बॉलीवुड के दिग्गज और मशहूर कॉमेडी किंग राजपाल यादव की मुश्किलें एक बार फिर बेहद बढ़ गई हैं। करोड़ों रुपये के चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अभिनेता को एक बहुत बड़ा झटका दिया है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने राजपाल यादव द्वारा ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई चुनौती याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि अभिनेता को अब अगले तीन महीने सलाखों के पीछे (जेल में) ही गुजारने होंगे।
“कई मौके दिए, लेकिन वादा नहीं निभाया”— जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा
यह पूरा मामला ‘मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी द्वारा दर्ज कराए गए लोन डिफॉल्ट और चेक बाउंस केस से जुड़ा हुआ है। फैसले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत द्वारा राजपाल यादव को कंपनी का बकाया कर्ज चुकाने और अपना वादा निभाने के लिए बार-बार पर्याप्त समय व कई बड़े मौके दिए गए थे। इसके बावजूद अभिनेता भुगतान करने में पूरी तरह नाकाम रहे, जिसके चलते अदालत के पास सजा बरकरार रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
जानिए क्या है पूरा विवाद और फरवरी में भी क्यों गए थे जेल?
राजपाल यादव का यह कानूनी विवाद काफी समय से कोर्ट में खिंच रहा है, जिससे जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
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मई 2024 में हुई थी सजा: सेशंस कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को दोषी मानते हुए 6 महीने की जेल की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में हाई कोर्ट में समझौते के आश्वासन पर सस्पेंड किया गया था।
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2.5 करोड़ की किस्तें देने में फेल: कोर्ट की मध्यस्थता में राजपाल यादव ने ₹2.5 करोड़ की राशि किस्तों में चुकाने का वादा किया था, लेकिन वह इस वादे से मुकर गए।
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फरवरी में किया था सरेंडर: इसी साल 5 फरवरी को कोर्ट के सख्त आदेश के बाद राजपाल यादव ने जेल प्रशासन के सामने सरेंडर किया था। बाद में ₹1.5 करोड़ जमा करने पर उन्हें अंतरिम राहत मिली थी, जो अब वादे पूरे न करने पर रद्द हो चुकी है।
अदालत ने साफ किया कि कानून के सामने सब बराबर हैं और बार-बार कोर्ट के आदेशों व समझौतों की अवहेलना करने के कारण ही ऐक्टर को 3 महीने के लिए जेल भेजा जा रहा है।
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