भारत में अब कैंसर केवल 60-70 साल की उम्र के बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है। आज के समय में 30 से 40 वर्ष के युवा भी इस खतरनाक बीमारी की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। हाल ही में जाने-माने ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) डॉक्टर वरुण गोयल के पास एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया।
गुरुग्राम की एक नामी कंपनी में कार्यरत 34 वर्षीय मार्केटिंग मैनेजर, जो देखने में पूरी तरह स्वस्थ थे, सिगरेट नहीं पीते थे, और वीकेंड पर क्रिकेट भी खेलते थे, उन्हें स्टेज 3 का कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) डायग्नोज हुआ। वह बीते 8 महीनों से लगातार थकान और मल त्याग (Bowel Habits) में बदलाव को नजरअंदाज कर रहे थे और इसे ऑफिस का तनाव और खराब खान-पान मान रहे थे।
डॉक्टर वरुण गोयल के अनुसार, यह कोई इकलौता मामला नहीं है। हर दिन कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले कई युवा इस जाल में फंस रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण उनकी कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल है।
क्या है ‘एक्टिव काउच पोटैटो सिंड्रोम’? (क्या कहती है रिसर्च)
जर्नल ऑफ नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, लंबे समय तक लगातार बैठने की आदत कोलोरेक्टल, एंडोमेट्रियल और फेफड़ों के कैंसर के खतरे को सीधे तौर पर बढ़ाती है।
भ्रम और सच्चाई: यदि आप रोज़ाना सुबह एक घंटा जिम जाते हैं या वॉक करते हैं, लेकिन उसके बाद ऑफिस में लगातार 10 से 12 घंटे कुर्सी पर बैठे रहते हैं, तो भी आप सुरक्षित नहीं हैं। इसी स्थिति को ‘एक्टिव काउच पोटैटो सिंड्रोम’ (Active Couch Potato Syndrome) कहा जाता है, जो आजकल भारतीय कर्मचारियों में बेहद आम हो चुका है।
लंबे समय तक बैठने से शरीर पर होने वाले ४ घातक असर
घंटों तक कुर्सी से चिपके रहने और डेस्क जॉब करने से शरीर के अंदर कई खतरनाक बदलाव होते हैं, जो आगे चलकर कैंसर कोशिकाओं (Cancer Cells) को बढ़ावा देते हैं:
कॉर्पोरेट वर्कर्स इन ८ लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज
यदि नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण आपको 3 से 4 हफ्तों तक लगातार दिखाई दे, तो इसे सामान्य वर्क-स्ट्रेस मानकर टालने की बजाय तुरंत ऑन्कोलॉजिस्ट से संपर्क करें:
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बिना किसी डाइटिंग या प्रयास के अचानक 4-5 किलो वजन कम होना।
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पर्याप्त आराम के बाद भी लगातार अत्यधिक थकान बने रहना।
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मल (Stool) या पेशाब की आदतों में अचानक और लंबा बदलाव आना।
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मल, मूत्र या खांसने के दौरान खून आना।
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शरीर के किसी भी हिस्से (गर्दन, ब्रेस्ट, बगल या जांघ) में बिना दर्द वाली गांठ होना।
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मुंह के छाले जो लंबे समय तक दवाओं के बाद भी ठीक न हो रहे हों।
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लगातार बनी रहने वाली खांसी या आवाज में भारीपन आना।
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बार-बार पेट फूलना (Bloating) या पेट में लगातार दर्द रहना।
कैंसर के जोखिम से बचने के लिए व्यावहारिक उपाय
डॉक्टर वरुण गोयल के अनुसार, ऑफिस वेलनेस प्रोग्राम और योगा क्लास अपनी जगह अच्छे हैं, लेकिन असल सुधार आपको अपनी दैनिक आदतों में करना होगा:
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