Astrology : ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल कभी सौभाग्य लाती है तो कभी चुनौतियों का संकेत देती है। आज यानी 12 मई 2026 को आकाशमंडल में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ खगोलीय घटना हो रही है। न्याय के देवता शनि और मन के कारक चंद्रमा एक साथ देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में युति बना रहे हैं। शनि और चंद्रमा के इस मिलन को ज्योतिष की भाषा में ‘विषयोग’ कहा जाता है।
अक्सर लोग ‘विषयोग’ का नाम सुनकर भयभीत हो जाते हैं, लेकिन जब यह योग गुरु की राशि में बनता है और साथ में गुरु भी मौजूद हों, तो इसके परिणाम पूरी तरह नकारात्मक नहीं होते। शनि अनुशासन सिखाते हैं, चंद्रमा मन की गहराई देते हैं और गुरु आध्यात्मिकता का विस्तार करते हैं। आइए जानते हैं कि इस त्रिग्रही योग का किन राशियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने वाला है।
इन 3 राशियों को होगा जबरदस्त लाभ
विषयोग के प्रभाव के बावजूद, गुरु की उपस्थिति कुछ राशियों के लिए सुनहरे अवसर पैदा कर रही है:
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कर्क राशि (Cancer): आपकी राशि के स्वामी चंद्रमा हैं। इस गोचर के दौरान आपके वर्षों से लंबित (Pending) कार्यों की सूची छोटी होने वाली है। काम के सिलसिले में की गई यात्राएं सुखद और आर्थिक लाभ देने वाली साबित होंगी। पुराने रुके हुए प्रोजेक्ट्स में गति आएगी।
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मेष राशि (Aries): मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव तो है, लेकिन आज का यह गोचर आपके लिए एकाग्रता लेकर आएगा। आपकी नई प्लानिंग और रणनीतियां किसी बड़े प्रोजेक्ट को दिलाने में मददगार साबित होंगी। बस जरूरत है तो सोच-समझकर बड़े फैसले लेने की।
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वृश्चिक राशि (Scorpio): पारिवारिक और निजी संबंधों के लिए यह समय वरदान जैसा है। यदि पार्टनर के साथ कोई मनमुटाव चल रहा था, तो रिश्तों में खुशियां वापस लौटेंगी। संतान पक्ष से भी कोई शुभ समाचार मिल सकता है जिससे घर का माहौल सकारात्मक रहेगा।
कुंडली के अलग-अलग भावों पर प्रभाव और सावधानी
विषयोग का प्रभाव इस पर निर्भर करता है कि यह आपकी कुंडली के किस भाव में बन रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार:
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प्रथम से चतुर्थ भाव: स्नायु तंत्र, आंखों और फेफड़ों के प्रति सचेत रहें। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए योग का सहारा लें।
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पंचम से अष्टम भाव: पेट से जुड़ी समस्याएं या दुर्घटनाओं के प्रति सावधानी बरतें। खान-पान पर नियंत्रण रखना अनिवार्य है।
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भाग्य और कर्म भाव (9वीं से 12वीं): भाग्य में उतार-चढ़ाव या नींद की कमी महसूस हो सकती है। डिप्रेशन या तनाव से बचने के लिए आध्यात्मिक गतिविधियों में मन लगाएं।
विषयोग के प्रभाव को कैसे कम करें?
चूंकि यह योग गुरु की राशि में बन रहा है, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु और शिव जी की आराधना करना विशेष फलदायी है। चंद्रमा के दोष को दूर करने के लिए शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करें और शनि की शांति के लिए पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं। अनुशासन का पालन करें और किसी का अपमान करने से बचें, इससे शनि देव का कुप्रभाव कम होगा।
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