गर्मियों के मौसम में चिलचिलाती धूप और उमस न केवल हमारी त्वचा को झुलसाती है, बल्कि इसका सबसे पहला और बुरा असर आंखों के आस-पास की नाजुक स्किन पर पड़ता है। अक्सर लोग चेहरे की टैनिंग, ग्लो और पिंपल्स को ठीक करने के लिए महंगे फेशियल और स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन आंखों के नीचे बढ़ती सूजन (Puffiness) और लगातार गहरे होते डार्क सर्कल (Dark Circles) को नजरअंदाज कर देते हैं। धीरे-धीरे यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि चेहरे की पूरी रौनक गायब हो जाती है और व्यक्ति हर वक्त थका हुआ, बीमार या अपनी उम्र से काफी बड़ा नजर आने लगता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों का बढ़ता तापमान, शरीर में पानी की कमी और देर रात तक स्क्रीन पर आंखें गड़ाए रखना इस समस्या को कई गुना बढ़ा देता है।
क्या है ‘पेरिऑर्बिटल पफीनेस’? जो आंखों को बना देती है सूजा हुआ
हमारी आंखों के आस-पास की त्वचा पूरे शरीर की तुलना में लगभग दस गुना ज्यादा पतली और बेहद संवेदनशील होती है। जब गर्मियों में अत्यधिक पसीना बहने से शरीर डिहाइड्रेट होने लगता है, तो त्वचा अपनी प्राकृतिक नमी खो देती है। इसके अलावा लंबे समय तक मोबाइल-लैपटॉप का इस्तेमाल करने और देर रात तक जागने से आंखों के आस-पास के टिश्यूज (Tissues) में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को पेरिऑर्बिटल पफीनेस (Periorbital Puffiness) या ‘फ्लूइड रिटेंशन’ कहा जाता है। इसी वजह से सुबह उठने पर आंखें फूली हुई और सूजी नजर आती हैं।
क्यों गर्मियों में ज्यादा काले और गहरे हो जाते हैं घेरे?
जब शरीर में पानी और पोषण की कमी होती है, तो आंखों के नीचे की पतली त्वचा बेजान होकर अंदर की ओर धंसने लगती है। धूप की तेज यूवी किरणें (UV Rays) इस हिस्से में मेलेनिन का स्तर बढ़ा देती हैं, जिससे पिगमेंटेशन गहरा हो जाता है। कुछ लोगों की त्वचा के नीचे मौजूद नीली-काली रक्त वाहिकाएं (Blood Vessels) जेनेटिक रूप से बहुत करीब होती हैं, जो मानसिक तनाव, कम नींद और थकान के कारण बाहर से अत्यधिक डार्क और स्पष्ट दिखाई देने लगती हैं।
1. ठंडे चम्मच और खीरे की स्लाइस से करें कोल्ड कंप्रेस
यदि सुबह उठते ही आंखें सूजी हुई लग रही हैं, तो फ्रिज में रखे ठंडे खीरे के गोल टुकड़े या दो स्टील के चम्मचों को 10 मिनट के लिए फ्रीजर में रखकर अपनी बंद आंखों पर रखें। यह ठंडी सिकाई आंखों के आस-पास की फैली हुई रक्त वाहिकाओं को तुरंत सिकोड़ देती है, जिससे अतिरिक्त तरल पदार्थ हट जाता है और पफीनेस मिनटों में गायब हो जाती है।
2. इस्तेमाल की हुई टी-बैग्स (Tea Bags) का चमत्कारी असर
ग्रीन टी या ब्लैक टी बनाने के बाद बची हुई टी-बैग्स को फेंकने के बजाय फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें। इन ठंडी टी-बैग्स को 15 मिनट के लिए अपनी आंखों पर रखें। चाय में प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला ‘कैफीन’ और एंटीऑक्सीडेंट्स आंखों की थकावट को दूर करते हैं, वहां के ब्लड सर्कुलेशन को दुरुस्त करते हैं और डार्क सर्कल के कालेपन को हल्का करने में बेहद मददगार साबित होते हैं।
3. डाइट में नमक की मात्रा कम करें और बढ़ाएं वॉटर इनटेक
अगर आप गर्मियों में पैक्ड चिप्स, फ्रोजन स्नैक्स या भोजन में ऊपर से ज्यादा नमक खाने के शौकीन हैं, तो यह आदत आपकी आंखों की खूबसूरती बिगाड़ सकती है। अत्यधिक सोडियम शरीर के भीतर पानी को रोककर (Fluid Retention) रखता है, जो पफीनेस के रूप में दिखता है। इसलिए नमक का सेवन संतुलित करें और दिनभर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पीएं। अपनी थाली में तरबूज, खीरा, खरबूजा और संतरा जैसे पानी से भरपूर फलों को जरूर शामिल करें।
4. 8 घंटे की गहरी नींद और डिजिटल डिटॉक्स है अनिवार्य
डार्क सर्कल को परमानेंट खत्म करने का सबसे बड़ा और मुफ्त इलाज है एक अच्छी और सुकून भरी नींद। रोजाना रात को मोबाइल को खुद से दूर रखें और 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लें। सोते समय अपने सिर को तकिए की मदद से थोड़ा ऊंचा रखें, ताकि सोते वक्त आंखों के नीचे तरल पदार्थ जमा न हो सके।
5. यूवी प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस का करें इस्तेमाल
जब भी तेज धूप में घर से बाहर निकलें, तो केवल चेहरे पर सनस्क्रीन लगाना काफी नहीं है। आंखों की सुरक्षा के लिए $100\%$ यूवी प्रोटेक्शन वाले अच्छी क्वालिटी के सनग्लासेस (धूप का चश्मा) जरूर पहनें। यह आंखों के नीचे की संवेदनशील त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने (Early Aging) और कालेपन से पूरी तरह सुरक्षित रखता है।
कब घरेलू नुस्खे छोड़कर डॉक्टर (Ophthalmologist/Dermatologist) से मिलना है जरूरी?
आमतौर पर आंखों के नीचे के काले घेरे और हल्की सूजन लाइफस्टाइल में सुधार करने से ठीक हो जाते हैं। लेकिन, यदि आंखों की सूजन हफ्तों तक बनी रहे, आंखों में लगातार तेज दर्द हो, पानी आए, खुजली या लालिमा की शिकायत हो, या फिर अचानक केवल एक ही आंख के नीचे अत्यधिक सूजन आ जाए, तो इसे सामान्य ब्यूटी प्रॉब्लम समझने की भूल बिल्कुल न करें। यह गंभीर लक्षण किसी अंदरूनी इन्फेक्शन, आई एलर्जी, थायराइड की बीमारी (जैसे ग्रेव्स डिजीज) या किडनी की समस्या की ओर इशारा हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराना ही सबसे सुरक्षित कदम है।
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