ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने पद संभालने के बाद अपने पहले बड़े सार्वजनिक संदेश में अमेरिका और इजरायल पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये दोनों देश ईरान को अस्थिर करने और देश को ‘घुटनों पर लाने’ की गहरी साजिश रच रहे हैं। मार्च में सत्ता संभालने वाले 56 वर्षीय खामेनेई ने यह संदेश मजलिस (ईरानी संसद) की स्थापना की वर्षगांठ पर जारी किया है।
दुश्मन की ‘नई साजिश’ का पर्दाफाश
राज्य टेलीविजन पर प्रसारित संदेश में खामेनेई ने कहा कि युद्ध और आर्थिक दबाव के बावजूद दुश्मन अपने मकसद में नाकाम रहा है। अब, अमेरिका और इजरायल एक नई चाल चल रहे हैं—वे ईरान के भीतर ‘आंतरिक विभाजन’ और ‘विघटन’ पैदा करके अपनी सैन्य असफलताओं की भरपाई करना चाहते हैं।
उन्होंने जनता के नाम अपने संबोधन में दो महत्वपूर्ण अपील कीं:
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राष्ट्रीय एकता: देश के भीतर किसी भी प्रकार के आंतरिक मतभेदों को दरकिनार कर मजबूती से एकजुट रहने का आह्वान।
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सामंजस्य बनाए रखना: दुश्मन के प्रोपेगेंडा और भ्रामक प्रचार से बचते हुए समाज में आपसी सौहार्द और सामंजस्य बनाए रखना।
लगातार जारी है सैन्य तनातनी
यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में सैन्य तनाव अपने चरम पर है। अमेरिकी सेना ने बुधवार को फिर से रक्षात्मक कार्रवाई करते हुए ईरान के चार ड्रोन नष्ट कर दिए और एक लॉन्च साइट पर हमला किया। अमेरिका का आरोप है कि ये ड्रोन होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए गंभीर खतरा थे। यह इस सप्ताह की दूसरी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई है, जो साबित करती है कि युद्ध का तनाव कम होने के बजाय बढ़ रहा है।
ट्रंप की दो-टूक: ‘ईरान आखिरी सांसें गिन रहा है’
वहीं वाशिंगटन में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर भारी दबाव बनाते हुए कहा है कि ईरान ‘अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है।’ ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वे समझौते के करीब जरूर हैं, लेकिन किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करेंगे। वे परमाणु सामग्री के आत्मसमर्पण जैसी शर्तों पर अड़े हुए हैं, जिसे तेहरान ने अब तक मानने से इनकार कर दिया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?
मोजतबा खामेनेई का यह संदेश इसलिए भी अहम है क्योंकि उनके पिता और पूर्व नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमलों में मृत्यु हो गई थी। उसके बाद से मोजतबा ने पहली बार इतनी मुखरता से अपनी रणनीति स्पष्ट की है। विश्लेषकों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान अब न केवल सैन्य मोर्चे पर, बल्कि ‘वैचारिक मोर्चे’ पर भी अमेरिका के खिलाफ एक कड़ा रुख अपनाने की तैयारी कर रहा है।
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