बीजिंग | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले चीन दौरे के बीच सबसे ज्यादा सुर्खियां विदेश मंत्री मार्को रुबियो बटोर रहे हैं। साल 2020 से चीन द्वारा प्रतिबंधित (Banned) किए गए रुबियो न केवल बीजिंग पहुंचे, बल्कि उन्होंने इसके लिए एक बेहद अनोखा कूटनीतिक रास्ता भी अपनाया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए रुबियो ने कागजों पर अपना नाम बदलकर ‘मार्को लू’ (Marco Lu) कर लिया, जिससे ड्रैगन के घर में उनकी एंट्री संभव हो सकी।
‘रुबियो’ से ‘लू’ बनने के पीछे की कूटनीति
एएफपी (AFP) की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन द्वारा लगाया गया प्रतिबंध रुबियो के नाम की स्पेलिंग पर आधारित था। दो वरिष्ठ राजनयिकों ने पुष्टि की है कि कूटनीतिक तालमेल के तहत उनके सरनेम ‘रुबियो’ को बदलकर चीनी शब्द ‘लू’ कर दिया गया। इसी नाम के साथ उन्हें वीजा और प्रवेश की अनुमति मिली।
हालांकि, वाशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने इस पर संतुलित बयान देते हुए कहा कि चीन ने उनके दौरे पर रोक नहीं लगाई है, बल्कि उनके उन पुराने बयानों और कार्यों पर प्रतिबंध है जो उन्होंने सीनेटर रहते हुए चीन के खिलाफ किए थे।
चीन ने रुबियो पर क्यों लगाया था प्रतिबंध?
मार्को रुबियो लंबे समय से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों के मुखर आलोचक रहे हैं। उन पर लगे प्रतिबंधों के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़ी वजहें मानी जाती हैं:
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उइगरों का मुद्दा: रुबियो ने शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों के साथ हो रहे व्यवहार को ‘नरसंहार’ (Genocide) करार दिया था।
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बर्बरता के आरोप: 2021 के एक चर्चित वीडियो संदेश में उन्होंने चीन पर बंधक बनाकर जबरन मजदूरी कराने, महिलाओं के साथ यौन हिंसा और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन के आरोप लगाए थे।
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आस्था पर प्रहार: उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि 10 लाख से ज्यादा लोगों को कैंपों में कैद करना आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा अत्याचार है।
ट्रंप के चीन दौरे के मुख्य बिंदु: क्या है एजेंडा?
साल 2024 में दोबारा सत्ता संभालने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप का यह पहला बीजिंग दौरा है। इस दौरे से वैश्विक राजनीति और व्यापारिक समीकरणों के बदलने की उम्मीद है:
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शी जिनपिंग से मुलाकात: ट्रंप गुरुवार को बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
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किन मुद्दों पर चर्चा?: ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह “कई अलग-अलग विषयों” पर बात करेंगे, जिसमें व्यापार और सीमा सुरक्षा प्रमुख हो सकते हैं।
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ईरान युद्ध पर रुख: मध्य पूर्व में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के बीच ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे जिनपिंग के साथ ईरान युद्ध पर कोई विशेष चर्चा नहीं करेंगे, भले ही चीन ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार हो।
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