आध्यात्मिक डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में पूजा-पाठ और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत माथे पर तिलक लगाकर की जाती है। शास्त्रों में तिलक को न केवल शुभाशुभ का प्रतीक माना गया है, बल्कि इसे एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी बताया गया है। अक्सर भक्त इस उलझन में रहते हैं कि किस देवता की पूजा में कौन सा तिलक इस्तेमाल करना चाहिए। आइए जानते हैं अमर उजाला की इस विशेष रिपोर्ट में तिलक लगाने के शास्त्रीय नियम और उनके चमत्कारी लाभ।
देवताओं के अनुसार तिलक का चयन: विष्णु को हल्दी तो शिव को भस्म प्रिय
सनातन परंपरा के अनुसार, हर देवी-देवता की प्रकृति अलग होती है, इसलिए उन्हें अर्पित किए जाने वाले तिलक भी भिन्न होते हैं। यदि आप भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण या देवगुरु बृहस्पति की आराधना कर रहे हैं, तो पीले चंदन, हल्दी, केसर या गोपी चंदन का तिलक लगाना सर्वोत्तम माना जाता है। इससे गुरु दोष दूर होता है और सुख-समृद्धि आती है।
वहीं, देवाधिदेव महादेव और भगवान भैरव को भस्म या सफेद चंदन का तिलक अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि भस्म धारण करने से वैराग्य और आत्मबल में वृद्धि होती है। शक्ति की उपासना यानी देवी दुर्गा की पूजा में हमेशा कुंकुम या रोली के तिलक का विधान है, जो तेज और विजय का प्रतीक है।
संकटमोचन और लक्ष्मी कृपा के लिए खास उपाय
भगवान गणेश और हनुमान जी को सिंदूर का तिलक लगाना शुभ फलदायी होता है। सिंदूर को ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक माना जाता है। वहीं धन की देवी माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए उन्हें लाल चंदन या केसर का तिलक अर्पित करना चाहिए। यदि आप सूर्य देव की कृपा चाहते हैं और मान-सम्मान की प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, तो प्रतिदिन लाल चंदन का तिलक लगाएं।
साधु-संतों की पहचान है तिलक: जानिए संप्रदायों का अंतर
तिलक केवल आस्था ही नहीं, बल्कि साधु-संतों के संप्रदाय की पहचान भी है। वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी माथे पर ‘उर्ध्वपुंड्र’ (खड़ी रेखा वाला) तिलक लगाते हैं, जबकि शैव संप्रदाय के साधु भस्म से ‘त्रिपुंड’ (तीन आड़ी रेखाएं) धारण करते हैं, जो भगवान शिव के त्रिशूल और त्रिनेत्र का प्रतीक है। वहीं, शाक्त परंपरा के अनुयायी माथे पर लाल बिंदी या रोली का प्रयोग करते हैं।
तिलक लगाने के जरूरी नियम: न करें ये गलतियां
शास्त्रों के अनुसार, तिलक लगाने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं जिनका पालन करना अनिवार्य है:
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शुद्धता का रखें ध्यान: तिलक हमेशा स्नान के बाद शुद्ध मन से धारण करना चाहिए।
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अनामिका का महत्व: पूजा के दौरान देवताओं को हमेशा अनामिका अंगुली (Ring Finger) से ही तिलक लगाना चाहिए।
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प्रसाद स्वरूप धारण: सबसे पहले अपने इष्ट देव को तिलक लगाएं, उसके बाद ही उसे अपने माथे पर प्रसाद के रूप में धारण करें।
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रात का नियम: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रात को सोने से पहले माथे से तिलक पोंछ लेना चाहिए।
वार के अनुसार तिलक: सात दिन और सात चमत्कारी लाभ
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि आप वार के अनुसार तिलक लगाते हैं, तो ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है:
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सोमवार: मन की शांति के लिए सफेद चंदन।
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मंगलवार: ऊर्जा के लिए सिंदूर या रोली।
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बुधवार: सिंदूर का तिलक।
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बृहस्पतिवार: ज्ञान और धन के लिए केसर या हल्दी।
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शुक्रवार: आकर्षण और सुख के लिए सफेद चंदन।
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शनिवार: बाधाओं से मुक्ति के लिए भस्म।
- रविवार: तेज और आरोग्य के लिए लाल चंदन।
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