
देशभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इसके दुरुपयोग और फेक न्यूज फैलाने के मामलों में भी लगातार तेजी देखने को मिल रही है। इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सनसनी फैलाने के लिए किस हद तक खतरनाक कारनामे किए जा रहे हैं, इसका एक ताजा और बेहद चौंकाने वाला मामला कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से सामने आया है। बेंगलुरु पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कर्नाटक के मुख्य विधानसभा मुख्यालय यानी विधान सौधा (Vidhana Soudha) में एक भीषण बम धमाका होने का फर्जी एआई (AI-Generated) वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करने वाले एक 25 वर्षीय युवक को धर दबोचा है। पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपी मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और रोजी-रोटी की तलाश में बेंगलुरु आया था। इस झूठे और भ्रामक वीडियो के जरिए शहर में दहशत फैलाने की कोशिश करने वाले इस आरोपी की गिरफ्तारी से साइबर सेल और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस सनसनीखेज मामले की पूरी सच्चाई क्या है और पुलिस ने किस तरह इस आरोपी तक अपनी पहुंच बनाई।
इंस्टाग्राम पर अपलोड किया गया था विधान सौधा में विस्फोट का फर्जी वीडियो
बेंगलुरु पुलिस और साइबर क्राइम सेल से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो तेजी से वायरल होना शुरू हुआ था। इस वीडियो में कर्नाटक के सबसे प्रतिष्ठित और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले विधानसभा भवन ‘विधान सौधा’ को दिखाया गया था, जिसमें अचानक एक भयंकर विस्फोट (Blast) होते हुए नजर आ रहा था।
वीडियो की बनावट और विजुअल्स इतने शातिर तरीके से एडिट किए गए थे कि पहली नजर में किसी आम इंसान के लिए यह पहचानना मुश्किल था कि यह असली है या नकली। इस फर्जी वीडियो को देखकर सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया और लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे। वीडियो के वायरल होने के बाद प्रशासन और पुलिस तंत्र तुरंत हरकत में आया, क्योंकि यह सीधे तौर पर राज्य की कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और जनभावनाओं से जुड़ा हुआ एक संवेदनशील मामला था।
बिहार के अररिया जिले का रहने वाला है आरोपी हजरत अली
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधान सौधा पुलिस स्टेशन में तत्काल प्रभाव से भारतीय न्याय संहिता (BNS) और संबंधित साइबर कानूनों के तहत एक गंभीर मामला दर्ज किया गया। इसके बाद बेंगलुरु पुलिस की विशेष टीमों और साइबर सेल ने तकनीकी सर्विलांस (Technical Surveillance) और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर इस फर्जी वीडियो को अपलोड करने वाले यूजर की तलाश शुरू कर दी।
जांच के दौरान पुलिस के हाथ अहम सुराग लगे और उन्होंने इस मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान हजरत अली (25 वर्ष) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार के अररिया जिले का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस की शुरुआती छानबीन में यह बात सामने आई है कि आरोपी हजरत अली कुछ ही महीने पहले रोजगार और काम की तलाश में बेंगलुरु आया था और यहां शहर में पाइप फिटिंग या प्लंबिंग से जुड़े छोटे-मोटे कार्यों में मजदूरी कर रहा था। मजदूरी करने वाला यह युवक इस तरह के खतरनाक तकनीकी हथकंडों का इस्तेमाल करके एआई वीडियो कैसे तैयार किया, इसने पुलिस को भी चौंका दिया है।
पुलिस हिरासत में आरोपी, खंगाले जा रहे हैं पीछे छिपे गहरे राज और साजिश
विधान सौधा पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी हजरत अली फिलहाल पुलिस की हिरासत में है और उससे लगातार कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिर इस तरह का भ्रामक और सनसनीखेज फर्जी वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने के पीछे उसकी असल मंशा क्या थी। क्या वह महज रातों-रात सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध होना चाहता था, या फिर इसके पीछे किसी बड़ी साजिश के तहत जनता के बीच डर और अफवाह फैलाने का कोई नापाक इरादा था।
इसके अलावा, पुलिस इस बात की भी बेहद बारीकी से जांच कर रही है कि इस फर्जी एआई फुटेज को तैयार करने, इसे एडिट करने और इंटरनेट पर अपलोड करने में क्या हजरत अली के साथ कोई अन्य शख्स या कोई संगठित गिरोह भी शामिल था या नहीं। पुलिस उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट्स और अन्य डिजिटल डिवाइसेस को खंगाल रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस पूरे षड्यंत्र के तार कहां-कहां तक जुड़े हुए हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में फेक न्यूज और डीपफेक पर लगाम कसने की जरूरत
यह पूरी घटना एक बार फिर से इस बात की गवाही देती है कि आज के आधुनिक तकनीकी युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक (Deepfake) तकनीक का इस्तेमाल किस प्रकार असामाजिक तत्वों द्वारा समाज में डर और भ्रम फैलाने के लिए किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों और साइबर एक्सपर्ट्स का हमेशा से यह मानना रहा है कि सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे किसी भी वीडियो या खबर को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करनी चाहिए।
कर्नाटक पुलिस ने आम जनता से भी यह अपील की है कि वे इस तरह के किसी भी भ्रामक, अप्रमाणित या सनसनीखेज वीडियो को आगे शेयर न करें और तुरंत इसकी सूचना साइबर सेल को दें। विधान सौधा जैसे अति-सुरक्षित और ऐतिहासिक सरकारी भवन को निशाना बनाकर फर्जी वीडियो वायरल करने वाले इस आरोपी के खिलाफ पुलिस अब बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरकत करने की हिम्मत न जुटा सके।
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