
पड़ोसी देश बांग्लादेश में गारमेंट सेक्टर (RMG) का मजदूर आंदोलन अब पूरी तरह बेकाबू होकर बड़े राष्ट्रीय संकट में बदल चुका है। न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 30,000 टका प्रति माह करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे लाखों रेडीमेड गारमेंट कर्मचारियों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। ढाका, गाजीपुर, आशु लिया और मीरपुर जैसे विशाल औद्योगिक hubs में प्रदर्शनकारियों की पुलिस व सुरक्षा बलों के साथ तीखी हिंसक झड़पें हुई हैं, जिसमें कई पुलिस पिकेट और वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया है। हालात की विकरालता को देखते हुए देश के 529 से अधिक गारमेंट कारखानों में काम पूरी तरह ठप हो गया है और उत्पादन पर ताले लग चुके हैं। इस बेहद तनावपूर्ण स्थिति और आर्थिक तबाही के खतरे के बीच प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार ने आपातकालीन बैठक बुलाकर एक बड़ा फैसला लिया है।
ढाका से गाजीपुर तक उग्र हुआ प्रदर्शन, 529 गारमेंट फैक्ट्रियों में थमा उत्पादन
बांग्लादेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में इस समय अघोषित आपातकाल जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं। गाजीपुर, सावर और ढाका-टांगैल हाईवे पर भड़के मजदूरों ने कई किलोमीटर लंबा चक्का जाम कर दिया, जिससे पूरे इलाके की यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गई। प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह बैरिकेड्स लगाकर और सड़कों पर आगजनी कर अपना कड़ा विरोध जताया। बेकाबू भीड़ को खदेड़ने के लिए पुलिस को साउंड ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले दागने पड़े। हिंसक झड़पों और तोड़फोड़ के डर से बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) से जुड़े मालिकों ने 529 से अधिक फैक्ट्रियों को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा कर दी है, जिससे करीब 10 लाख श्रमिकों का काम पूरी तरह से रुक गया है।
तारिक रहमान सरकार का बड़ा फैसला: 6-सदस्यीय नए न्यूनतम वेतन बोर्ड का गठन
सड़कों पर मचे भारी बवाल और उद्योग जगत की बढ़ती तबाही को देखते हुए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने कैबिनेट मंत्रियों और आला अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक की। बैठक के बाद श्रम मंत्रालय की ओर से बड़ा ऐलान करते हुए कर्मचारियों की मांग के समर्थन में एक 6-सदस्यीय नया न्यूनतम वेतन बोर्ड (Minimum Wage Board) गठित करने का फैसला सुनाया गया। इसके साथ ही श्रम मंत्री आरिफुल हक चौधरी ने अपना प्रस्तावित विदेश दौरा रद्द कर दिया और आंदोलनकारी कर्मचारियों से तुरंत सड़कों को खाली कर वापस अपने कारखानों में लौटने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि मजदूरों के वैध हितों की रक्षा की जाएगी, लेकिन उद्योग-धंधों को ठप करने या हिंसा फैलाने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।
तोड़फोड़ और राजनीतिक तोड़मरोड़ के खिलाफ सुरक्षा बलों का बड़ा एक्शन
इस व्यापक मजदूर अशांति के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप और तोड़फोड़ (Sabotage) की आशंका जताते हुए सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस और बॉडर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की संयुक्त टीमों ने अशांत औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ा सुरक्षा अभियान चलाकर कई उपद्रवियों और राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया है। सरकारी अधिकारियों का आरोप है कि कुछ अराजक तत्व मजदूरों की जायज मांगों की आड़ में देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात की रीढ़ माने जाने वाले टेक्सटाइल सेक्टर को तबाह करने की साजिश रच रहे हैं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि हिंसक प्रदर्शनों, पुलिस वाहनों में आगजनी और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।
वैश्विक सप्लाई चेन और बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर मंडराया गहरा खतरा
रेडीमेड गारमेंट सेक्टर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का सबसे मुख्य आधार है, जो देश की कुल निर्यात कमाई का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है। 500 से अधिक कारखानों के अचानक बंद होने और विनिर्माण ठप पड़ने से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों (International Buyers) द्वारा करोड़ों डॉलर के ऑर्डर्स रद्द किए जाने का जोखिम खड़ा हो गया है। यदि नया वेज बोर्ड समय रहते कोई स्वीकार्य समाधान नहीं निकाल पाता है, तो बांग्लादेश के गारमेंट निर्यात में भारी गिरावट आएगी, जिसका सीधा फायदा भारत, वियतनाम और चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को मिल सकता है। फिलहाल पूरा देश इस बात का इंतजार कर रहा है कि क्या सरकार के इस नए फैसले के बाद मजदूर सड़कों से हटकर वापस काम पर लौटेंगे या यह गतिरोध और लंबा खिंचेगा।
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