Ram Mandir Donation Row: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के चढ़ावे (Donation) में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला लगातार गर्माता जा रहा है। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह इस मुद्दे को लेकर पहले से ही सरकार और मंदिर ट्रस्ट पर हमलावर हैं।
इस बीच, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे और अपनी दबंग छवि के लिए मशहूर भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने इस पूरे विवाद को और ज्यादा संदेहास्पद बना दिया है। हमेशा ‘दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा’ का नारा बुलंद करने वाले बृजभूषण ने इस बार कुछ न बोलते हुए भी बहुत कुछ कह दिया है।
‘सच बोलने की अभी हिम्मत नहीं है, वो बहुत बड़े लोग हैं’
लंबे समय तक दिल्ली में रहने के बाद जब पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह अपने गृह जिले गोंडा पहुंचे, तो मीडिया ने उनसे राम मंदिर चढ़ावे में चोरी को लेकर सवाल किया। इस पर उन्होंने बेहद सधे और रहस्यमयी अंदाज में कहा:
बृजभूषण शरण सिंह का बयान: “अगर मैं इस मामले पर सच बोलूंगा तो बहुत बड़ी परेशानी में आ जाऊंगा। वो बहुत बड़े लोग हैं। सच बोलने की अभी हमारी हिम्मत नहीं है, लेकिन समय आने पर मैं पूरा सच जरूर बोलूंगा।”
जब मीडिया कर्मियों ने उनसे राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के नाम को लेकर सीधा सवाल पूछा, तो बृजभूषण ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि इस विषय पर बोलना या टिप्पणी करना उनका काम नहीं है।
विभीषण और हनुमान जी की चौपाई का किया जिक्र
अपनी स्थिति और राजनीतिक मजबूरी को बयां करने के लिए बृजभूषण शरण सिंह ने रामचरितमानस की एक प्रसिद्ध चौपाई का सहारा लिया। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित विभीषण और बजरंगबली के संवाद का जिक्र करते हुए कहा:
“जिमि दसनन महुं जीभ बिचारी, सुनहु पवनसुत रहनि हमारी”
पूर्व सांसद ने इसका अर्थ समझाते हुए कहा कि जिस तरह लंका में राक्षसों के बीच रहते हुए विभीषण ने हनुमान जी से अपनी लाचारी बयां की थी कि वे 32 कठोर दांतों के बीच एक कोमल जीभ की तरह रह रहे हैं, कुछ वैसी ही स्थिति आज के दौर में उनकी भी बनी हुई है। उनके इस बयान के राजनीतिक गलियारों में कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं।
पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह के दावों से मची है खलबली
आपको बता दें कि इस पूरे विवाद की शुरुआत राम मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी (Account In-charge) महिपाल सिंह के दावों के बाद हुई थी। विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े रहे महिपाल सिंह ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर के चढ़ावे में पिछले कई सालों से सुनियोजित तरीके से चोरी की जा रही है।
महिपाल सिंह के मुख्य दावे इस प्रकार हैं:
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चंपत राय पर आरोप: उन्होंने दावा किया कि इस चोरी की लिखित शिकायत उन्होंने सीधे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से की थी।
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CCTV फुटेज डिलीट करने का दावा: शिकायत दर्ज होने के बाद, जिस कमरे में नोटों की गिनती होती थी, वहां के कई महीनों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज ही गायब यानी डिलीट करवा दिए गए।
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कार्रवाई के बदले मिला इनाम: महिपाल सिंह का कहना है कि चोरों पर ऐक्शन लेने के बजाय, उन्हें ही उनके पद से हटा दिया गया।
इस तरह पकड़ी गई थी नोटों की चोरी, जानिए पूरा खेल
महिपाल सिंह ने मीडिया के सामने उस पूरे तरीके (Modus Operandi) का भी खुलासा किया, जिसके जरिए मंदिर के चढ़ावे में हेरफेर किया जा रहा था:
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गिनती का नियम: नोटों की गिनती के लिए मंदिर के 14 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। बैंक के दो अधिकारी रोजाना इन नोटों की गड्डियों को सीलबंद बक्से में लेकर जाते थे।
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गड्डियों का हेरफेर: नोटों की गिनती के बाद 10-10 गड्डियों को एक साथ बांधकर मुख्य बक्से में रखा जाता था। बैंक अधिकारी बक्से में 10 की जगह 12 या 13 गड्डियां रख देते थे, लेकिन सरकारी वाउचर पर केवल 10 गड्डियां ही दर्ज की जाती थीं।
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बंदरबांट का भंडाफोड़: बक्से को बाहर ले जाकर अतिरिक्त गड्डियों का आपस में बंदरबांट कर लिया जाता था। एक बार शक होने पर महिपाल सिंह ने अचानक बक्सा खुलवाकर दोबारा गिनती करवाई, तो उसमें तय राशि से 5 लाख रुपये ज्यादा निकले। इसी शिकायत का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।
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