सार्क को जिंदा करने की कोशिश या भारत के खिलाफ नई कूटनीतिक बिसात

दक्षिण एशिया के बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच मालदीव के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज्ज़ू तीन दिवसीय आधिकारिक राज्य यात्रा पर इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। पिछले 11 वर्षों में किसी मालदीवियाई राष्ट्रपति का यह पहला पाकिस्तान दौरा है। इस ऐतिहासिक यात्रा ने पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है। राजनीतिक गलियारों और विदेश नीति के विश्लेषकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह यात्रा लंबे समय से निष्क्रिय पड़े दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी सार्क (SAARC) को फिर से जीवित करने का प्रयास है, या फिर यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के प्रभाव को संतुलित करने की कोई नई रणनीति?

द्विपक्षीय संबंधों और सार्क की बहाली पर बड़ा दांव

राष्ट्रपति मुइज्ज़ू की इस पाकिस्तान यात्रा के केंद्र में व्यापार, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, पर्यटन और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल हैं। दोनों देश अपने 60 वर्षों के राजनयिक संबंधों को नया आयाम देने के लिए कई द्विपक्षीय समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। हालांकि, इन समझौतों से परे, सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाला पहलू क्षेत्रीय सहयोग का मुद्दा है।

हाल के महीनों में मालदीव और बांग्लादेश जैसे देशों ने सार्क की बैठकों को दोबारा शुरू करने और क्षेत्रीय सहयोग को प्राथमिकता देने का आह्वान किया है। सार्क सम्मेलन लंबे समय से स्थगित पड़े हैं, और मुइज्ज़ू द्वारा क्षेत्रीय मंचों को सक्रिय करने की इच्छा जताए जाने के बाद पाकिस्तान यात्रा को सार्क को पुनर्जीवित करने की एक ठोस कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

भारत के दृष्टिकोण से क्या हैं रणनीतिक मायने?

भारत की विदेश नीति के दृष्टिकोण से यह विकास काफी संवेदनशील माना जा रहा है। भारत ने हमेशा से क्षेत्रीय सहयोग और कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी है, लेकिन सीमा पार आतंकवाद की चुनौतियों के कारण सार्क की बैठकों में पाकिस्तान की भागीदारी पर हमेशा कड़ा रुख अपनाया है। भारत बिमस्टेक (BIMSTEC) जैसे वैकल्पिक क्षेत्रीय मंचों के माध्यम से अपने पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर बल देता रहा है।

मालदीव की वर्तमान सरकार की नीतियां अतीत में 'इंडिया आउट' अभियान और चीन की ओर झुकाव को लेकर चर्चा में रही हैं। ऐसे में इस्लामाबाद के साथ रक्षा और समुद्री खुफिया जानकारी साझा करने (Maritime Intelligence Sharing) जैसे संवेदनशील विषयों पर बातचीत भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकती है। हालांकि, हाल के समय में माले ने नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाने के प्रयास भी किए हैं। इसके बावजूद, पाकिस्तान और मालदीव के बीच बढ़ता सामरिक तालमेल हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के भू-राजनीतिक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य का परिदृश्य

इस यात्रा के दौरान 'पाकिस्तान-मालदीव बिजनेस फोरम' का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें दोनों देश कराची व ग्वादर को माले से जोड़ने वाले नए समुद्री मार्गों पर विचार करेंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देश आर्थिक संबंधों को मजबूती देने के साथ-साथ सार्क के मुद्दे पर अन्य दक्षिण एशियाई राष्ट्रों का समर्थन जुटा पाते हैं या नहीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया में सार्क का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और कूटनीतिक मतभेदों को किस तरह से हल किया जाता है। क्या यह दौरा केवल दो देशों का रणनीतिक समन्वय है या दक्षिण एशियाई राजनीति का एक नया मोड़, आने वाले दिन इसका फैसला करेंगे।

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