अमेरिका और चीन के बीच चल रहे कूटनीतिक तनाव ने अब मीडिया जगत को भी अपनी चपेट में ले लिया है। दोनों महाशक्तियों के बीच पत्रकारों को निष्कासित करने की एक नई ‘होड़’ शुरू हो गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर संकट गहरा गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह टकराव तब शुरू हुआ जब चीन की सरकार ने ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की संवाददाता विवियन वांग को निष्कासित कर दिया। वांग का कसूर केवल इतना था कि उन्होंने ताइवानी नेता की ‘डील बुक’ कार्यक्रम में उपस्थिति की रिपोर्टिंग की थी। चीन की सरकार ने बिना किसी ठोस आधार के इस रिपोर्टिंग को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप माना।
ट्रम्प प्रशासन की जवाबी कार्रवाई
इस घटना के बाद, डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने चीन के खिलाफ एक दुर्लभ और सीधा जवाबी कदम उठाते हुए अमेरिका में काम कर रहे चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ (Xinhua) के एक पत्रकार का वीजा रद्द कर दिया। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए इसे चीन के अनुचित व्यवहार के जवाब में उठाया गया कदम बताया है।
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने की निंदा
इस जवाबी कार्रवाई के बाद ‘द टाइम्स’ अखबार ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है। अखबार के कार्यकारी संपादक जोसेफ कान ने कहा कि विवियन वांग का निष्कासन पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा, “चीन की इस कार्रवाई से हमारे वैश्विक पाठकों के लिए दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बारे में सटीक और स्वतंत्र रिपोर्टिंग पाना और कठिन हो जाएगा।” साथ ही, अखबार ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी सरकार से किसी पत्रकार के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने की मांग नहीं की है, बल्कि वे केवल वांग की मान्यता को बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक मंचों पर अमेरिका और चीन के बीच ताइवान, व्यापारिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय शांति को लेकर लगातार बहस छिड़ी हुई है। अभी हाल ही में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान भी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को लेकर चीन की अध्यक्षता में हुई बहस में कूटनीतिक खींचतान देखी गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पत्रकारों को मोहरा बनाना और उन्हें निष्कासित करना दोनों देशों के बीच गिरते कूटनीतिक स्तर को दर्शाता है। इससे न केवल दोनों देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बाधित होगा, बल्कि भविष्य में स्वतंत्र मीडिया के लिए चीन में काम करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। फिलहाल, इस मामले पर वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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