
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्थित महाभारतकालीन माने जाने वाले करीब 5 हजार वर्ष पुराने देव वृक्ष पारिजात के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐतिहासिक, धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व रखने वाला यह दुर्लभ वृक्ष इन दिनों बीमार बताया जा रहा है, जिसके चलते वन विभाग और वैज्ञानिकों की टीमों ने इसके उपचार की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
वैज्ञानिकों की निगरानी में उपचार शुरू
पारिजात वृक्ष की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए फैजाबाद स्थित वनस्पति अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों को मौके पर बुलाया गया है। वैज्ञानिकों की टीम लगातार वृक्ष की स्थिति का आकलन कर रही है और आधुनिक तकनीकों के जरिए इसके उपचार की योजना पर काम किया जा रहा है।
एक साथ कई टीमें कर रहीं निगरानी
इस प्राचीन वृक्ष को बचाने के लिए अलग-अलग विशेषज्ञों की कई टीमें तैनात की गई हैं। ये टीमें जड़ों, तने और पत्तियों की बारीकी से जांच कर रही हैं ताकि बीमारी के सही कारण का पता लगाया जा सके और समय रहते प्रभावी इलाज किया जा सके।
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से जुड़ा है पारिजात
पारिजात वृक्ष को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। मान्यता है कि यह वृक्ष महाभारत काल से जुड़ा हुआ है और इसे देव वृक्ष का दर्जा प्राप्त है। यही वजह है कि इसकी बीमारी की खबर से क्षेत्र में चिंता और भावनात्मक जुड़ाव दोनों देखने को मिल रहा है।
संरक्षण को लेकर बढ़ी सतर्कता
वन विभाग ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष निगरानी बढ़ा दी है। वृक्ष के आसपास सुरक्षा और देखभाल के अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी तरह की बाहरी क्षति से इसे बचाया जा सके।
विशेषज्ञों का दावा—जल्द मिलेगा समाधान
वैज्ञानिकों का कहना है कि शुरुआती जांच में कुछ समस्याएं सामने आई हैं, लेकिन सही समय पर इलाज शुरू होने से वृक्ष के स्वस्थ होने की उम्मीद बनी हुई है। टीम का लक्ष्य इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखना है।
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