कनाडा में भारतीय छात्रों पर ‘खूनी हमले’: 7 साल में 17 की मौत, सरकार ने संसद में पेश किए चौंकाने वाले आंकड़े

नई दिल्ली: विदेशी धरती पर शिक्षा का सपना लेकर जाने वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर एक डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है। केंद्र सरकार ने संसद में स्वीकार किया है कि साल 2018 से 2025 के बीच कनाडा में हिंसक हमलों के कारण 17 भारतीय छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। विदेश में छात्रों के खिलाफ होने वाली हिंसा के मामले में कनाडा सबसे खतरनाक देश बनकर उभरा है।

कनाडा पहले तो अमेरिका दूसरे नंबर पर, ओवैसी के सवाल पर खुलासा

लोकसभा में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी द्वारा पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने यह जानकारी दी। सरकार द्वारा पेश की गई देशवार तालिका के अनुसार, हिंसक हमलों में जान गंवाने वाले छात्रों की संख्या कनाडा में सर्वाधिक है।

कनाडा के बाद अमेरिका (9 मौतें) दूसरे स्थान पर है। अन्य देशों की स्थिति इस प्रकार है:

  • ऑस्ट्रेलिया: 3 मौतें

  • किर्गिजस्तान: 2 मौतें

  • ब्रिटेन, चीन, जर्मनी, डेनमार्क और ग्रेनेडा: 1-1 मौत

सरकार का दावा: छात्रों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

विदेशी विश्वविद्यालयों में बढ़ते हमलों पर चिंता जताते हुए मंत्री ने कहा कि भारत सरकार विदेश में रह रहे छात्रों की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। उन्होंने बताया कि जब भी ऐसी कोई अप्रिय घटना होती है, तो संबंधित देश के दूतावास और स्थानीय अधिकारियों के साथ तुरंत मामला उठाया जाता है। सरकार यह सुनिश्चित करती है कि मामलों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सख्त सजा मिले।

छात्रों को जागरूक करने के लिए भारतीय मिशन अब ‘प्री-ओरिएंटेशन’ सत्र भी आयोजित कर रहे हैं, ताकि छात्रों को विदेश जाने से पहले वहां की संभावित चुनौतियों और जोखिमों की जानकारी मिल सके।

न्यूजीलैंड में ‘नगर कीर्तन’ में बाधा और माली में भारतीयों का अपहरण

संसद में विदेश मंत्रालय ने दो और गंभीर मुद्दों पर जानकारी दी। पहली घटना न्यूजीलैंड की है, जहां गुरुद्वारा सिख संगत द्वारा आयोजित ‘नगर कीर्तन’ में एक स्थानीय समूह ने बाधा डालने की कोशिश की। भारत सरकार ने इस मुद्दे को न्यूजीलैंड की सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया है।

वहीं, माली (Mali) में एक पावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे तमिलनाडु के 5 भारतीय तकनीशियनों के अपहरण की खबर ने भी सबको चौंका दिया है। 6 नवंबर 2025 को हुए इस हमले के बाद से भारतीय दूतावास बामको में माली सरकार के साथ समन्वय कर रहा है ताकि उनकी सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित की जा सके।

एक्ट ईस्ट पॉलिसी: बौद्ध विरासत बनी कूटनीति का आधार

सांस्कृतिक संबंधों पर बात करते हुए विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने बताया कि आसियान देशों के साथ भारत के रिश्ते साझा बौद्ध विरासत पर टिके हैं। ‘बोधि यात्रा’ जैसी पहलों के जरिए दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत अपनी ‘बौद्ध कूटनीति’ को आगे बढ़ा रहा है, जिससे आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिल रही है।

Check Also

राज्यसभा में मची सनसनी: मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को दिया खुला चैलेंज, बोले- ‘क्या आपमें हिम्मत है कि…

भारतीय संसद का उच्च सदन यानी राज्यसभा हमेशा से ही देश के सबसे गंभीर वैचारिक …