
नई दिल्ली। भारतीय रेल के आधुनिकीकरण और मुसाफिरों को हवाई सफर जैसा आरामदायक अनुभव देने की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। चेयर कार वंदे भारत की भारी सफलता के बाद अब बहुप्रतीक्षित स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Sleeper Express) पटरियों पर रफ्तार भरने के लिए पूरी तरह तैयार है। रेलवे बोर्ड से आ रही ताजा जानकारियों के अनुसार, देश के सबसे व्यस्त और प्रतिष्ठित रेल रूटों में से एक—नई दिल्ली से वाराणसी (New Delhi to Varanasi)—के बीच पहली स्लीपर वंदे भारत सेवा की शुरुआत की जा सकती है।
अब तक दिल्ली और काशी के बीच चलने वाली दो चेयर कार वंदे भारत ट्रेनें दिन के समय संचालित होती हैं। लेकिन स्लीपर वंदे भारत को विशेष रूप से ‘ओवरनाइट जर्नी’ यानी रात के सफर के लिए डिजाइन किया गया है। रात में दिल्ली से सवार होकर यात्री अगली सुबह बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी वाराणसी पहुंच सकेंगे। यह नई प्रीमियम स्लीपर ट्रेन मौजूदा राजधानी, दुरंतो और शिव गंगा एक्सप्रेस जैसी सुपरफास्ट ट्रेनों के मुकाबले यात्रा समय में उल्लेखनीय कटौती करेगी।
दिल्ली और वाराणसी के बीच की दूरी लगभग 755 से 770 किलोमीटर है। वर्तमान में चलने वाली नियमित सुपरफास्ट ट्रेनों को यह दूरी तय करने में 11 से 14 घंटे का समय लगता है, जबकि राजधानी एक्सप्रेस इसे लगभग 9.5 से 10 घंटे में पूरा करती है। 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति क्षमता वाली स्लीपर वंदे भारत इस सफर को महज 7 घंटे 45 मिनट से 8 घंटे 15 मिनट के भीतर समेटने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
प्रस्तावित समय सारिणी और रूट का संभावित विवरण इस प्रकार है:
| विवरण | नई दिल्ली से वाराणसी (डाउन) | वाराणसी से नई दिल्ली (अप) |
| प्रस्थान का समय (Departure) | रात 11:00 बजे (नई दिल्ली) | रात 11:15 बजे (वाराणसी जंक्शन/कैंट) |
| आगमन का समय (Arrival) | सुबह 06:45 – 07:00 बजे (वाराणसी) | सुबह 07:00 – 07:15 बजे (नई दिल्ली) |
| कुल यात्रा समय | लगभग 7 घंटे 45 मिनट से 8 घंटे | लगभग 8 घंटे |
| प्रमुख स्टॉपेज | कानपुर सेंट्रल, प्रयागराज जंक्शन | प्रयागराज जंक्शन, कानपुर सेंट्रल |
| संचालन के दिन | सप्ताह में 6 दिन (प्रस्तावित) | सप्ताह में 6 दिन (प्रस्तावित) |
इस ट्रेन को उत्तर मध्य रेलवे (NCR) और उत्तर रेलवे (NR) के सबसे हाई-स्पीड 130-160 kmph अपग्रेडेड ट्रैक सेक्शन (दिल्ली-पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन रूट) से गुजारा जाएगा। रास्ते में केवल सीमित और अत्यधिक व्यस्त स्टेशनों—कानपुर सेंट्रल और प्रयागराज जंक्शन—पर ही इसके 2 से 5 मिनट के कॉमर्शियल स्टॉपेज दिए जाने की योजना है, ताकि गति और समयबद्धता बनी रहे।
बीईएमएल (BEML) और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा तैयार की गई स्लीपर वंदे भारत का आंतरिक ढांचा किसी आधुनिक फ्लाइट के बिजनेस क्लास जैसा फील देता है। इसमें पारंपरिक राजधानी और एलएचबी (LHB) कोचों की तुलना में कई क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं:
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अतिरिक्त कुशनिंग और बर्थ कम्फर्ट: पारंपरिक स्लीपर बर्थ की तुलना में इसकी बर्थ में एर्गोनॉमिक फोम का इस्तेमाल किया गया है। अपर बर्थ पर चढ़ने के लिए विशेष सीढ़ियां (Footsteps) डिजाइन की गई हैं, जिससे बुजुर्गों को ऊपर चढ़ने में परेशानी नहीं होगी।
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जर्क-फ्री राइड (झटकों से आजादी): ट्रेन में अत्याधुनिक सेमी-एक्टिव सस्पेंशन और ऑटोमैटिक कपलिंग लगाई गई है, जिससे 160 किमी/घंटा की रफ्तार पर भी यात्रियों को झटके या कंपन महसूस नहीं होंगे।
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फर्स्ट एसी में हॉट शॉवर की सुविधा: फर्स्ट एसी कम्पार्टमेंट में यात्रियों के लिए गर्म पानी से नहाने (Hot Water Shower) का क्यूबिकल उपलब्ध रहेगा।
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सेंसर-बेस्ड बायो-वैक्यूम टॉयलेट्स: बदबू-मुक्त और पानी की बचत करने वाले टच-फ्री टॉयलेट्स, ऑटोमैटिक सोप डिस्पेंसर और मॉड्यूलर वॉशबेसिन दिए गए हैं।
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ध्वनि और तापमान नियंत्रण: बेहतर साउंडप्रूफिंग की गई है, जिससे ट्रेन के अंदर पटरी और हवा का शोर नहीं आएगा। साथ ही सभी बर्थ पर डेडिकेटेड रीडिंग लैंप, मोबाइल चार्जिंग पोर्ट और यूएसबी सॉकेट्स मौजूद हैं।
स्लीपर वंदे भारत ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे, जिनमें 823 यात्रियों के सोने की क्षमता होगी:
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थर्ड एसी (3-Tier AC): 11 कोच (लगभग 611 सीटें)
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सेकंड एसी (2-Tier AC): 4 कोच (लगभग 188 सीटें)
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फर्स्ट एसी (1st AC): 1 कोच (लगभग 24 सीटें)
किराये की बात करें तो रेलवे बोर्ड के सूत्रों के मुताबिक, स्लीपर वंदे भारत का किराया नियमित राजधानी एक्सप्रेस के बेस फेयर से लगभग 10% से 15% अधिक हो सकता है। थर्ड एसी का अनुमानित किराया लगभग ₹1,900 से ₹2,200, सेकंड एसी का किराया ₹2,800 से ₹3,200 और फर्स्ट एसी का किराया लगभग ₹3,800 से ₹4,300 (खान-पान शुल्क सहित) रहने की संभावना है।
दिल्ली और पूर्वांचल के बीच व्यापारिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आवाजाही को यह ओवरनाइट ट्रेन एक नए स्तर पर ले जाएगी। कारोबारी और श्रद्धालु बिना दिन का समय गंवाए रात में सोकर यात्रा पूरी कर सकेंगे और अगले दिन सुबह तरोताजा होकर अपने गंतव्य पर पहुंच सकेंगे।
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