पूरी दुनिया अभी पिछले कुछ सालों की महामारियों और संक्रामक बीमारियों के दौर से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है कि वैश्विक स्वास्थ्य पटल पर एक बार फिर बेहद डराने वाली खबर सामने आ रही है। अफ्रीका महाद्वीप में घातक ‘इबोला वायरस’ (Ebola Virus) का कहर एक बार फिर तेजी से पैर पसार रहा है। कांगो (DR Congo) और युगांडा में इबोला के मामलों में आई अचानक बाढ़ ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। इम्पीरियल कॉलेज लंदन के रिसर्चर्स और WHO की संयुक्त एनालिसिस के अनुसार, ग्राउंड जीरो पर हालात आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा बदतर और भयावह हो सकते हैं।
छुपाया जा रहा है असली आंकड़ा? संक्रमितों की संख्या 1000 के पार होने की आशंका
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य एजेंसियों ने आशंका जताई है कि मई 2026 के मध्य तक अफ्रीका में इबोला के वास्तविक मामले 400 से 800 के बीच पहुंच चुके हैं। कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का तो यहां तक मानना है कि बिना रिपोर्ट हुए मामलों को जोड़ लिया जाए, तो यह आंकड़ा 1000 के पार जा चुका है। इस समय संक्रमण का सबसे खतरनाक गढ़ कांगो का ‘इटुरी प्रांत’ बना हुआ है, जहां अप्रैल के आखिरी सप्ताह से हर दिन रिकॉर्ड तोड़ नए मरीज मिल रहे हैं। यदि समय रहते कम्युनिटी स्प्रेड को नहीं रोका गया, तो यह वायरस एक बार फिर वैश्विक संकट का रूप ले सकता है।
कैसे फैलता है इबोला वायरस? जानें संक्रमण का जरिया
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, इबोला कोई आम फ्लू नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत घातक और संक्रामक वायरल बीमारी है। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि यह कोरोना वायरस की तरह हवा (Airborne) या पानी के जरिए नहीं फैलता। लेकिन इसका संक्रमण फैलने का तरीका बेहद आक्रामक है:
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बॉडी फ्लूइड्स से संक्रमण: यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, उल्टी, लार, मूत्र या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों (Body Fluids) के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।
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हेल्थ वर्कर्स पर सबसे ज्यादा खतरा: संक्रमित मरीज के बेहद करीब रहने, उनके पहने हुए कपड़ों, बिस्तरों या इस्तेमाल की गई सुइयों को छूने से संक्रमण का खतरा शत-प्रतिशत बढ़ जाता है। यही वजह है कि मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर्स, नर्सेस और पैरामेडिकल स्टाफ इस वायरस के सबसे पहले शिकार बनते हैं।
शुरुआती लक्षणों को पहचानना क्यों है सबसे बड़ी चुनौती?
इबोला वायरस का ‘इन्क्यूबेशन पीरियड’ (संक्रमण होने से लेकर लक्षण दिखने का समय) 2 से 21 दिनों का होता है, हालांकि ज्यादातर मरीजों में 8 से 10 दिनों के भीतर इसके लक्षण उभरने लगते हैं। शुरुआत में इसे पहचानना इसलिए मुश्किल होता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण किसी आम मौसमी वायरल बुखार या मलेरिया जैसे लगते हैं:
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अचानक तेज बुखार आना।
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असहनीय सिरदर्द और मांसपेशियों व जोड़ों में तेज दर्द (बदन दर्द)।
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अत्यधिक कमजोरी और गले में खराश या दर्द होना।
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बीमारी बढ़ने पर गंभीर लक्षण: जैसे-जैसे वायरस शरीर के अंगों पर हमला करता है, मरीज को लगातार उल्टी, खूनी दस्त, त्वचा पर गहरे चकत्ते (Skin Rashes) होने लगते हैं।
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अंतिम चरण (इंटरनल ब्लीडिंग): रोग के गंभीर होने पर मरीज के मसूड़ों, नाक, आंख या मल-मूत्र के रास्ते अंदरूनी और बाहरी ब्लीडिंग (रक्तस्राव) शुरू हो जाती है, जो मल्टी-ऑर्गन फेलियर का कारण बनती है। इसकी मृत्यु दर (Mortality Rate) बेहद उच्च होती है।
बचाव ही एकमात्र इलाज: इबोला से सुरक्षित रहने के 5 अचूक उपाय
चूंकि इबोला एक अत्यंत जानलेवा बीमारी है, इसलिए चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इससे बचने के लिए कड़े नियमों का पालन करना ही एकमात्र रास्ता है:
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प्रभावित इलाकों की यात्रा से बचें: यदि बहुत ज्यादा जरूरी न हो, तो वर्तमान में अफ्रीका के कांगो, युगांडा या प्रभावित देशों की यात्रा करने से पूरी तरह बचें।
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संक्रमितों से दूरी: किसी भी ऐसे व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से बचें जो बीमार है या जिसे तेज बुखार है। उनके द्वारा इस्तेमाल की गई किसी भी वस्तु को न छुएं।
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सख्त हाइजीन मेंटेन करें: दिन में कई बार हाथों को साबुन और साफ पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं या अल्कोहल-बेस्ड सैनिटाइज़र का उपयोग करें।
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हेल्थ वर्कर्स के लिए सख्त गाइडलाइन: मरीजों का इलाज करते समय डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के लिए फुल-बॉडी पीपीई (PPE) किट, डबल लेयर मास्क, ग्लव्स और फेस शील्ड पहनना अनिवार्य है। अस्पताल में बायो-मेडिकल वेस्ट का निपटारा बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए।
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वैक्सीनेशन और तुरंत आइसोलेशन: जो लोग हाल ही में प्रभावित क्षेत्रों से लौटे हैं और जिनमें कोई भी लक्षण दिख रहा है, उन्हें तुरंत खुद को आइसोलेट कर मेडिकल जांच करानी चाहिए। वर्तमान में हेल्थ एजेंसियों द्वारा दी जा रही इबोला वैक्सीन और त्वरित ‘कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग’ इस वायरस की चेन को तोड़ने में सबसे ज्यादा प्रभावी साबित हो रही है।
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