Chaitra Amavasya 2026: पितृ दोष से मुक्ति का महापर्व, इस दिन स्नान-दान और तर्पण से मिलती है पूर्वजों की कृपा, जानें क्यों खास है भूतड़ी अमावस्या

वर्ष 2026 में चैत्र अमावस्या (भूतड़ी अमावस्या18 मार्च (बुधवार) और 19 मार्च (गुरुवार) दोनों दिन मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र अमावस्या को वर्ष की अंतिम अमावस्या माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से पितरों को समर्पित होता है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए स्नान, दान, तर्पण और श्राद्ध कर्म से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही घर-परिवार में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। धार्मिक ग्रंथों में इस अमावस्या को अत्यंत फलदायी बताया गया है, इसलिए देशभर के तीर्थ स्थलों और नदियों के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है।

हिंदू वर्ष की अंतिम अमावस्या का महत्व

हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र अमावस्या कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है और इसके साथ ही पुराने संवत्सर का समापन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कार्य कई गुना फल देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष हो तो इस तिथि पर तर्पण और दान करने से उसका प्रभाव कम हो सकता है।

धार्मिक परंपराओं के मुताबिक इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र व धन का दान देने से पुण्य प्राप्त होता है। कई लोग अपने पूर्वजों की स्मृति में श्राद्ध और तर्पण भी करते हैं।

पितृ दोष से मुक्ति के लिए विशेष दिन

चैत्र अमावस्या को पितरों की कृपा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूर्वजों का स्मरण कर तर्पण करने से वे प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इससे जीवन में आने वाली कई बाधाएं दूर हो सकती हैं और घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है।

क्यों कहा जाता है भूतड़ी अमावस्या

चैत्र अमावस्या को कई स्थानों पर ‘भूतड़ी अमावस्या’ के नाम से भी जाना जाता है। लोकमान्यताओं के अनुसार यह दिन नकारात्मक शक्तियों को दूर करने और घर-परिवार को बुरी ऊर्जा से बचाने के लिए विशेष माना जाता है। कई लोग इस दिन विशेष पूजा-पाठ और उपाय करते हैं ताकि जीवन में सकारात्मकता बनी रहे।

इन कार्यों का है विशेष महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र अमावस्या के दिन कुछ कार्य विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।

  • पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करना

  • पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करना

  • गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना

  • घर में पूजा-पाठ और दीपदान करना

मान्यता है कि इन कार्यों से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिलता है और परिवार में समृद्धि बनी रहती है।

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