Bada Mangal 2026 : आज 12 मई 2026 को ज्येष्ठ मास का दूसरा बड़ा मंगल है। उत्तर भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इस पर्व की एक अलग ही छटा देखने को मिल रही है। सड़कों पर जगह-जगह भंडारे, ठंडे पानी और शरबत की व्यवस्था पवनपुत्र के प्रति अटूट आस्था को दर्शा रही है। ज्येष्ठ के महीने में पड़ने वाले इन मंगलों को ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ क्यों कहा जाता है, इसके पीछे त्रेतायुग से लेकर नवाबों के काल तक की कई दिलचस्प कहानियां छिपी हैं।
हनुमान जी ने क्यों लिया ‘बुढ़वा’ रूप?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में भीम को अपनी शक्ति पर बहुत अहंकार हो गया था। भीम के इसी गर्व को चूर करने के लिए हनुमान जी ने ज्येष्ठ मास के एक मंगलवार को एक बूढ़े वानर का रूप धारण किया और भीम के रास्ते में अपनी पूंछ फैलाकर लेट गए। भीम ने लाख कोशिश की, लेकिन वे उस ‘बूढ़े वानर’ की पूंछ तक नहीं हिला सके। जब भीम को अपनी भूल का अहसास हुआ, तो हनुमान जी ने अपने वास्तविक स्वरूप के दर्शन दिए। तभी से इस दिन को ‘बुढ़वा मंगल’ कहा जाने लगा और इस दिन बजरंगबली के वृद्ध स्वरूप की पूजा का विधान शुरू हुआ।
लखनऊ और नवाबों से जुड़ा है गहरा नाता
बड़े मंगल की एक अन्य प्रचलित कहानी लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह से जुड़ी है। कहा जाता है कि जब नवाब के पुत्र की तबीयत खराब हुई और कोई इलाज काम नहीं आया, तब उन्होंने अलीगंज स्थित पुराने हनुमान मंदिर में मन्नत मांगी। पुत्र के स्वस्थ होने की खुशी में नवाब और उनकी बेगम ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। ज्येष्ठ के महीने में ही यह कार्य संपन्न हुआ था, जिसके बाद से लखनऊ में बड़े मंगल पर भंडारे और गुड़ के प्रसाद वितरण की भव्य परंपरा की शुरुआत हुई, जो आज एक साझा संस्कृति का प्रतीक बन चुकी है।
ज्येष्ठ मास: जल दान और ‘नौतपा’ का विशेष महत्व
ज्येष्ठ मास का स्वामी मंगल ग्रह है, जो अग्नि का कारक है। इसी कारण इस महीने में भीषण गर्मी पड़ती है। सूर्य जब रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो ‘नौतपा’ शुरू होता है, जिसमें नौ दिनों तक तपिश अपने चरम पर होती है। शास्त्रों में इस महीने में जल दान को सबसे बड़ा पुण्य बताया गया है। बड़े मंगल के साथ-साथ इस माह में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे पर्व भी आते हैं, जिनमें प्यासों को पानी पिलाना, पंखा, छाता और जूते-चप्पल दान करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
आज के दिन क्या करें?
यदि आप मंगल दोष से पीड़ित हैं या जीवन में बाधाएं आ रही हैं, तो आज के दिन हनुमान जी को सिंदूरी चोला जरूर चढ़ाएं। बजरंग बाण या हनुमान चालीसा का पाठ करना और गरीबों में मीठी वस्तुओं का दान करना आपके कष्टों को कम कर सकता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ मास के मंगलवार को ही प्रभु श्री राम की मुलाकात पहली बार हनुमान जी से हुई थी, इसलिए इस दिन ‘राम-नाम’ का जप करने से हनुमान जी सबसे जल्दी प्रसन्न होते हैं।
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