LAC गश्त विवाद पर चीन की नई चाल: ग्लोबल टाइम्स ने भारत पर साधा निशाना

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी सीमा विवाद और गश्त (Patrolling) को लेकर भू-राजनीतिक खींचतान एक बार फिर तेज हो गई है। सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बहाल करने के द्विपक्षीय प्रयासों के बीच चीन ने मीडिया और कूटनीतिक मोर्चे पर एक नया पैंतरा आजमाया है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के मुखपत्र कहे जाने वाले 'ग्लोबल टाइम्स' (Global Times) ने एक ताजा लेख और संपादकीय के जरिए भारत पर निशाना साधते हुए सीमा पर जारी तनाव और सीमा प्रबंधन के मुद्दों को सीधे तौर पर भारत की घरेलू राजनीति से जोड़ दिया है। चीन का यह कदम द्विपक्षीय वार्ताओं के माहौल को प्रभावित करने और अपनी क्षेत्रीय आक्रामकता से ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

#1 चीन का नया पैंतरा और ग्लोबल टाइम्स का तंज

पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश के अग्रिम इलाकों तक भारत और चीन की सेनाओं के बीच गश्त नियमों और सीमा प्रबंधन को लेकर बनी सहमतियों के क्रियान्वयन की समीक्षा चल रही है। इसी बीच ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया है कि भारतीय नेतृत्व और सुरक्षा एजेंसियां घरेलू राजनीतिक लाभ उठाने और राष्ट्रवादी भावनाओं को भुनाने के उद्देश्य से सीमा संबंधी संवेदनशील मुद्दों को उछाल रही हैं। चीनी मीडिया का कहना है कि भारत में जब भी चुनावी माहौल बनता है या आंतरिक राजनीति में कोई बहस शुरू होती है, तो LAC पर स्थिति को लेकर आक्रामक बयानबाजी तेज कर दी जाती है। चीन के इस प्रचार तंत्र ने यह भी आरोप लगाया कि नई दिल्ली की नीतियां सीमा पर शांति बनाए रखने के बजाए घरेलू वोटर बेस को साधने के लिए डिजाइन की जाती हैं।

#1 भारतीय सेना और विदेश मंत्रालय का रूख

भारत सरकार और रक्षा विशेषज्ञों ने चीन के इस विमर्श (Narrative) को सिरे से खारिज कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) और सेना के शीर्ष अधिकारियों ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता और सीमा सुरक्षा पूरी तरह से देश की संप्रभुता का मामला है, जिसका किसी भी तरह से घरेलू राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। अरुणाचल प्रदेश और पूर्वी लद्दाख के विभिन्न सेक्टरों में आईटीबीपी (ITBP) और भारतीय सेना के जवान पूरी सतर्कता के साथ अपनी सीमा सीमाओं पर निरंतर गश्त कर रहे हैं। भारतीय पक्ष का स्पष्ट रुख रहा है कि जब तक सीमावर्ती क्षेत्रों में पूर्ण शांति और 2020 से पूर्व की स्थिति (Status Quo) बहाल नहीं हो जाती, तब तक द्विपक्षीय संबंधों में पूर्ण सामान्यता आना संभव नहीं है।

#1 कूटनीतिक दबाव बनाने की चीनी कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल टाइम्स के जरिए चीन अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भारतीय जनमानस में यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि सीमा विवाद को हल न होने देने के लिए भारत जिम्मेदार है। रणनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन का यह रवैया नया नहीं है; जब भी भारत अपने सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का तेजी से विकास करता है या अपनी गश्त क्षमताओं को मजबूत करता है, बीजिंग सूचना युद्ध (Information Warfare) का सहारा लेकर ध्यान भटकाने का प्रयास करता है। LAC पर दोनों देशों के सैन्य कमांडरों और विशेष प्रतिनिधियों के बीच जारी वार्ता के दौरों के बावजूद इस तरह के बयान दोनों पक्षों के बीच बने विश्वास के अंतर (Trust Deficit) को और गहरा करते हैं।

#1 सीमा प्रबंधन और भावी रणनीतिक परिदृश्य

भारत ने सदैव बातचीत और स्थापित समझौतों के पालन के माध्यम से सीमा पर शांति बनाए रखने का समर्थन किया है। हालांकि, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ताओं और प्रोपेगैंडा मीडिया की बयानबाजी से यह स्पष्ट है कि चीन सीमा विवाद का स्थाई समाधान निकालने के बजाय इस मुद्दे को लंबे समय तक लटकाकर भारत पर मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दबाव बनाए रखना चाहता है। इसके जवाब में भारत ने भी स्पष्ट कर दिया है कि अपनी एक-एक इंच जमीन और वैध गश्त अधिकारों की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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