पश्चिम एशिया (Middle East) में कई दिनों से थमी ईरान-अमेरिका जंग के एक बार फिर से बेहद हिंसक होने के संकेत मिल रहे हैं। एक तरफ जहां दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में मानी जा रही थी, वहीं दूसरी तरफ सोमवार को अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में अचानक कई बड़े हमले कर दिए हैं। इस ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध का तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक समुद्री मार्ग होर्मुज के बिल्कुल करीब स्थित ईरानी शहर बंदर अब्बास में सोमवार को कई जोरदार धमाके सुनाई दिए, जिसके बाद ईरान ने अपने पूरे एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम को हाई अलर्ट पर डाल दिया है।
आत्मरक्षा में किया हमला, बारूदी सुरंगें बिछाने वाली ईरानी नावों को बनाया निशाना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने इस औचक सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ने यह कदम पूरी तरह से “आत्मरक्षा” (Self-Defense) में उठाया है।
अमेरिकी सेना के अनुसार, यह हमला मुख्य रूप से निम्नलिखित ठिकानों पर किया गया:
-
मिसाइल लॉन्च साइट्स: दक्षिणी ईरान में स्थित उन ठिकानों को ध्वस्त किया गया जहां से अमेरिकी सैनिकों पर हमले का खतरा था।
-
माइन-लेइंग बोट्स (बारूदी सुरंगें बिछाने वाली नावें): बंदर अब्बास के पास समंदर में बारूदी सुरंगें बिछा रही ईरानी नावों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया।
सैन्य प्रवक्ता ने साफ किया कि अमेरिकी सेना चल रहे संघर्ष-विराम (Ceasefire) के दौरान लगातार संयम बरत रही है, लेकिन अपने सैनिकों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को खतरे में डालकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
शांति वार्ता के बीच ‘अब्राहम अकॉर्ड’ पर अड़े ट्रंप, 5 मुस्लिम देशों पर भारी दबाव
अमेरिकी सेना के इन हमलों ने इसलिए भी सबको चौंका दिया है क्योंकि ठीक इसी समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक सकारात्मक पोस्ट शेयर की थी। ट्रंप ने लिखा था कि युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान के साथ शांति वार्ता काफी अच्छे ढंग से आगे बढ़ रही है।
हालांकि, इस बातचीत के बीच ट्रंप ने एक बेहद जटिल और नई कूटनीतिक शर्त रख दी है। ट्रंप अपनी पुरानी नीति ‘अब्राहम अकॉर्ड’ (Abraham Accords) पर टिके हुए हैं, जो इजरायल और अरब/मुस्लिम देशों के बीच राजनयिक और आर्थिक संबंध स्थापित करने से जुड़ा समझौता है। ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
“अमेरिका की ओर से इस बेहद जटिल पहेली को सुलझाने के लिए किए गए सभी प्रयासों के बाद, इस शांति वार्ता में मध्यस्थता कर रहे सभी देशों के लिए यह अनिवार्य (Mandatory) होना चाहिए कि वे अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करें। यदि ईरान इस ऐतिहासिक समझौते का हिस्सा बनता है, तो यह उसके लिए सम्मान की बात होगी।”
उल्लेखनीय है कि इस शांति वार्ता की मध्यस्थता कर रहे देशों में से यूएई (UAE) और बहरीन पहले ही इस समझौते पर दस्तखत कर चुके हैं। लेकिन अब ट्रंप प्रशासन का सीधा दबाव सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और जॉर्डन जैसे बड़े मुस्लिम देशों पर है कि वे भी इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने वाले इस समझौते पर तुरंत हस्ताक्षर करें।
अज्ञात स्थान से काम कर रहे ईरान के सर्वोच्च नेता, इसलिए फैसलों में हो रही देरी
अमेरिकी खुफिया और रक्षा अधिकारियों ने ईरान की अंदरूनी राजनीतिक स्थिति को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। अधिकारियों के मुताबिक, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई इस समय बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटकर किसी अज्ञात और बेहद सुरक्षित स्थान से सरकार चला रहे हैं। उनका बाहरी दुनिया के साथ संपर्क बेहद सीमित और गोपनीय है।
ईरानी प्रशासन उन तक संदेश पहुंचाने के लिए एक बेहद पेचीदा और पारंपरिक संदेशवाहकों (Messengers) के गुप्त नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है। यही वजह है कि जब अमेरिका शांति समझौते से जुड़ा कोई नया मसौदा या अपनी प्रस्तावित शर्तें भेजता है, तो उसे मोजतबा खामेनेई तक पहुंचाने और वहां से हरी झंडी मिलने में लंबा वक्त लग रहा है, जिससे कूटनीतिक प्रतिक्रियाओं में देरी हो रही है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को दावा किया कि ईरान के सर्वोच्च नेता मसौदा समझौते की मौजूदा मुख्य रूपरेखा पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं, जिसके बाद ट्रंप को अगले कुछ दिनों में अंतिम निर्णय होने की पूरी उम्मीद है।
The News 11 – ताज़ा हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया
