अंतरराष्ट्रीय डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) को लेकर चल रही गुप्त और जटिल वार्ताओं के टूटने की खबरों पर आखिरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने खुद पूर्णविराम लगा दिया है। ट्रंप ने मीडिया में आ रही उन सभी रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज और गलत बताया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह ठप हो चुकी है।
अपने पसंदीदा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर एक पोस्ट साझा करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में लिखा कि दोनों देशों के बीच बातचीत बंद होने की खबरें और कुछ नहीं बल्कि महज ‘फेक न्यूज’ (Fake News) हैं।
‘हर दिन हो रही है बात’— ट्रंप ने गिनाए दिन
डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक मीडिया को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के शीर्ष अधिकारियों के बीच बातचीत का सिलसिला लगातार जारी रहा है। ट्रंप ने कूटनीतिक सक्रियता का सबूत देते हुए लिखा, “ईरान के साथ बातचीत बंद नहीं हुई है। हमारी चर्चा चार दिन पहले, तीन दिन पहले, दो दिन पहले, एक दिन पहले और आज भी हुई है।” राष्ट्रपति के इस आधिकारिक बयान ने मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे भारी तनाव के बीच अचानक कूटनीतिक हलकों में एक नई उम्मीद पैदा कर दी है।
ईरान को सख्त चेतावनी: अब आर या पार का समय
बातचीत जारी रहने की पुष्टि करने के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अपने चिर-परिचित अंदाज में बेहद सख्त लहजे में चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि अब वह समय आ चुका है जब एक तरफ या दूसरी तरफ कोई अंतिम समझौता (Deal) हो ही जाना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि इस बातचीत का अंतिम नतीजा क्या होगा, यह अभी अनिश्चित हो सकता है, लेकिन उन्होंने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया कि खुद ईरान को इस समय अमेरिका के साथ एक बड़ी डील करने की सख्त जरूरत है।
ईरानी नेतृत्व और वहां की व्यवस्था की तीखी आलोचना करते हुए ट्रंप ने कहा कि परमाणु और क्षेत्रीय सुरक्षा का यह मुद्दा पिछले कई दशकों से लंबित पड़ा है और इसे अब और ज्यादा समय तक ऐसे ही नहीं चलने दिया जा सकता।
तनाव के बीच ट्रंप की मध्यस्थता: इजरायल-लेबनान सीमा पर थमीं गोलियां
यह पूरा विवाद और अटकलें तब शुरू हुई थीं जब इजरायल द्वारा लेबनान में चलाए गए भीषण सैन्य अभियान के बाद ईरान ने गुस्से में आकर अमेरिका के साथ सभी वार्ताओं से पीछे हटने की एकतरफा घोषणा कर दी थी। इससे पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा गहरा गया था। लेकिन इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने पर्दे के पीछे से एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हासिल की:
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दोनों पक्षों को किया राजी: डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) और लेबनान के उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह (Hezbollah) के प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत की और दोनों पक्षों को तुरंत गोलाबारी रोकने (Ceasefire) पर राजी कराया।
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बेरूत पर हमला रोका: ट्रंप ने निजी तौर पर नेतन्याहू से अनुरोध किया कि वे लेबनान की राजधानी बेरूत पर कोई बड़ा हमला न करें, जिसके बाद इजरायली सैनिकों को सीमा से वापस बुला लिया गया। इस बड़ी कामयाबी के बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा— ‘थैंक यू बिबी!’ (बेंजामिन नेतन्याहू का निकनेम)।
दबाव और कूटनीति की दोहरी रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ईरान पर चौतरफा दबाव बढ़ाने और साथ ही बातचीत के दरवाजे खुले रखने की उनकी पुरानी ‘आर्ट ऑफ द डील’ (Art of the Deal) रणनीति का हिस्सा है। अमेरिका-ईरान वार्ता का यह मुद्दा न केवल परमाणु हथियारों की होड़ को रोकने के लिए जरूरी है, बल्कि यह वैश्विक तेल बाजार, आर्थिक प्रतिबंधों और पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता से जुड़ा हुआ है। यदि आने वाले दिनों में ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच कोई ऐतिहासिक समझौता हो जाता है, तो वैश्विक राजनीति को बड़ी राहत मिलेगी, अन्यथा क्षेत्र में फिर से बारूद सुलगने की आशंका बनी रहेगी।
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