आध्यात्मिक डेस्क, वाराणसी। हिंदू पंचांग की गणना में इस बार एक दुर्लभ और बेहद शुभ संयोग बनने जा रहा है। भगवान विष्णु को समर्पित ‘अधिमास’ जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, इस वर्ष ज्येष्ठ (जेठ) के महीने में आ रहा है। खास बात यह है कि जेठ के महीने में यह संयोग पूरे 27 साल बाद बना है। इसके चलते इस बार ज्येष्ठ मास दो महीनों का होगा।
वाराणसी के विद्वानों और ज्योतिषियों के अनुसार, इस अवधि में दान-पुण्य और भक्ति का अनंत फल प्राप्त होगा। आइए जानते हैं अमर उजाला की इस विशेष रिपोर्ट में कि कब से शुरू हो रहा है मलमास और इस दौरान किन बातों का रखना होगा ख्याल।
17 मई से शुरू होगा दूसरा जेठ: दो अमावस्या और दो पूर्णिमा का योग
आदर्श सेवा संस्कृत कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार, पंचांग की गणना को संतुलित करने के लिए अधिमास की व्यवस्था की गई है। इस बार पहले जेठ का एक पखवाड़ा (15 दिन) बीतने के बाद, 17 मई से दूसरे जेठ यानी अधिमास का आरंभ होगा। यह 15 जून तक चलेगा। इसके समापन के बाद पहले जेठ का बचा हुआ दूसरा पखवाड़ा शुरू होगा।
इस दौरान भक्तों को दो पूर्णिमा और दो अमावस्या के दर्शन होंगे। इतना ही नहीं, इस मलमासी जेठ में गुरुपुष्य योग का महासंयोग भी दो बार बनेगा—पहला मई के अंत में और दूसरा जून के प्रथम सप्ताह में।
क्यों आता है अधिमास? जानिए इसके पीछे का विज्ञान
सूर्य वर्ष लगभग 365 दिनों का होता है, जबकि चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का। हर साल इन दोनों के बीच 11 दिनों का अंतर आता है। यही अंतर तीन वर्षों में लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है। इस अंतर को पाटने के लिए हर 32 महीने और 16 दिन के अंतराल पर एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास कहते हैं। इस महीने में सूर्य संक्रांति नहीं होती, यानी सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश नहीं करते।
सावधान! इन शुभ कार्यों पर लगेगा ‘अल्पविराम’
महावीर पंचांग के संपादक डॉ. रामेश्वरनाथ ओझा के अनुसार, अधिमास को भौतिक मांगलिक कार्यों के लिए निषेध माना गया है। इस दौरान ये कार्य भूलकर भी न करें:
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विवाह और सगाई: इस समय विवाह करने से वैवाहिक जीवन में बाधाएं आ सकती हैं।
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गृह प्रवेश और नींव पूजन: नए घर में प्रवेश या निर्माण कार्य शुरू करना वर्जित है।
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मुंडन और जनेऊ: बच्चों के संस्कार इस अवधि में नहीं किए जाते।
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नया व्यापार: नई दुकान, शोरूम या बड़ा निवेश आर्थिक क्षति का कारण बन सकता है।
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भोजन: इस पूरे माह तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
मंत्र जप का विशेष नियम: विषम संख्या में करें जाप
भृगु संहिता विशेषज्ञ पं. वेदमूर्ति शास्त्री बताते हैं कि यह महीना साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इस दौरान ‘ऊं नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप मानसिक शांति देता है। मंत्रों का जाप हमेशा विषम संख्या (1, 3, 5 या 7 माला) के क्रम में करना चाहिए। इसके अलावा विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और श्रीमद्भागवत का श्रवण आध्यात्मिक उन्नति के द्वार खोलता है।
दान-पुण्य से कटेगा कष्ट: क्या दान करना है शुभ?
ज्योतिषाचार्य पं. विकास शास्त्री के मुताबिक, अधिमास में किया गया दान अक्षय फल देता है। श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे:
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जरूरतमंदों की मदद: अनाज, शीतल जल, तिल, वस्त्र और मौसमी फलों का दान करें।
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स्नान का महत्व: यदि पवित्र नदियों में स्नान संभव न हो, तो घर पर ही सामान्य जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
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दीपदान: शाम के समय तुलसी के पौधे और देवालयों में दीपदान करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।
यह समय आत्मचिंतन और भक्ति का है, इसलिए इसे सांसारिक चकाचौंध के बजाय भगवत कृपा प्राप्त करने में लगाना चाहिए।
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