे इन घटनाक्रमों और वहां आयोजित होने वाले चुनावों को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान इन हथकंडों के जरिए अपने अवैध कब्जे को वैध साबित करने की नाकाम कोशिश कर रहा है। भारत का यह दृढ़ रुख रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जिसमें PoK के क्षेत्र भी शामिल हैं, भारत का अभिन्न अंग हैं और वहां के लोगों का यह शोषण पाकिस्तान की आर्थिक व प्रशासनिक विफलताओं का प्रत्यक्ष परिणाम है।
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