चीन का रोजगार बाजार इस समय एक अजीब और चिंताजनक स्थिति से गुजर रहा है। जहां एक ओर देश में बेरोजगारी का संकट गहरा रहा है, वहीं दूसरी ओर युवाओं की हताशा इस कदर बढ़ गई है कि वे महानगरों की चमकदार नौकरियों को छोड़कर दूर-दराज के घास के मैदानों में भेड़ चराने (चरवाहे) का काम करने को तैयार हैं। हाल ही में इसका एक उदाहरण तब देखने को मिला, जब केवल 2 पदों के लिए 700 से ज्यादा लोगों ने आवेदन कर दिए।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विज्ञापन
मंगोलियाई सीमा के पास फार्म मालिक जुओ शियाओयोंग ने जब 2 चरवाहों की जरूरत के लिए विज्ञापन निकाला, तो उन्हें उम्मीद नहीं थी कि यह चीन के सोशल मीडिया ‘वीबो’ पर सनसनी मचा देगा। इस विज्ञापन को 5.9 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया और 21,000 से अधिक लोगों ने इस पर चर्चा की। आवेदकों की भीड़ इतनी थी कि उसमें यूनिवर्सिटी टॉपर्स, ग्रेजुएट्स और बड़ी कंपनियों के व्हाइट-कॉलर कर्मचारी भी शामिल थे।
क्यों शहरों से भाग रहे हैं युवा?
चीन के युवाओं की इस हताशा के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:
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‘996’ वर्क कल्चर: चीन की निजी कंपनियों में सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, हफ्ते में 6 दिन काम करने का कल्चर है। अत्यधिक शारीरिक और मानसिक थकान के कारण युवा अब ऐसी नौकरियों से तौबा कर रहे हैं।
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’35 का श्राप’: चीन में एक कड़वी सच्चाई यह बन चुकी है कि 35 साल की उम्र पार करते ही कंपनियों में नौकरी मिलना मुश्किल हो जाता है। 700 आवेदकों में से आधे युवा 1990 के दशक में जन्मे थे, जो इस ‘एज बैरियर’ के डर से भविष्य को लेकर डरे हुए हैं।
वेतन और चुनौतियां: क्या है काम?
इस चरवाहे की नौकरी का वेतन 8,000 युआन (करीब 1.1 लाख रुपये) प्रतिमाह है, जो चीन के शहरी औसत वेतन (6,000 युआन) से कहीं अधिक है। इसमें आवास और भोजन की सुविधा भी मुफ्त है। हालांकि, काम आसान नहीं है:
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गर्मियों में 2,000 हेक्टेयर के मैदान में 3,000 भेड़ों को संभालना।
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सर्दियों में -30°C तापमान में बिना किसी बाहरी मदद के भेड़ों की देखभाल और सफाई।
भविष्य के लिए बड़े खतरे
चीन में आने वाले समय में जॉब मार्केट और भी चुनौतीपूर्ण होने की आशंका है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता उपयोग इंसानी नौकरियां छीन रहा है, और इस गर्मी में 1.27 करोड़ नए ग्रेजुएट्स बाजार में आने वाले हैं। ऐसे में यह बेरोजगारी का संकट और गहरा सकता है।
अंत में किसे मिली नौकरी?
इतने सारे आवेदनों के बाद भी फार्म मालिक ने कुंवारे या शहरी युवाओं को चुनने से इनकार कर दिया। उन्होंने 1980 के दशक में जन्मे चार अनुभवी लोगों (दो विवाहित जोड़ों) को नौकरी दी। मालिक का मानना है कि यह काम किसी पर्यटन जैसा नहीं है; यह एक साल के भयंकर अकेलेपन और कड़ाके की ठंड का इम्तिहान है, जिसे शायद शहर के युवा लंबे समय तक नहीं झेल पाएंगे।
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