एथेंस से वेनिस के लिए निकली ‘स्कारलेट लेडी’ नाम की लग्जरी क्रूज शिप इन दिनों गहरे संकट में है। करीब 2000 LGBTQ+ यात्रियों को लेकर चल रहे इस जहाज को मुस्लिम बहुल देशों तुर्किए और मिस्र ने अपने बंदरगाहों पर लंगर डालने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। इसके चलते यह शिप अब समंदर के बीच ही अपने अगले पड़ाव की तलाश में भटक रहा है।
पारिवारिक मूल्यों का हवाला देकर तुर्किए ने रोकी एंट्री
इस क्रूज का संचालन ‘वर्जिन वॉयजेज’ द्वारा किया जा रहा है, जिसे LGBTQ+ यात्रियों के लिए खास तौर पर ‘अटलांटिस इवेंट्स’ कंपनी ने चार्टर किया था। यात्रा के तय कार्यक्रम के अनुसार, जहाज को तुर्किए के बंदरगाहों पर रुकना था, लेकिन तुर्किए सरकार ने इसे अपने ‘पारिवारिक और नैतिक मूल्यों’ के खिलाफ बताते हुए रोक दिया। तुर्किए के अधिकारियों का कहना था कि, “इस क्रूज में सवार समूह हमारे समाज की संरचना से मेल नहीं खाता और इसके आने की खबर से ही आम जनता के बीच भारी आक्रोश और चिंता पैदा हो गई थी।”
मिस्र का भी सख्त रुख, यात्री हताश
तुर्किए से निराशा हाथ लगने के बाद क्रूज चालक दल ने उम्मीद जताई थी कि मिस्र उन्हें अपने बंदरगाह पर रुकने की अनुमति देगा। लेकिन मिस्र के अधिकारियों ने भी बिना किसी आधिकारिक बयान के जहाज को प्रवेश देने से मना कर दिया।
कलाकार की नाराजगी: इस क्रूज पर सवार मशहूर ब्रॉडवे कलाकार पैटी लुपोन ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बताया कि क्रूज पर मौजूद करीब 2000 यात्रियों के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि उनके पास अब आगे का कोई निश्चित रूट नहीं बचा है।
‘अटलांटिस इवेंट्स’ का बयान: पिछली बार तो सब ठीक था
कंपनी के सीईओ रिच कैंपबेल ने मिस्र के इस फैसले पर हैरानी जताई है। उनका कहना है कि पिछली बार जब उनका क्रूज काहिरा (मिस्र) पहुँचा था, तब किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई थी। अब अचानक मिले इस इनकार से कंपनी और यात्रियों, दोनों के लिए बड़ी दुविधा खड़ी हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तुर्किए और मिस्र, दोनों ही देशों में समलैंगिक समुदाय और उनके अधिकारों को लेकर कानून बेहद सख्त हैं। तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगान पहले भी कई बार ‘प्राइड परेड’ पर प्रतिबंध लगा चुके हैं और अब यह मामला अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक और सांस्कृतिक चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल, क्रूज ऑपरेटर वैकल्पिक बंदरगाहों की तलाश कर रहे हैं ताकि 10 दिनों की इस लंबी यात्रा को सुरक्षित तरीके से पूरा किया जा सके।
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