
ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने सतह से सतह पर सटीक वार करने वाली अर्ध-बैलिस्टिक (Quasi-Ballistic) मिसाइल ‘प्रलय’ का एक और बेहद सफल और निर्णायक परीक्षण किया है। इस युद्धाभ्यास के दौरान मिसाइल ने करीब 500 किलोमीटर की अधिकतम दूरी पर स्थित निर्धारित लक्ष्यों को अपनी प्रचंड शक्ति से पूरी तरह तबाह कर दिया। यह परीक्षण भारतीय सेना के लिए किसी रणनीतिक वरदान से कम नहीं है, क्योंकि चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर तैनात पारंपरिक हथियारों की मारक क्षमता में यह मिसाइल संतुलन को पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ देती है। यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल के तहत संपन्न हुए इस परीक्षण के बाद अब प्रलय मिसाइल की भारतीय थलसेना और वायुसेना में अंतिम तैनाती का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो चुका है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक मिसाइल परीक्षण भर नहीं है, बल्कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) के निकट सामरिक आक्रामकता की नई भारतीय नीति का खुला ऐलान है।
पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलें एक तय परवलयाकार (पैराबोलिक) रास्ते पर चलती हैं, जिससे रडार और एयर डिफेंस सिस्टम उनकी दिशा और गति का पहले ही सटीक अंदाजा लगा लेते हैं। इसके विपरीत ‘प्रलय’ एक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है। इसका मतलब है कि यह अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है और हवा में तीव्र गति से उड़ान भरते समय भी अपनी दिशा बदलने में सक्षम है। जब यह मिसाइल अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है, तो रास्ते में अपनी दिशा बदलकर दुश्मन के आधुनिकतम एयर डिफेंस रडार और इंटरसेप्टर मिसाइलों को चकमा दे देती है। टर्मिनल चरण में यह लगभग मैक 5 से मैक 6.1 (आवाज की रफ्तार से छह गुना तेज) की हाइपरसोनिक गति प्राप्त कर लेती है, जिससे 500 किलोमीटर की दूरी यह मात्र सात से आठ मिनट में तय कर लेती है। दुश्मन के कमांड सेंटर को जब तक हमले का एहसास होता है, तब तक प्रलय सब कुछ स्वाहा कर चुकी होती है।
प्रलय मिसाइल की मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर के बीच लचीले ढंग से निर्धारित की जा सकती है। यह मिसाइल 350 किलोग्राम से लेकर 1,000 किलोग्राम वजन तक के कई प्रकार के पारंपरिक वॉरहेड्स ले जाने में सक्षम है। इसमें हाई एक्सप्लोसिव प्री-फ्रैगमेंटेड (HEPF), पेनिट्रेशन-कम-ब्लास्ट (PCB) और रनवे डिस्ट्रक्शन सबम्युनिशन जैसे घातक हथियार जोड़े जा सकते हैं। इसका कंक्रीट-पेनिट्रेटिंग वॉरहेड ज़मीन के नीचे गहराई में बने दुश्मन के मजबूत सैन्य बंकरों, कमांड एंड कंट्रोल पोस्ट्स और मिसाइल साइलो को चीरकर भीतर ही महाविनाश मचा देता है। 10 मीटर से भी कम सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) सटीकता वाली यह मिसाइल दुश्मन के एयरबेस, रनवे, हथियार डिपो और रणनीतिक पुलों को बिना किसी व्यापक नागरिक नुकसान के पलक झपकते ही नष्ट कर सकती है।
दुनिया भर के सामरिक हथियारों की तुलना में भारत की प्रलय मिसाइल रूस की मशहूर 9K720 इस्कंदर (Iskander) और चीन की डोंगफेंग-12 (DF-12) के समान श्रेणी में खड़ी होती है। यूक्रेन युद्ध में रूस की इस्कंदर मिसाइल ने अपनी गति और दिशा बदलने की खूबी से साबित किया था कि क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइलें आधुनिक युद्धक्षेत्र में एयर डिफेंस सिस्टम्स के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द हैं। भारत ने उसी स्तर की तकनीक को पूर्णत: स्वदेशी रूप से विकसित कर लिया है। चीन ने लद्दाख और अरुणाचल के पार तिब्बत के पठार पर जिस तरह भारी सैन्य ढांचा खड़ा किया है, उसके खिलाफ प्रलय एक अचूक काट बनकर उभरी है। चीन का कोई भी रडार या सतह से हवा में मार करने वाला सिस्टम (जैसे HQ-9) प्रलय की तेज गति और अप्रत्याशित उड़ान पथ को बीच में रोक पाने में बेहद लाचार साबित होगा।
भारत की घोषित परमाणु नीति ‘नो फर्स्ट यूज’ (No First Use) की है, जिसका अर्थ है कि भारत कभी भी किसी देश पर पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। ऐसे में अग्नि या पृथ्वी जैसी पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल सीमा पर छोटे-मोटे तनाव में नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे पूर्ण परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ जाता है। प्रलय इसी सामरिक खाई को पाटती है—यह पूरी तरह पारंपरिक (कन्वेंशनल) हथियारों से लैस है। भारत अब एक अलग ‘इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स’ (IRF) के गठन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसमें प्रलय मिसाइल मुख्य स्तंभ की भूमिका निभाएगी। इसे 12×12 भारी सैन्य ट्रक पर लगे मोबाइल कैनिस्टराइज्ड लॉन्चर से दागा जा सकता है, जिसका अर्थ है कि इसे हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों या थार के रेगिस्तान में कहीं भी आसानी से छिपाकर तैनात किया जा सकता है और मिनटों में फायर किया जा सकता है। भारतीय सेना द्वारा 250 और वायुसेना द्वारा 120 मिसाइलों के ऑर्डर दिए जाने की प्रक्रिया देश के सुरक्षा घेरे को अभेद्य बनाती है। रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में प्रलय का सफल परीक्षण केवल रक्षा क्षेत्र की आत्मनिर्भरता ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता की वह मजबूत ढाल है जो हर दुस्साहस का जवाब विनाशकारी शक्ति से देने के लिए तैयार खड़ी है।
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