
वैश्विक रक्षा बाजार में लड़ाकू विमानों की खरीद-फरोक्त को लेकर एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रूस के सबसे खतरनाक और मारक कहे जाने वाले 4.5 जनरेशन के 'सुपर फ्लैंकर' यानी सुखोई Su-35 फाइटर जेट्स को लेकर एक अफ्रीकी देश ने बड़ा कदम उठाया है। इथियोपिया ने रूसी रक्षा उद्योग से डील के तहत दर्जनभर आधुनिक Su-35 लड़ाकू विमानों का पहला बेड़ा अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। हैरानी की बात यह है कि इसी अफ्रीकी देश के पास पहले से ही भारतीय मानक वाले और लीज या पुराने वर्जन के Su-30 विमान मौजूद रहे हैं। ऐसे में रक्षा विशेषज्ञों के बीच इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर रूस का यह नया 'सुपर फ्लैंकर' Su-35, पारंपरिक Su-30 से कितना अधिक ताकतवर, घातक और तकनीकी रूप से उन्नत है।
Su-30 और Su-35 की बुनियादी तकनीकी बनावट में अंतर
जब हम रूसी सुखोई सीरीज के इन दोनों दिग्गजों की तुलना करते हैं, तो सबसे बड़ा और बुनियादी अंतर इनकी कॉकपिट डिजाइन और एयरफ्रेम क्षमता का नजर आता है। भारतीय वायुसेना रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले Su-30 (जैसे Su-30MKI) में पायलट और नेविगेटर/वेपन सिस्टम ऑफिसर (WSO) के बैठने के लिए दो सीटों वाली (Tandem) व्यवस्था होती है। इसके उलट, Su-35 एक सिंगल-सीटर (एकल पायलट चालित) एयरक्राफ्ट है। दूसरे क्रू मेंबर के वजन और भारी-भरकम उपकरणों को हटाने से Su-35 के एयरफ्रेम को और अधिक हल्का, लचीला और ईंधन की ज्यादा क्षमता वाला बनाया गया है। इसके अलावा, Su-30MKI की तरह Su-35 में आगे की तरफ छोटे कैनार्ड विंग्स (Canards) नहीं होते हैं, बल्कि इसके बजाय इसके वायुगतिकीय डिजाइन और थ्रस्ट-वेक्टरिंग नोजल्स इसे हवा में बेजोड़ कलाबाजियां दिखाने की क्षमता देते हैं।
सुपर-मैन्यूवरेबिलिटी और अत्याधुनिक इंजन की ताकत
Su-35 की सबसे बड़ी ताकत इसके दो शक्तिशाली Saturn AL-41F1S आफ्टरबर्निंग टर्बोファン इंजन हैं, जो 3D थ्रस्ट-वेक्टरिंग नोजल्स से लैस हैं। इन इंजनों के नोजल्स अलग-अलग दिशाओं में घूम सकते हैं, जिसकी वजह से यह फाइटर जेट 'सुपर-मैन्यूवरेबिलिटी' का प्रदर्शन करता है। यह विमान हवा में ऐसी खतरनाक और अचानक पलटने वाली कलाबाजियां (जैसे कोबरा और कुल्बिट मैन्यूवर) कर सकता है, जो दुश्मन के रडार और मिसाइलों को चकमा देने में पूरी तरह सक्षम हैं। पारंपरिक Su-30 के मुकाबले इस विमान की अधिकतम गति (Mach 2.25) और बिना रीफ्यूलिंग के मारक दूरी (Combat Range) भी काफी अधिक है, जो इसे लंबी दूरी के अभियानों में बेहद खतरनाक बनाती है।
घातक रडार प्रणाली और हथियारों का महाजाल
दुश्मन को हवा में नेस्तनाबूद करने के मामले में Su-35 में लगा N035 Irbis-E पैसिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैंड एरे (PESA) रडार इसे एक चलता-फिरता शिकारी बना देता है। यह शक्तिशाली रडार सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के कई लड़ाकू विमानों को एक साथ ट्रैक करने और निशाना बनाने की कुव्वत रखता है। इसके बाहरी 12 हार्डपॉइंट्स पर लगभग 8,000 किलोग्राम तक के आधुनिक हथियार, लेजर-गाइडेट बम और लंबी दूरी की मिसाइलें (जैसे खौफनाक R-37M हाइपरसोनिक एयर-टू-एयर मिसाइल) आसानी से लोड की जा सकती हैं। हालांकि Su-30 भी भारी पेलोड ले जाने में माहिर है, लेकिन Su-35 के डिजिटल एवियोनिक्स और एडवांस्ड जैमिंग सिस्टम्स इसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के लिहाज से ज्यादा आधुनिक बनाते हैं।
अफ्रीकी देशों की रक्षा रणनीति और वैश्विक प्रभाव
इथियोपिया द्वारा Su-35 की यह डील ऐसे समय में सामने आई है जब अफ्रीकी महाद्वीप में रणनीतिक गठजोड़ तेजी से बदल रहे हैं। रूस के इन 'सुपर फ्लैंकर' विमानों के शामिल होने से इथियोपियाई वायुसेना की मारक क्षमता में कई गुना इजाफा हुआ है, साथ ही वे आधुनिक S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को भी अपनी रक्षा पंक्ति में जोड़ने की योजना बना रहे हैं। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पारंपरिक Su-30 विमान अपनी लागत और दो-सीटर उपयोगिता के कारण अपनी जगह मजबूत बनाए रखे हैं, लेकिन एकल पायलट के साथ काम करने वाला Su-35 आधुनिक युद्धक्षेत्र की उन जरूरतों को पूरा करता है जहां एआई-असिस्टेड एवियोनिक्स और डॉगफाइटिंग में पैنتरेबाजी सबसे अहम होती है।
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