लखनऊ। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर मचा बवाल अब शांत होने के बजाय और भी गहराता जा रहा है। इस विवाद में अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती की एंट्री ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। मायावती ने फिल्म के टाइटल और कंटेंट को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे पूरे ब्राह्मण समाज का अपमान करार दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि ऐसी ‘जातिसूचक’ सीरीज पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए।
मायावती का ‘एक्स’ पर फूटा गुस्सा: ‘दुख और चिंता की बात’
मायावती ने अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर ब्राह्मण समाज के प्रति अपनी एकजुटता दिखाते हुए लिखा, “यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडित’ को इस तरह दिखाकर अपमान व अनादर किया जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि फिल्म में जिस तरह के शब्दों का प्रयोग हुआ है, उससे समूचे ब्राह्मण समाज में जबरदस्त रोष है और उनकी पार्टी इसकी कड़े शब्दों में निंदा करती है।
लखनऊ में FIR: सीएम योगी के निर्देश पर हजरतगंज पुलिस का एक्शन
इस विवाद का असर अब कानूनी कार्रवाई के रूप में भी दिख रहा है। लखनऊ के हजरतगंज थाने में फिल्म के निर्देशक और पूरी टीम के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। एसएचओ विक्रम सिंह ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया। पुलिस के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने या किसी भी जातिगत और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले प्रयासों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसी आधार पर समाज में शांति भंग करने और भावनाओं को आहत करने का केस दर्ज हुआ है।
विपक्ष भी लामबंद: कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
सिर्फ बसपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस ने भी ‘घूसखोर पंडत’ के नाम पर आपत्ति दर्ज कराई है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि कला अपनी जगह जरूरी है, लेकिन वह किसी की भावनाओं की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने एफआईआर की कार्रवाई पर असहमति जताते हुए कहा कि विवादों का समाधान ‘संवाद’ से होना चाहिए, मुकदमों से नहीं। कांग्रेस ने भी मांग की है कि फिल्म का नाम तुरंत बदला जाए।
भोपाल से लखनऊ तक विरोध की आग
वेब सीरीज को लेकर विरोध प्रदर्शन केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी ब्राह्मण समाज के संगठनों ने सड़कों पर उतरकर भारी प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मनोरंजन के नाम पर किसी खास समुदाय को निशाना बनाना अब स्वीकार्य नहीं होगा। गौरतलब है कि जिस तरह से सभी राजनीतिक दल ब्राह्मण समाज के पक्ष में खड़े हो रहे हैं, उससे साफ है कि यूपी की राजनीति में ‘ब्राह्मण कार्ड’ आगामी चुनावों के लिए बेहद अहम हो गया है।
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