
रोशनी और उमंग का महापर्व दीपावली जैसे-जैसे करीब आ रहा है, वैसे-वैसे देश की राजधानी दिल्ली और पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI), प्रदूषण स्तर और अदालती पाबंदियों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। हर साल की तरह इस बार भी जाड़े की दस्तक के साथ ही दिल्ली की हवा में धुंध और जहरीले स्मॉग का खतरा मंडराने लगा है। ऐसे में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के बीच संतुलन साधते हुए सुप्रीम कोर्ट और स्थानीय प्रशासन ने एक बड़ा और संतुलित फैसला लिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पारंपरिक, रासायनिक और तेज आवाज वाले भारी पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध पहले की तरह ही सख्ती से बरकरार रहेगा। हालांकि आम जनता को राहत देते हुए केवल वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित ग्रीन पटाखों के सीमित और नियंत्रित इस्तेमाल की सशर्त मंजूरी प्रदान की गई है। इस अनुमति के साथ प्रशासन ने यह भी कड़ा संदेश दिया है कि नियमों की रत्ती भर भी अनदेखी करने वालों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के इलाकों में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए यह कदम बेहद आवश्यक माना जा रहा है। त्योहार की खुशियों के बीच बुजुर्गों, नवजात शिशुओं और सांस के पुराने मरीजों के स्वास्थ्य की रक्षा करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बन चुका है। पुलिस और स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों में निगरानी के लिए विशेष उड़नदस्ते तैनात करें। यदि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति वाले पटाखों का भंडारण, बिक्री या उपयोग करता पाया गया, तो उसका स्टॉक जब्त करने के साथ-साथ भारी जुर्माना और कानूनी मुकदमा दर्ज किया जाएगा। ऐसे में इस त्योहारी सीजन में दीयों की रोशनी के साथ खुशियां बांटने की योजना बना रहे हर नागरिक के लिए यह जानना अनिवार्य हो गया है कि वे कब, कहां और कैसे पटाखे जला सकते हैं।
प्रशासन ने दिल्ली-एनसीआर में आतिशबाजी के लिए अत्यंत सीमित और सख्त टाइम टेबल तय किया है ताकि हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर को खतरनाक स्तर तक पहुंचने से रोका जा सके। तय नियमों के तहत पूरे एनसीआर क्षेत्र में केवल 7 नवंबर और 8 नवंबर 2026 को ही ग्रीन पटाखे जलाने की वैधानिक अनुमति होगी। इन दो निर्धारित तारीखों से पहले या इनके बाद किसी भी दिन किसी भी प्रकार की आतिशबाजी करना पूरी तरह से गैरकानूनी और दंडनीय अपराध माना जाएगा। जो लोग त्योहार से कई दिन पहले ही पटाखे फोड़ना शुरू कर देते हैं, उन पर ड्रोन और गश्ती दलों के जरिए नजर रखी जा रही है।
इतना ही नहीं, दिनभर या अपनी मर्जी से कभी भी पटाखे चलाने की खुली छूट नहीं दी गई है। इसके लिए 24 घंटे में केवल दो सीमित टाइम स्लॉट निर्धारित किए गए हैं। पहला स्लॉट सुबह के समय केवल एक घंटे के लिए रखा गया है, जो सुबह 6:00 बजे से 7:00 बजे तक रहेगा। दूसरा स्लॉट रात के समय तय किया गया है, जिसके तहत रात 8:00 बजे से 10:00 बजे तक यानी केवल दो घंटे के लिए ग्रीन पटाखे फोड़ने की अनुमति होगी। इस प्रकार पूरे दिन में कुल मिलाकर केवल तीन घंटे ही आतिशबाजी की जा सकेगी। दीपावली संपन्न होते ही 9 नवंबर 2026 की सुबह से पटाखों की खरीद, बिक्री, परिवहन और उनके इस्तेमाल पर एक बार फिर से पूर्ण और कठोर प्रतिबंध लागू कर दिया जाएगा।
