चीन और ताइवान के दबदबे के बीच भारत का बड़ा दांव, $4.6 ट्रिलियन के ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार पर है नज़र

 

नई दिल्ली। वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में अपनी धाक जमाने के लिए भारत अब एक बड़ी रणनीति पर काम कर रहा है। नीति आयोग की ताज़ा ‘ट्रेड वाच क्वार्टरली’ रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत को 4.6 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 380 लाख करोड़ रुपये) के विशाल वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी है, तो उसे मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का आक्रामक तरीके से इस्तेमाल करना होगा। वर्तमान में इस विशाल बाजार में भारत की हिस्सेदारी महज एक प्रतिशत के करीब है, जिसे सरकार अब कई गुना बढ़ाना चाहती है।

असेंबली नहीं, अब कलपुर्जों के निर्माण पर होगा जोर

नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि भारत को अब केवल उत्पादों की ‘असेम्बली’ (जोड़ने) तक सीमित नहीं रहना चाहिए। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि देश को ‘कंपोनेंट-बेस्ड मैन्यूफैक्चरिंग’ यानी कलपुर्जा-आधारित विनिर्माण की ओर तेजी से कदम बढ़ाना होगा। अभी तक भारत मुख्य रूप से बाहर से आए हिस्सों को जोड़ने का काम करता रहा है, लेकिन भविष्य की योजना घरेलू स्तर पर ही ऊंच-प्रौद्योगिकी वाले पुर्जे तैयार करने की है। इसमें इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण अवयवों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिन पर वर्तमान में चीन, हांगकांग और ताइवान का एकतरफा वर्चस्व है।

FTA बनेगा निर्यात की नई चाबी

रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के वर्षों में भारत ने कई देशों के साथ जो मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं, उन्होंने भारतीय उत्पादों के लिए विदेशी बाजारों के द्वार खोले हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए यह जरूरी है कि भारत अपनी घरेलू नीतियों में स्थिरता लाए। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नियामक सरलीकरण और निर्यात वित्त (Export Finance) को आसान बनाना होगा। आयोग का मानना है कि यदि भारत इन ढांचागत चुनौतियों का समाधान कर लेता है, तो निर्यात की राह में आने वाली लागत संबंधी बाधाएं दूर हो जाएंगी।

मोबाइल फोन का जलवा, अमेरिका और UAE बड़े खरीदार

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के आंकड़ों पर गौर करें तो मोबाइल फोन सबसे बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरा है। कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में मोबाइल फोन की हिस्सेदारी 52.5 प्रतिशत है। भारत अपने उत्पादों का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और नीदरलैंड को भेजता है। रिपोर्ट के सुखद पहलू यह है कि सितंबर तिमाही में वस्तु एवं सेवा निर्यात में 8.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि देखी गई है, जो कि आयात वृद्धि की तुलना में अधिक है। यह संकेत देता है कि ‘मेड इन इंडिया’ का डंका दुनिया में बजने लगा है।

2030 तक ई-कॉमर्स बदलेगा निर्यात की तस्वीर

आयोग ने भविष्य की राह दिखाते हुए कहा कि 2030 तक सीमा पार ई-कॉमर्स (Cross-border E-commerce) भारत के निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। इसके लिए सरकार को ‘एंकर निवेश’ को बढ़ावा देना होगा, जो न केवल पूंजी लाएंगे बल्कि तकनीक का हस्तांतरण भी करेंगे। आपूर्ति पक्ष पर दिए जाने वाले प्रोत्साहनों को घरेलू मूल्य संवर्धन और निरंतर शोध एवं विकास (R&D) से जोड़ना अनिवार्य होगा ताकि भारत तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर बन सके।

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