
लखनऊ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद को लेकर सियासत चरम पर पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए साफ कर दिया है कि पवित्र अयोध्या धाम और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को बदनाम करने की नीयत से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। विधानसभा भवन के पोर्टिको में मीडिया से बातचीत और सदन के पटल पर अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में किसी भी साधु-संत या धार्मिक ट्रस्ट के सदस्य की कोई संलिप्तता नहीं पाई गई है।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: जानिए एसआईटी की जांच और कार्रवाई का पूरा सच
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या प्रकरण का पूरा घटनाक्रम देश के सामने रखते हुए बताया कि विपक्ष जिसे राजनीतिक स्वार्थ में ‘चंदा चोरी’ बताकर दुष्प्रचारित कर रहा है, वह असल में मंदिर के चढ़ावे से जुड़ा एक प्रशासनिक मामला था। 12 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक औपचारिक पत्र भेजकर इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया था। ट्रस्ट की मांग पर तत्काल संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार ने अगले ही दिन 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया।
एसआईटी ने तत्परता से जांच आगे बढ़ाते हुए 23 जून को अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी। इसके आधार पर 25 जून को अयोध्या में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई। साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से छह लोग चढ़ावे की धनराशि का अनाधिकृत लेनदेन करते पाए गए, जबकि दो अन्य पर्यवेक्षकों की लापरवाही तय करते हुए वैधानिक कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में यह मामला सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप पुनर्गठित एसआईटी की देखरेख में आगे की जांच पारदर्शी ढंग से चल रही है।
साधु-संतों को क्लीन चिट, 1100 कर्मचारियों के समर्पण पर आक्षेप से सीएम व्यथित
मुख्यमंत्री ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि विपक्षी दल केवल राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए सनातन परंपरा, पूज्य साधु-संतों और अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित हो रही अयोध्या धाम की साख को ठेस पहुंचा रहे हैं। जांच में किसी भी संत की भूमिका न होने के बावजूद पूरे संत समाज को कठघरे में खड़ा करना बेहद शर्मनाक है।
उन्होंने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं में 1100 से अधिक कर्मचारी दिन-रात कार्यरत हैं। ये कर्मचारी भीषण गर्मी, कड़ाके की ठंड और मूसलाधार बारिश के बावजूद प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं को सुलभ, सुरक्षित और व्यवस्थित दर्शन कराने में अपना योगदान दे रहे हैं। महज आठ दोषियों के कृत्य के आधार पर पूरे मंदिर प्रशासन और हजारों समर्पित कर्मचारियों की निष्ठा पर सवाल उठाना उत्तर प्रदेश की सकारात्मक छवि और उभरते धार्मिक पर्यटन को नुकसान पहुंचाने की सोची-समझी साजिश है।
‘जिन्होंने रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं, वे आज आस्था के पैरोकार बन रहे’
सपा और कांग्रेस के इतिहास को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के दोहरे रवैये पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश की जनता यह कभी नहीं भूल सकती कि किस दल की सरकार के दौरान अयोध्या की पावन धरती पर निहत्थे रामभक्तों पर गोलियां चलवाई गई थीं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन दलों के नेताओं ने अपने शासनकाल में भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के ऐतिहासिक अस्तित्व को नकारा, अदालत में हलफनामा देकर उन्हें ‘काल्पनिक’ और ‘मिथक’ बताया, वे आज अचानक अयोध्या और सनातन आस्था के हितैषी बनने का ढोंग कर रहे हैं। विपक्ष का यह रूप विशुद्ध रूप से अवसरवादिता और जनता को भ्रमित करने की नाकाम कोशिश है।
विधानसभा में विपक्ष का असंसदीय आचरण और संवैधानिक मर्यादाओं का हनन
सदन की कार्यवाही बाधित करने पर मुख्यमंत्री ने विपक्षी विधायकों के व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी जनहित, जनविकास और सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा से भाग रही है। सदन में अध्यक्ष पीठ के सामने आकर प्लेकार्ड लहराना, नारेबाजी करना, मार्शलों से धक्का-मुक्की करना और संवैधानिक संस्थाओं का अनादर करना सपा की स्थापित कार्यशैली बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि कार्य मंत्रणा समिति और दलीय नेताओं की बैठक में सपा प्रतिनिधियों ने लिखित व मौखिक आश्वासन दिया था कि वे नियमों के तहत नोटिस देकर ही विषय उठाएंगे। इसके बावजूद, राजनीतिक लाभ लेने के लिए उन्होंने उप-न्यायाधीन (Sub-Judice) विषय को उठाकर सदन की मर्यादा का उल्लंघन किया। संसदीय नियमों के अनुसार जो विषय किसी न्यायाधिकरण या न्यायालय के समक्ष लंबित हो, उस पर सदन में चर्चा नहीं की जा सकती, लेकिन विपक्ष ने जानबूझकर गतिरोध पैदा किया।
अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज: यूपी में सांस्कृतिक और आर्थिक विकास की रफ्तार
विपक्ष के नकारात्मक एजेंडे का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विकास प्राथमिकताओं को भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व विकास कर रही है। हाल ही में वाराणसी और संभल के लिए बड़े विकास पैकेजों की घोषणा की गई है, जबकि योगी कैबिनेट ने प्रयागराज-चित्रकूट विकास प्राधिकरण के गठन को मंजूरी देकर आसपास के छह जिलों के एकीकृत विकास का द्वार खोल दिया है।
मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि अयोध्या धाम में प्रतिदिन उमड़ रहा श्रद्धालुओं का जनसैलाब प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक कायाकल्प का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश सरकार हर श्रद्धालु की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी राजनीतिक साजिश को प्रदेश की विकास यात्रा में बाधा नहीं बनने दिया जाएगा।
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