Weight Gain and Emotional Health: जब भी वजन बढ़ने की बात आती है, तो हमारा ध्यान सबसे पहले खराब डाइट और जिम न जाने की आदतों पर जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर का बढ़ता हुआ घेरा सिर्फ पिज्जा-बर्गर की देन नहीं है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ‘फिजिकल और इमोशनल कनेक्शन’ की कमी भी मोटापे की एक बड़ी वजह हो सकती है। रिश्तों में बढ़ती भावनात्मक दूरी और शारीरिक जुड़ाव का अभाव आपके मेटाबॉलिज्म से लेकर हार्मोनल बैलेंस तक को बिगाड़ सकता है।
तनाव का ‘कोर्टिसोल’ कनेक्शन: पेट के पास क्यों जमती है चर्बी?
जब आप अपने पार्टनर के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ाव महसूस नहीं करते, तो शरीर अनजाने में ही तनाव (Stress) की स्थिति में चला जाता है। लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर में Cortisol नामक ‘स्ट्रेस हार्मोन’ का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन न केवल आपकी भूख को बढ़ाता है, बल्कि आपको मीठा और अनहेल्दी फैट खाने के लिए उकसाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कोर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर विशेष रूप से पेट के आसपास फैट जमा करने के लिए जिम्मेदार होता है।
नींद की कमी और सुस्त मेटाबॉलिज्म
भावनात्मक असुरक्षा और रिश्तों का तनाव सीधे तौर पर आपकी नींद की क्वालिटी को प्रभावित करता है। सुकून भरी नींद न मिलने के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है। नींद पूरी न होने पर शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होती है, जिससे आप फिजिकल एक्टिविटी या वर्कआउट से जी चुराने लगते हैं। यही नहीं, अधूरी नींद शरीर में भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन्स को भी असंतुलित कर देती है, जिससे आप जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने लगते हैं।
इमोशनल ईटिंग और पैसिव लाइफस्टाइल
अकेलापन या रिश्तों में खालीपन महसूस करने पर कई लोग ‘इमोशनल ईटिंग’ का सहारा लेते हैं। जब मन खुश नहीं होता, तो इंसान भोजन में खुशी तलाशने लगता है। इसके अलावा, इमोशनल कनेक्शन की कमी मोटिवेशन लेवल को भी गिरा देती है। व्यक्ति सक्रिय रहने के बजाय एक ‘पैसिव लाइफस्टाइल’ (सुस्त जीवनशैली) अपना लेता है, जिसमें घंटों टीवी देखना या बिस्तर पर पड़े रहना शामिल है। यह निष्क्रियता धीरे-धीरे वजन बढ़ाती चली जाती है।
हेल्दी बॉन्डिंग कैसे करती है वजन कम करने में मदद?
एक मजबूत भावनात्मक और शारीरिक जुड़ाव शरीर में ‘हैप्पी हार्मोन्स’ जैसे ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन को रिलीज करता है। ये हार्मोन्स तनाव को कम करते हैं और मूड को बेहतर बनाते हैं। बेहतर बॉन्डिंग से स्लीप क्वालिटी सुधरती है और हार्मोनल बैलेंस बना रहता है, जो वजन घटाने की प्रक्रिया (Weight Loss Journey) को आसान बना देता है। फिटनेस का मतलब सिर्फ कैलोरी काउंट करना नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से संतुष्ट होना भी है।
The News 11 – ताज़ा हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया