देवबंद के दारुल उलूम में महिलाओं के बाद अब इन लोगों की नो-एंट्री: शाम ढलते ही प्रवेश पर लगा प्रतिबंध, सुरक्षा और पढ़ाई का हवाला देने पर भड़के लोग

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान ‘दारुल उलूम देवबंद’ ने महिलाओं के बाद अब बाहरी और स्थानीय लोगों के प्रवेश को लेकर एक नया फरमान जारी किया है। नए आदेश के तहत मगरिब (शाम) की नमाज के बाद परिसर में किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रबंधतंत्र के इस अचानक लिए गए फैसले से स्थानीय निवासियों में काफी नाराजगी देखी जा रही है।

छात्रों की पढ़ाई और सुरक्षा का दिया हवाला

दारुल उलूम के छात्रावास प्रभारी मौलाना मुफ्ती अशरफ अब्बास ने फैसले की वजह बताते हुए कहा कि शाम का समय छात्रों (तलबा) के अध्ययन और पाठ याद करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि बिना काम के आने वाले लोगों की वजह से पढ़ाई में बाधा आती है। इसके अलावा, हाल के दिनों में छात्रों का भेष धरकर परिसर में घुसने और चोरी की कोशिश करने के कई मामले सामने आए हैं, जिसके चलते सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाया गया है।

विवाद पर दारुल उलूम प्रबंधन की सफाई

स्थानीय लोगों के गुस्से को देखते हुए प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि दिन के समय प्रवेश पर कोई रोक नहीं है। साथ ही, यदि कोई आपातकालीन स्थिति हो, कोई जरूरी काम हो या बाहर से आए मेहमान हों, तो उन्हें शर्तों के साथ आने की अनुमति रहेगी। प्रबंधन ने यह भी कहा कि दारुल उलूम के विकास में देवबंद के लोगों का ऐतिहासिक योगदान है और संस्थान पर पहला अधिकार शहरियों का ही है।

महिलाओं के प्रवेश पर पहले भी लग चुकी है रोक

गौरतलब है कि इससे पहले भी दारुल उलूम प्रबंधन ने परिसर के भीतर महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया था। उस समय भी भारी विरोध के बाद कुछ शर्तों के साथ ढील दी गई थी, लेकिन बाद में पाबंदी फिर से लागू कर दी गई। अब शाम के समय सभी बाहरी लोगों की आवाजाही बंद होने से देवबंद का माहौल एक बार फिर गरमा गया है।

Check Also

माफिया अतीक की 345 करोड़ की जब्त संपत्ति पर बनेंगे अस्पताल और पार्क: प्रयागराज से लखनऊ तक फैली जमीन का जनता के लिए बड़ा प्लान, जानें डीएम की नई रणनीति

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ और पत्नी शाइस्ता परवीन …