अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और बेहद गंभीर सुरक्षा चिंताओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक सनसनीखेज इनसाइड स्टोरी सामने आई है। तुर्की के अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से वाशिंगटन वापस लौटते समय ट्रंप ने बीच रास्ते में अचानक अपना आलीशान नया विमान बदल दिया। कतर द्वारा गिफ्ट में दिए गए नए बोइंग 747-8 जेट को ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहॉल एयरबेस पर छोड़कर ट्रंप अपने पुराने और सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ‘एयरफोर्स वन’ (Air Force One) विमान में सवार हो गए। इस अचानक हुए बदलाव ने वैश्विक मीडिया और रक्षा गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
सुरक्षा कवच की कमी: सीक्रेट सर्विस की खुफिया एडवाइजरी
‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, इस औचक बदलाव के पीछे अमेरिकी सीक्रेट सर्विस की बेहद संवेदनशील सलाह थी। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, कतर से उपहार में मिले नए बोइंग जेट में अभी तक वे सभी एडवांस एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम, न्यूक्लियर ब्लास्ट शील्ड और अत्याधुनिक सैन्य कम्यूनिकेशन फीचर्स इंस्टॉल नहीं किए गए हैं, जो अमेरिका के आधिकारिक ‘एयरफोर्स वन’ बेड़े में जन्मजात होते हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने विमान के असुरक्षित होने के दावों को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए प्रशासन ‘ध्यान भटकाने और दुश्मनों को गुमराह करने’ (Deception Techniques) की रणनीति के तहत भी ऐसे कदम उठाता है।
‘मैं उनकी हिट लिस्ट में नंबर वन हूं’ — ट्रंप का बेबाक बयान
विमान बदलने के बाद जब हवा में ही पत्रकारों ने डोनाल्ड ट्रंप से सुरक्षा चिंताओं को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने हमेशा की तरह बेबाकी से जवाब दिया। ट्रंप ने मुस्कुराते हुए कहा, “मुझ पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है, मैं ईरान की लिस्ट में नंबर वन टारगेट हूं।”
ट्रंप ने ईरान के खौफ की बात को दबाते हुए तर्क दिया कि ब्रिटेन के सैन्य अड्डे पर रुकने का असली मकसद वहां तैनात अमेरिकी सैनिकों को नया और चमचमाता विमान दिखाना था। उन्होंने पुरानी एयरफोर्स वन में बैठने के पीछे एक भावुक वजह बताते हुए कहा कि उन्होंने “पुरानी यादों को ताजा करने के लिए” ऐसा किया है।
फ्लाइट के दौरान हाई-अलर्ट: खिड़कियों के पर्दे बंद रखने के सख्त निर्देश
इस यात्रा की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उड़ान के दौरान विमान में मौजूद सभी पत्रकारों को खिड़कियों के ब्लाइंड्स (पर्दे) पूरी तरह बंद रखने का सख्त और अनिवार्य निर्देश दिया गया था, ताकि बाहर से विमान के अंदर की गतिविधियों को ट्रैक न किया जा सके। ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में ईरान की खुफिया एजेंसियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि शायद ऐसा यहां और आसपास मौजूद “स्लीजबैग्स” (संदिग्धों/जासूसों) की वजह से करना पड़ा है।
अमेरिका और ईरान के बीच क्यों छिड़ा है भीषण युद्ध?
यह पूरा हाई-वोल्टेज ड्रामा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच युद्ध चरम पर पहुंच चुका है। अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाजों पर हमले के आरोप में तेहरान (ईरान) पर लगातार दूसरे दिन भीषण बमबारी की है।
इसके जवाबी पलटवार में ईरान ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर दर्जनों मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन्स दागे हैं। खाड़ी देशों में युद्ध के सायरन गूंज रहे हैं और कुवैत की सेना ने दावा किया है कि उसने अपनी सीमा की ओर आ रहे कई ईरानी ड्रोन्स को हवा में ही मार गिराया है।
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