CBI ने दर्ज किया पत्रकार आशुतोष नेगी का बयान, मामले में छिपे ‘VIP’ के राज से जल्द उठेगा पर्दा

उत्तराखंड और देश भर को झकझोर कर रख देने वाले बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) की जांच में अब एक बहुत बड़ा और अहम मोड़ आ गया है। इस सनसनीखेज मामले की नए सिरे से तहकीकात कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई (CBI) ने मंगलवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए जाने-माने पत्रकार आशुतोष नेगी का आधिकारिक बयान दर्ज किया है। इस हत्याकांड में शुरू से ही एक तथाकथित ‘VIP’ की संलिप्तता के गंभीर आरोप लगते रहे हैं, जिसकी सत्यता की गहराई से जांच करने के लिए केंद्रीय एजेंसी ने अब गवाहों और याचिकाकर्ताओं से पूछताछ शुरू कर दी है। इस उच्च-स्तरीय पूछताछ के बाद एक बार फिर से राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अंकिता को न्याय दिलाने के रास्ते में उस रसूखदार चेहरे का पर्दाफाश होने वाला है, जिसके नाम पर अब तक पर्दा डाला जाता रहा था। आइए विस्तार से जानते हैं कि सीबीआई की इस ताजा कार्रवाई के क्या मायने हैं और इस पूरे हत्याकांड की पृष्ठभूमि अब तक क्या रही है।

सीबीआई मुख्यालय में पत्रकार आशुतोष नेगी से लंबी पूछताछ, दर्ज हुआ बयान

केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में अपनी कानूनी प्रक्रिया को तेज करते हुए मंगलवार को पत्रकार आशुतोष नेगी (Ashutosh Negi) को नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में तलब किया था। सूत्रों और एजेंसी से मिली जानकारी के मुताबिक, सीबीआई अधिकारियों ने आशुतोष नेगी से इस हत्याकांड से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर लंबी पूछताछ की और उनका विस्तृत बयान दर्ज किया।

गौरतलब है कि आशुतोष नेगी वही शख्स हैं जिन्होंने इस वीआईपी हत्याकांड की सच्चाई सामने लाने और इसकी निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने के लिए सबसे पहले उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, शुरुआती दौर में उनकी उस याचिका को अदालत द्वारा खारिज कर दिया गया था, लेकिन उनकी निरंतर आवाज और जनता के भारी दबाव के चलते मामले ने नया रुख ले लिया था। पत्रकार के रूप में उन्होंने इस पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने के लिए जो तथ्य जुटाए थे, वे अब सीबीआई की जांच में एक अहम कड़ी साबित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सिफारिश और नए सबूतों के बाद शुरू हुई सीबीआई जांच

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में लगातार उबाल देखा जा रहा था। मृतका अंकिता के माता-पिता की लगातार यह मांग रही थी कि इस मामले की जांच राज्य पुलिस के दायरे से निकालकर केंद्रीय एजेंसी यानी सीबीआई को सौंपी जाए, ताकि हत्या के पीछे छिपे असली ‘VIP’ का चेहरा बेनकाब हो सके।

इस मांग को तब और अधिक बल मिला जब हाल ही में एक अभिनेत्री द्वारा कुछ बेहद संवेदनशील ऑडियो और वीडियो क्लिप सार्वजनिक किए गए। इन वायरल क्लिप्स और डिजिटल साक्ष्यों ने एक बार फिर इस ओर इशारा किया कि इस जघन्य हत्याकांड के पीछे कोई प्रभावशाली और रसूखदार व्यक्ति भी शामिल था। जनभावनाओं और माता-पिता के आंसुओं का सम्मान करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने बिना किसी देरी के इस मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी थी। मुख्यमंत्री के इस कदम के बाद इसी साल फरवरी के महीने में सीबीआई ने अज्ञात लोगों के खिलाफ औपचारिक रूप से आपराधिक मामला दर्ज कर अपनी स्वतंत्र जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

साल 2022 का वो खौफनाक दिन: जब ऋषिकेश की चीला नहर से मिला था अंकिता का शव

यह पूरा दर्दनाक मामला सितंबर 2022 का है, जिसने देवभूमि उत्तराखंड समेत पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया था। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के अंतर्गत आने वाले गंगा भोगपुर तल्ला क्षेत्र स्थित ‘वनंत्रा रिजार्ट’ (Vanantra Resort) में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी।

अपनी आजीविका कमाने और परिवार का सहारा बनने के लिए काम करने वाली इस मासूम युवती की रिजार्ट के मालिक पुलकित आर्य (Pulkit Arya) और उसके दो अन्य सहयोगियों द्वारा बेहद बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। आरोपियों ने अंकिता को एक विवाद के बाद चीला नहर में धकेल दिया था, जिसके कुछ दिनों बाद उसका शव ऋषिकेश के पास से बरामद हुआ था। इस क्रूरता के खिलाफ पूरे राज्य में जनाक्रोश फूट पड़ा था, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी पुलकित आर्य और उसके दोनों साथियों को गिरफ्तार कर लिया था। निचली अदालत और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत इन मुख्य दोषियों को पहले ही उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन हत्या के पीछे कथित तौर पर शामिल ‘वीआईपी’ का नाम सामने न आने के कारण लोगों में लगातार रोष बना हुआ था।

क्या अब बेनकाब होगा वह रहस्यमयी ‘VIP’? पूरे देश की टिकी हैं निगाहें

पत्रकार आशुतोष नेगी का बयान दर्ज होने के बाद अब यह माना जा रहा है कि सीबीआई इस मामले की परतों को एक-एक कर खोलने में जुटी हुई है। जिस वीआईपी की भूमिका को लेकर पिछले कई सालों से सुगबुगाहट चल रही है, उसके गिरेबान तक केंद्रीय एजेंसी के हाथ पहुंचने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

अंकिता भंडारी के माता-पिता और देश भर के न्यायप्रिय नागरिकों की निगाहें अब पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि सीबीआई अपनी इस जांच में किन नए तथ्यों को सामने लाती है और क्या वाकई उस ताकतवर शख्स का चेहरा बेनकाब होता है जिसने एक बेटी की जिंदगी छीन ली थी। यह जांच न केवल अंकिता को सच्ची श्रद्धांजलि देने का काम करेगी, बल्कि देश की न्याय व्यवस्था में आम जनता के अटूट विश्वास को और अधिक मजबूत बनाएगी।

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