ढाका। बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले ऐतिहासिक संसदीय चुनावों से ठीक पहले एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। अपने कट्टरपंथी अतीत और भारत विरोधी रुख के लिए जानी जाने वाली बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने अचानक अपने सुर नरम कर लिए हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और उम्मीदवारों की ओर से अब “पड़ोसी के साथ सहयोग” और “अपरिहार्यता” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे जानकार सत्ता तक पहुँचने की एक सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं।
बैरिस्टर अरमान की दलील: ‘भारत और बांग्लादेश एक-दूसरे के लिए अपरिहार्य’
ढाका-14 निर्वाचन क्षेत्र से जमात के हाई-प्रोफाइल उम्मीदवार बैरिस्टर मीर अहमद बिन कासिम अरमान ने चुनाव से ऐन पहले भारत के साथ रिश्तों पर बड़ी बात कही है। एनडीटीवी (NDTV) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में अरमान ने कहा, “भारत और बांग्लादेश के हित एक-दूसरे से जुड़े हैं। हम एक-दूसरे के लिए अपरिहार्य (Indispensable) हैं और हमें मिलकर काम करना ही होगा।”
अरमान, जिन्हें ‘गुप्त हिरासत’ से शेख हसीना के पतन के बाद रिहा किया गया था, का यह बयान जमात की पारंपरिक छवि के बिल्कुल उलट है। वे फांसी पर चढ़ाए गए जमात नेता मीर कासिम अली के बेटे हैं और वर्तमान में पार्टी के सबसे आधुनिक और पढ़े-लिखे चेहरों में से एक माने जाते हैं।
कट्टरपंथ की छवि धोने की कोशिश: हिंदू उम्मीदवार और महिला अधिकार
जमात-ए-इस्लामी अच्छी तरह जानती है कि केवल कट्टरपंथी वोटों के दम पर वह बहुमत हासिल नहीं कर सकती। इसीलिए इस बार पार्टी ने ‘इमेज मेकओवर’ का सहारा लिया है:
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पहली बार हिंदू उम्मीदवार: जमात ने इस चुनाव में एक हिंदू उम्मीदवार को टिकट देकर सबको चौंका दिया है।
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अल्पसंख्यकों को सुरक्षा का भरोसा: पार्टी प्रमुख डॉ. शफीकुर रहमान लगातार हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों से मिल रहे हैं और उन्हें सुरक्षा का वादा कर रहे हैं।
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महिलाओं के लिए नरम रुख: कभी महिलाओं के घर से बाहर निकलने का विरोध करने वाली जमात अब उनके लिए “सुरक्षित और सम्मानजनक” कार्यस्थल का वादा अपने घोषणापत्र में कर रही है।
भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
भारत हमेशा से जमात के कट्टरपंथी और पाकिस्तान समर्थक इतिहास को लेकर सतर्क रहा है। हालांकि, जमात के चुनावी घोषणापत्र में भारत के साथ “रचनात्मक और सहयोगात्मक” संबंधों का वादा किया गया है, लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि नई दिल्ली का रुख केवल चुनावी वादों पर नहीं, बल्कि धरातल पर होने वाली कार्रवाइयों और सुरक्षा चिंताओं के आधार पर तय होगा।
अमीर शफीकुर रहमान का दावा: ‘हम बहुमत के कगार पर’
जमात के अमीर डॉ. शफीकुर रहमान का कहना है कि उनकी पार्टी को अब हाशिए पर नहीं धकेला जा सकता। उन्होंने कहा, “जनता बदलाव चाहती है और जमात वह विकल्प है। हमने 100 दिनों का रोडमैप तैयार किया है जो बांग्लादेश को आधुनिक और परिपक्व राष्ट्र बनाएगा।” जानकार मानते हैं कि अगर बीएनपी (BNP) और जमात के बीच वोटों का बिखराव नहीं हुआ, तो यह गठबंधन भारत के इस पड़ोसी देश की सत्ता संरचना को पूरी तरह बदल सकता है।
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