Sawan 2026: हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस दौरान भक्त पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रोक्त विधि के अनुसार शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का एक विशेष तरीका है? छोटी-सी भूल भी पूजा के पूर्ण फल में बाधा बन सकती है। आइए जानते हैं बेलपत्र अर्पित करने का सही विधान और इसके लाभ।
बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका: सीधा या उलटा?
अक्सर भक्त इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि बेलपत्र का कौन सा हिस्सा शिवलिंग पर रखना चाहिए। शास्त्र स्पष्ट कहते हैं कि हमेशा बेलपत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग के ऊपर (यानी स्पर्श करते हुए नीचे की ओर) होना चाहिए और खुरदरा हिस्सा ऊपर की तरफ।
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अर्पण विधि: बेलपत्र को हमेशा अनामिका, मध्यमा और अंगूठे का उपयोग करके इसके मध्य भाग से पकड़कर अर्पित करना चाहिए।
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विशेष सावधानी: इस बात का ध्यान रखें कि अर्पित किया जाने वाला बेलपत्र कहीं से भी कटा-फटा न हो।
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शुभ संकेत: बेलपत्र के चिकने हिस्से पर सफेद चंदन से ‘ॐ’ या ‘राम-राम’ लिखकर अर्पित करना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इससे पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
सावन 2026: कब से कब तक?
इस वर्ष सावन का महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान चार सोमवार का विशेष संयोग बन रहा है, जो शिव भक्तों के लिए विशेष साधना का समय है:
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पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
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दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
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तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026
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चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026
बेलपत्र अर्पित करने के चमत्कारिक लाभ
शिवपुराण के अनुसार, बेलपत्र के तीन पत्ते त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का प्रतीक हैं। इन्हें अर्पित करने से:
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कष्टों से मुक्ति: नियमित रूप से बेलपत्र चढ़ाने से जीवन के बड़े से बड़े कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं।
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मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से अर्पित किया गया बेलपत्र भक्तों की हर मनोकामना पूरी करता है।
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मानसिक शांति: शिव जी की कृपा से मानसिक तनाव दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि व शांति का आगमन होता है।
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कितने बेलपत्र चढ़ाएं: हालांकि महादेव एक बेलपत्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं, लेकिन शास्त्रों में 3, 5, 11, 21 या 108 की संख्या में बेलपत्र चढ़ाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
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