तेलंगाना निकाय चुनाव में कांग्रेस की ‘बंपर जीत’: क्या पर्दे के पीछे BJP से हो गया समझौता? हरीश राव के ‘सीक्रेट अलायंस’ वाले आरोप से मचा बवाल

हैदराबाद: तेलंगाना के नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में कांग्रेस ने 112 में से 86 सीटों पर कब्जा जमाकर क्लीन स्वीप किया है, वहीं दूसरी तरफ भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने कांग्रेस और भाजपा के बीच ‘अघोषित गठबंधन’ का सनसनीखेज आरोप लगाया है। पूर्व मंत्री और बीआरएस के दिग्गज नेता टी. हरीश राव ने कहा है कि बीआरएस को सत्ता से दूर रखने के लिए दो धुर विरोधी दल एक हो गए हैं।

कांग्रेस का ‘हैंड’ और बीजेपी का साथ: क्या है इनसाइड स्टोरी?

सोमवार को घोषित शहरी स्थानीय निकायों के परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए हरीश राव ने दोनों राष्ट्रीय दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि नरसपुर, सिरपुर, कागजनगर और मेटपल्ली जैसी नगरपालिकाओं में कांग्रेस और भाजपा ने एक-दूसरे के उम्मीदवारों का समर्थन किया ताकि बीआरएस को मेयर या चेयरपर्सन पद से रोका जा सके। राव ने इसे ‘अपवित्र गठबंधन’ करार देते हुए कहा कि दिल्ली में कुश्ती लड़ने वाली कांग्रेस और बीजेपी तेलंगाना में ‘इलू-इलू’ कर रही हैं।

CM रेवंत रेड्डी पर दागे सवाल: राहुल गांधी की विचारधारा का क्या हुआ?

हरीश राव ने सीधा हमला मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर बोलते हुए उन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “एक तरफ राहुल गांधी देश भर में भाजपा के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ तेलंगाना में रेवंत रेड्डी की कांग्रेस भाजपा के साथ मिलकर बीआरएस को हराने की साजिश रच रही है।” बीआरएस का दावा है कि कई वार्डों में सबसे ज्यादा जीत दर्ज करने के बावजूद अनैतिक समझौतों के कारण उन्हें नेतृत्व के पदों से वंचित रखा गया।

निकाय चुनाव के आंकड़ों में समझें ‘पावर गेम’

अधिकारिक नतीजों के अनुसार, 112 नगर निकायों में कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा है। नीचे दिए गए आंकड़ों से स्पष्ट है कि बीआरएस दूसरे नंबर की ताकत बनकर उभरी है, लेकिन कांग्रेस से काफी पीछे रह गई:

पद कांग्रेस बीआरएस भाजपा अन्य/निर्दलीय
मेयर/चेयरपर्सन 86 18 02 06
डिप्टी मेयर/वाइस-चेयरपर्सन 84 14 05 09

11 निकायों में चुनाव स्थगित, सस्पेंस बरकरार

चुनाव अधिकारियों ने कुछ तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से 11 नगरपालिकाओं (जंगांव, थोरूर, जहीरबाद आदि) में चुनाव स्थगित कर दिए हैं। इन सीटों पर होने वाले चुनाव अब आगामी रणनीतियों के लिए बेहद अहम होंगे। बीआरएस ने संकल्प लिया है कि वे इस ‘कथित समझौते’ के खिलाफ जनता के बीच जाएंगे और अपनी आवाज बुलंद रखेंगे।

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