
केंद्र सरकार ने मेडिकल पोस्टग्रेजुएट (मेडिकल पीजी) में दाखिले की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा और सुधार के लिए एक 12 सदस्यीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया है। नकारात्मक अंक (Negative Marks) पाने वाले छात्रों को भी पीजी सीट मिलने के खिलाफ दाखिल एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को इस बात की आधिकारिक जानकारी दी गई। गौरतलब है कि गत 4 मई को सुप्रीम कोर्ट ने ही इस व्यवस्था में स्थायी सुधार लाने के निर्देश दिए थे।
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद 13 जनवरी 2026 को नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स (NBE) द्वारा NEET-PG 2025-26 के तीसरे राउंड का कट-ऑफ घोषित किए जाने के बाद शुरू हुआ।
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कम हुआ कट-ऑफ: इस घोषणा में कट-ऑफ परसेंटाइल को काफी हद तक घटा दिया गया था।
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याचिकाकर्ताओं की आपत्ति: याचिकाकर्ताओं ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए तर्क दिया कि इस फैसले के कारण -40 अंक पाने वाले छात्रों को भी पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश का अवसर मिल रहा है, जो चिकित्सा शिक्षा के उच्च मानकों के विपरीत है।
केंद्र सरकार का पक्ष: योग्यता और व्यावहारिक जरूरतें
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि NEET-PG एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी (Competitive) रैंकिंग परीक्षा है जिसमें नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान है, जिसके चलते कुल स्कोर नकारात्मक भी हो सकता है।
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योग्य डॉक्टर: परीक्षा में बैठने वाला प्रत्येक उम्मीदवार 4.5 साल की मेडिकल पढ़ाई और 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी कर चुका एक योग्य एमबीबीएस (MBBS) डॉक्टर होता है, जो कानूनन प्रैक्टिस करने का हकदार है।
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खाली सीटों को भरना जरूरी: सरकार ने तर्क दिया कि मेडिकल पीजी की खाली सीटों को भरना राष्ट्रीय हित में आवश्यक है और उम्मीदवारों को उनकी रैंकिंग के आधार पर ही विशेषज्ञ कोर्स में प्रवेश मिलता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और कमेटी का गठन
गंभीरता को देखते हुए जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने काउंसलिंग में हर साल होने वाली देरी और खाली सीटों की समस्या का एक स्थायी व संस्थागत समाधान निकालने पर जोर दिया था।
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कमेटी की संरचना: स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के अंतर्गत इस 12 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है, जिसके प्रमुख स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. लोवनीश जी. कृष्णा हैं।
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प्रतिनिधि: इस कमेटी में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA), नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस (NBE) और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं।
कमेटी का मुख्य कार्य और समयसीमा
यह उच्चस्तरीय समिति NEET के जरिए होने वाले मेडिकल पीजी प्रवेश तंत्र का गहन ऑडिट कर उसकी खामियों की पहचान करेगी। इसके साथ ही यह कमेटी उन सभी व्यावहारिक समस्याओं का ठोस समाधान सुझाएगी जो हर साल काउंसलिंग और एडमिशन के दौरान सामने आती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी के गठन पर सहमति जताते हुए निर्देश दिया है कि समिति 8 सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत को सौंपे।
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