लखनऊ | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचाने और वीआईपी कल्चर को कम करने की अपील का उत्तर प्रदेश में व्यापक असर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद पहल करते हुए अपने काफिले (फ्लीट) में वाहनों की संख्या को सीमित कर दिया है। अब उनके काफिले में केवल दो गाड़ियां शामिल होंगी। यह बदलाव न केवल ईंधन की बचत के उद्देश्य से किया गया है, बल्कि जनता के बीच एक सादगीपूर्ण संदेश देने की कोशिश भी है।
श्रद्धांजलि देने पहुंचे सीएम: काफिले में दिखी सादगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस पहल की झलक बुधवार को उस समय दिखी, जब वे दिवंगत प्रतीक यादव को श्रद्धांजलि देने उनके आवास पहुंचे। आमतौर पर मुख्यमंत्री के काफिले में दर्जनों गाड़ियां और भारी सुरक्षा अमला होता है, लेकिन इस बार नजारा अलग था। सीएम के काफिले में मात्र दो कारें थीं। पहली कार में सुरक्षाकर्मी तैनात थे, जबकि दूसरी कार में मुख्यमंत्री और उनका निजी स्टाफ सवार था।
डिप्टी सीएम ने भी घटाए सुरक्षा वाहन, वर्चुअल बैठकों पर जोर
मुख्यमंत्री के इस कदम के बाद उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री, केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी अपने काफिले के वाहनों की संख्या को आधा करने का निर्णय लिया है।
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नया नियम: दोनों डिप्टी सीएम की फ्लीट में शामिल 6 स्कॉर्ट गाड़ियों की संख्या अब घटाकर 3 कर दी गई है।
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अपील: उपमुख्यमंत्री द्वय ने जनता से भी ईंधन बचाने, वर्क फ्रॉम होम (WFH) को बढ़ावा देने और बिजली की बचत के लिए सोलर प्लांट व इंडक्शन का प्रयोग करने का आग्रह किया है।
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मंत्री भी आए आगे: उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने भी अपने काफिले कम कर दिए हैं। कपिलदेव अग्रवाल अब दूसरे शहरों की यात्रा के लिए काफिले के बजाय ट्रेन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
वर्चुअल मीटिंग्स को दी जाएगी प्राथमिकता
प्रशासनिक खर्चों और ईंधन की खपत को कम करने के लिए मंत्रियों ने विभागीय बैठकों को वर्चुअल मोड (Online) में करने के निर्देश जारी किए हैं। उच्च शिक्षा विभाग की अब सभी महत्वपूर्ण बैठकें ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी, ताकि अधिकारियों और कर्मचारियों को लंबी यात्रा न करनी पड़े।
सचिवालय में स्थिति अब भी जस की तस
एक ओर जहां मंत्री मितव्ययिता के रास्ते पर चल पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों पर इन निर्देशों का असर कम दिख रहा है।
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पार्किंग की समस्या: विधान भवन, बापू भवन और एनेक्सी जैसे महत्वपूर्ण परिसरों की पार्किंग गाड़ियों से ठसाठस भरी हुई है।
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नियमों की अनदेखी: मल्टीलेवल पार्किंग फुल होने के कारण वाहन सड़कों पर खड़े किए जा रहे हैं, जो सचिवालय प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
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