त्योहारी सीजन में अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में कई दुकानदार और कालाबाजारी करने वाले सामान्य रासायनिक पटाखों को ही नकली पैकिंग में ग्रीन पटाखा बताकर ग्राहकों को बेच देते हैं। आम नागरिकों को इस धोखे से बचाने के लिए सरकार और वैज्ञानिक संस्थानों ने बेहद पारदर्शी सुरक्षा मानक तय किए हैं। असली ग्रीन पटाखे वे होते हैं जिन्हें वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान यानी नीरी (CSIR-NEERI) द्वारा विकसित फॉर्मूलेशन पर तैयार किया गया हो और जिन्हें पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन यानी पेसो (PESO) द्वारा विधिवत परीक्षण के बाद निर्माण का लाइसेंस जारी किया गया हो। असली ग्रीन पटाखे के हर अधिकृत डिब्बे पर नीरी और पेसो का आधिकारिक सुरक्षा होलोग्राम और लोगो स्पष्ट रूप से मुद्रित रहता है।
सबसे महत्वपूर्ण पहचान डिब्बे पर मौजूद यूनिक और नॉन-ट्रांसफरेबल क्यूआर कोड (QR Code) है। उपभोक्ता बाजार में खरीदारी करते समय अपने स्मार्टफोन के कैमरे या किसी भी क्यूआर स्कैनर ऐप से उस कोड को तुरंत स्कैन कर सकते हैं। कोड स्कैन होते ही मोबाइल स्क्रीन पर उस उत्पाद के निर्माता का नाम, नीरी का वैध पंजीकरण क्रमांक, पेसो का लाइसेंस नंबर, पटाखों की रासायनिक संरचना और संबंधित बैच का आधिकारिक टेस्ट सर्टिफिकेट खुलकर सामने आ जाएगा। यदि किसी पैकेट पर क्यूआर कोड नहीं है या कोड स्कैन करने पर विवरण मेल नहीं खाता है, तो समझ लें कि वह उत्पाद अवैध और नकली है। असली ग्रीन पटाखों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि इनमें बेरियम साल्ट, बेरियम नाइट्रेट, पारा, सीसा और आर्सेनिक जैसे जानलेवा रसायनों का इस्तेमाल नहीं होता। इनके जलने से सामान्य पटाखों की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक कम धुआं और हानिकारक गैसें निकलती हैं। इसके अतिरिक्त बाजार में मिलने वाली लंबी लड़ियां या घिन्नी (जुड़ी हुई आतिशबाजी) पूरी तरह प्रतिबंधित हैं क्योंकि इनसे अत्यधिक वायु और ध्वनि प्रदूषण फैलता है।
समाज के कमजोर और संवेदनशील वर्गों की सेहत को खतरे से बचाने के लिए प्रशासन ने सख्त ‘नो-क्रैकर जोन’ की सीमाएं तय कर दी हैं। दिल्ली-एनसीआर के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, नर्सिंग होम, मैटरनिटी सेंटर्स और स्वास्थ्य केंद्रों के चारों ओर 300 मीटर के दायरे को पूर्ण रूप से साइलेंस और नो-क्रैकर जोन घोषित किया गया है। इन सीमाओं के भीतर किसी भी प्रकार का पटाखा जलाना सख्त गैरकानूनी होगा ताकि भर्ती मरीजों को तेज आवाज और धुएं से कोई परेशानी न हो। यही प्रतिबंध सभी प्राथमिक विद्यालयों, हाई स्कूलों, कॉलेजों, यूनिवर्सिटी परिसरों, कोचिंग सेंटरों, ओल्ड-एज होम (वृद्धाश्रम) और अनाथालयों के आसपास 300 मीटर के दायरे में भी पूरी कड़ाई से लागू रहेगा।
इसके अलावा घर बैठे आसानी से पटाखे मंगाने की चाह रखने वाले लोगों को भी बड़ा झटका लगा है। प्रशासन ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि दिल्ली-एनसीआर के भौगोलिक क्षेत्र में किसी भी ई-कॉमर्स वेबसाइट, सोशल मीडिया पेज या ऑनलाइन डिलीवरी ऐप के माध्यम से पटाखों की बिक्री और होम डिलीवरी पूरी तरह गैरकानूनी है। कोई भी कूरियर एजेंसी या डिलीवरी बॉय यदि पटाखों का पार्सल ले जाता पाया गया तो कंपनी का लाइसेंस रद्द करने के साथ संबंधित व्यक्ति पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा। पटाखे केवल और केवल जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा जारी किए गए अस्थायी लाइसेंस वाले अधिकृत खुदरा विक्रेताओं की दुकानों से ही व्यक्तिगत रूप से खरीदे जा सकते हैं। इस त्योहारी सीजन में प्रशासन ने सभी नागरिकों से एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील की है ताकि परंपरा का उल्लास भी बना रहे और दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा भी सांस लेने योग्य बनी रहे।
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