नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के मौजूदा दौर में जब 220 और 250 जैसे स्कोर आम बात हो गए हैं, तब क्रिकेट जगत में एक गंभीर सवाल तैर रहा है—क्या गेंदबाजों का सबसे घातक हथियार ‘यॉर्कर’ अब दम तोड़ रहा है? एक समय था जब अंतिम ओवरों में लसिथ मलिंगा की ‘टो-क्रशिंग’ यॉर्कर बल्लेबाजों के पंजों में खौफ भर देती थी, लेकिन आज के दौर में बल्लेबाज क्रीज का ऐसा इस्तेमाल कर रहे हैं कि यॉर्कर फेंकना गेंदबाजों के लिए जी का जंजाल बन गया है।
क्यों मुश्किल हो गई है ‘क्लासिक यॉर्कर’?
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर दीप दासगुप्ता का मानना है कि यॉर्कर खत्म नहीं हुई है, बल्कि बल्लेबाजों के मूवमेंट्स ने इसे जोखिम भरा बना दिया है। उनके अनुसार:
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स्थिर लक्ष्य का अभाव: वसीम अकरम और वकार यूनिस के दौर में बल्लेबाजों के पैर स्थिर रहते थे। आज बल्लेबाज क्रीज की गहराई का इस्तेमाल करते हैं।
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लेंथ का भ्रम: यदि गेंदबाज पारंपरिक यॉर्कर फेंकता है और बल्लेबाज क्रीज में काफी पीछे चला जाए, तो वही गेंद ‘हाफ वॉली’ बन जाती है जिसे मारना आसान है। वहीं, अगर बल्लेबाज आगे निकल आए, तो वह ‘फुलटॉस’ में तब्दील हो जाती है।
आंकड़ों में बल्लेबाजों की ‘क्रूरता’
IPL के इतिहास पर नजर डालें तो डेथ ओवरों (17-20) में रन बनाने की रफ्तार में भारी इजाफा हुआ है।
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2008 (पहला सीजन): डेथ ओवरों का औसत रन रेट 9.41 था।
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2025-26: यह बढ़कर 11.5 के पार पहुंच गया है।
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औसत स्कोर जो कभी 157 हुआ करता था, अब 180-190 के बीच रहता है।
‘इम्पैक्ट प्लेयर’ और वाइड यॉर्कर का चलन
पूर्व कोच डब्ल्यूवी रमन के अनुसार, ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम ने बल्लेबाजी को और गहराई दी है, जिससे गेंदबाजों पर दबाव बढ़ा है। अब गेंदबाज ‘टो-क्रशर’ के बजाय ‘वाइड यॉर्कर’ (ऑफ स्टंप के काफी बाहर) को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका कारण यह है कि वाइड यॉर्कर में गलती होने पर भी कम से कम एक तरफ की बाउंड्री सुरक्षित रखी जा सकती है।
एक्सपर्ट राय: क्या अब भी यॉर्कर है ‘किंग’?
1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य मदनलाल ने ‘पीटीआई’ से बातचीत में कहा कि यॉर्कर आज भी क्रिकेट का अहम हिस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा:
“यॉर्कर फेंकने के लिए अब और भी अधिक सटीकता और निरंतर अभ्यास की जरूरत है। अगर गेंद निशाने से जरा भी चूकी, तो वह छक्का बन जाती है। इसीलिए गेंदबाज अब इसे फेंकने में हिचकिचाते हैं।”
वहीं, सरनदीप सिंह का मानना है कि मिचेल स्टार्क और जसप्रीत बुमराह जैसे गेंदबाज आज भी साबित कर रहे हैं कि अगर गेंद में गति और ‘रिवर्स स्विंग’ हो, तो यॉर्कर को खेलना आज भी नामुमकिन है। अंशुल कंबोज और कार्तिक त्यागी जैसे युवा गेंदबाज अब ‘वाइड यॉर्कर’ को अपनी नई ताकत बना रहे हैं।
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