
देश की राजधानी दिल्ली में निर्वाचन आयोग और एसआईआर (SIR) नीतियों को लेकर उपजा विवाद अब बड़े राजनीतिक और सामाजिक टकराव का रूप ले चुका है। चुनाव आयोग के हालिया फैसलों और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया है। हालात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने नई दिल्ली और आसपास के संवेदनशील इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए 1,500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है, जबकि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से हिरासत में ले लिया है।
विवाद की शुरुआत चुनाव आयोग द्वारा लागू की जा रही कथित एसआईआर (SIR) प्रक्रिया और चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी के आरोपों के बाद हुई। छात्रों और नागरिक अधिकार समूहों का आरोप है कि आयोग की यह नीति कई पात्र मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का काम कर रही है। इसी मुद्दे को लेकर सैकड़ों छात्र संगठन, सिविल सोसायटी के सदस्य और युवा कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर एकत्रित हुए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग और कनॉट प्लेस की ओर जाने वाली सड़कों को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया, जिससे लुटियंस दिल्ली में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
भीड़ के लगातार बढ़ते दबाव और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने त्वरित कदम उठाए। गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के समन्वय से जंतर-मंतर, नई दिल्ली जिले और आसपास के प्रमुख हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय कानून-व्यवस्था बनाए रखने और असामाजिक तत्वों द्वारा भीड़ जुटाने की कोशिशों को विफल करने के लिए एहतियातन लिया गया है। पूरे क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी गई है और चार या उससे अधिक लोगों के एक जगह इकट्ठा होने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की, पुलिस ने कई लेयर की बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। जब भीड़ ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिस को वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ा और फिर बड़े पैमाने पर धरपकड़ शुरू हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ने एक-एक करके 1,500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और दर्जनों बसों में भरकर उन्हें शहर के विभिन्न बाहरी थानों जैसे नरेला, बवाना और मंदिर मार्ग भेजा गया। हिरासत में लिए गए लोगों में कई प्रमुख विश्वविद्यालयों के छात्र नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी शामिल हैं।
इस पूरे आंदोलन की अगुवाई कर रहीं आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने मार्च के दौरान हिरासत में ले लिया। नेहा बोरा जब समर्थकों को संबोधित कर रही थीं और मार्च को आगे बढ़ाने का आह्वान कर रही थीं, तभी महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेरकर हिरासत में ले लिया और पुलिस वाहन में बैठा दिया। इस दौरान छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। नेहा बोरा की हिरासत की खबर मिलते ही जेएनयू, दिल्ली विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया समेत कई परिसरों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और अपनी नेता की तुरंत बिना शर्त रिहाई की मांग की।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग और प्रशासन का कहना है कि चुनावी प्रक्रियाओं और वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण को लेकर अपनाई जा रही प्रक्रियाएं पूरी तरह से वैधानिक, पारदर्शी और निष्पक्ष हैं। आयोग के सूत्रों का कहना है कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम अनुचित तरीके से नहीं काटा जा रहा है और सभी आपत्तियों की जांच जमीनी स्तर पर बीएलओ (BLO) के माध्यम से कराई जा रही है। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने और कानून-व्यवस्था को हाथ में न लेने की अपील की है। फिलहाल नई दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की कंपनियां तैनात हैं और स्थिति पर ड्रोन कैमरों से लगातार नजर रखी जा रही है।
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